महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर होना क्यों जरूरी है? 5 बड़े कारण

महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर होना क्यों जरूरी है? 5 बड़े कारण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर होना क्यों जरूरी है? 5 बड़े कारण

Swati Bundela

18 Jun 2022

भारत में कई ऐसी महिलाएं हैं जो एक कुशल गृहिणी और मां तो हैं लेकिन इन सबके के बदले उन्‍हें अपने करियर से हाथ धोना पड़ा। कई महिलाएं तो पढ़ी लिखी हैं लेकिन मेटरनिटी लीव के बाद कभी ऑफिस ज्‍वाइन ही नहीं कर पाईं और इस वजह से उनका बना हुआ करियर भी खत्‍म हो जाता है। अब ये जरुरी है कि हम जाने कि महिलाओं का फिनेंशली आत्मनिर्भर होना भी उतना ही जरुरी है जितना पुरुषों का।

Why being self-dependent for women is important -

1.  बढ़ता है आत्मविश्वास 

किसी भी इंसान के लिए सबसे मुश्किल है किसी अन्य पर निर्भर होना। खास कर महिलाओं के मामलें में ये देखा गया है कि औरतें खाने पीने कपड़ों से लेकर अन्य चीज़ों के लिए कभी पिता तो कभी पति के ऊपर डिपेंड होती हैं। लेकिन आज का दौर बदल चुका है। आज जितनी महिलाएं पढ़ लिख रही हैं उतनी ही उनके अंदर आत्मविश्वास की बढ़ोत्तरी हो रही है और फिनेंशली इंडिपेंडेंस उनके आत्मविश्वास को और बढ़ने में मदद करता है। 

2. घर में मिलती है बराबरी की जगह 

पहले जहाँ घरों में पिता भाई या पति का वर्चस्व हुआ करता था आज महिलाओं के कामकाजी होने से वो बराबरी की हक़दार हुई हैं। चाहे घर का कोई काम हो या बाहर का, महिलाएं बढ़ चढ़ कर आगे आ रही हैं। घरखर्च से लेकर बैंक के लोन भरने तक, महिलाओं की फिनांशल इंडिपेंडेस ने उन्हें बराबरी के मकाम तक पहुँचाया है। 

3. आल राउंडर की भूमिका 

महिलाओं को जहा केवल चूल्हा चौका संभालने और शॉपिंग करने की संज्ञा से देखा जाता था वही आज ये परिभाषा बदलती नज़र आ रही है। जो महिलाएं पहले घर चलाया करती थी वही आज वर्क प्लेस के साथ साथ घर के तमाम ज़िम्मेदारीओं को बड़े ही खूबसूरत तालमेल के साथ निभा रही हैं। वाकई में कहा जा सकता है कि आत्मनिर्भर होना महिलाओं का आल राउंडर कहलाने के बराबर है। 

4. समाज में मिलता है सम्मान 

आत्मनिर्भरता हर किसी के लिए अहम् है ऐसा इसीलिए क्यूंकि ये हमें समाज में एक सम्मानित जगह दिलाती है। जो महिलाएं घर के चूल्हे चौके और घूँघट से बाहर आकर दुनिये से कदम से कदम मिलती हैं उनके लिए समाज में एक अलग सम्मान पैदा होता है। 

5. प्रताड़ना सहने को बाध्य नहीं 

अब वो दिन गए कि घर कि औरतों को डांट धमकाकर घर में रखा जाता था। आज कि पढ़ी लिखी लड़किया अपने हक़ बखूबी जानती हैं। इसीलिए कहते हैं कि महिलों का काम करना, वर्किंग होना जरुरी है। क्यूंकि फिर वो किसी की गुलामी सहने या किसी की प्रताड़ना सहने को बाध्य नहीं होती है।

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