Why Boys Mistakes Are Normal? समाज के इस दोहरे रवैये का क्या कारण?

Swati Bundela
14 Oct 2022
Why Boys Mistakes Are Normal? समाज के इस दोहरे रवैये का क्या कारण?

इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमारा समाज एक पितृसत्तात्मक समाज है। जहां पर महिलाओं पर पुरुष अपना हक समझते हैं और उनके अधिकारों को सीमित रखते हैं। महिलाओं के अधिकारों को सीमित करने का एक तरीका यह भी है कि उनके द्वारा किए गए व्यवहार को घर-परिवार की इज्जत से जोड़ कर उनको गलत और नीचा दिखाया जाए। 

महिलाओं को यह एहसास कराया जाए कि उनके कारण उनके पूरे परिवार को समाज में शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है। हालांकि अगर वैसा ही व्यवहार कोई पुरुष करें तो समाज के लिए वह बात सामान्य हो जाती है। समाज की नजरों में पुरूषों को गलत काम करने के लिए आजादी होती है क्योंकि समाज मानता है कि पुरुषों का अंदरूनी स्वभाव भी वैसा ही होता है। 'वह लड़का है, वह ऐसा कर सकता है!', 'अरे! लड़कों से ऐसी गलतियां हो जाती हैं', 'अब लड़के यह सब नहीं करेंगे तो क्या लड़कियां करेंगी?', ऐसे वाक्य बोलकर पुरुषों के द्वारा किए गए गलत कार्यों को समाज बहुत अच्छी तरीके से जस्टिफाई कर देता है। समाज की नजरों में शायद गलत कार्य करना सिर्फ पुरुषों का ही अधिकार है।

लड़कियों की गलतियों से घर की इज्जत क्यों बदनाम?

लड़का और लड़कियां दोनों ही इंसान हैं और इंसानों से गलतियां होना स्वाभाविक है। लेकिन इन दोनों के द्वारा की गयी गलतियों पर समाज का दोहरा रवैया समस्याजनक है। अगर कोई गलती पुरुष करता है तो समाज उसको बहुत सामान्य तौर पर नजरअंदाज कर देता है और साथ ही यह प्रमाण भी दे देता है कि पुरुष ऐसा कर सकते हैं क्योंकि एक पुरूष का अंदरूनी रवैया ही वैसा होता है। लेकिन अगर दूसरी तरफ कुछ ऐसी ही गलती एक महिला कर दें तो समाज की नजरों में वह महिला चरित्रहीन हो जाती है, उसका पूरा परिवार शर्मसार हो जाता है और उसकी गलतियों के कारण उसके आगे की जिंदगी भी समाज में कठिन बना दी जाती है।

समाज के इस दोहरे रवैये का क्या कारण?

एक लड़के और लड़की के व्यवहारों को लेकर समाज में दोहरा रवैया क्यों है? यह रवैया इसलिए समस्याजनक है क्योंकि पुरुषों को इससे कोई नुकसान ही नहीं है जबकि महिलाओं का इन रवैयो के कारण जीना दुश्वार हो जाता है। उन पर पाबंदियां लगा दी जाती हैं। उन्हें ऐसा एहसास कराया जाता है कि उनका कोई भी व्यवहार पूरे समाज में उनके परिवार के नाम को नीचा कर देगा। 

यह एहसास करा कर महिलाओं के अधिकारों को, उनकी भावनाओं को और उनकी उड़ान को सीमित किया जाता है। शायद यह दोहरा रवैया इसलिए है क्योंकि पितृसत्तात्मक समाज में सारे नियम बनाने की जिम्मेदारी केवल पुरुषों की है और शायद पुरुष घर की इज्जत का बोझ उठा नही पाते हैं क्योंकि यह एक प्रकार की पांबदी है। इसलिए उन्होने इस पांबदी में महिलाओं को जकड़ा हुआ है ताकि पितृसत्तात्मक समाज की चलन प्रक्रिया में कोई रूकावट ना आए। 

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