सौर ऊर्जा से खेती में क्रांति ला रहीं हरियाणा की Savitri Jandu

हरियाणा की सावित्री जांडू ने सौर ऊर्जा को अपनाकर खेती में नई दिशा दी है। SheThePeople को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कैसे PM-KUSUM योजना के जरिए उन्होंने अपने खेत को ऊर्जा उत्पादन का स्रोत बनाया और ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं।

author-image
Tamanna Soni
New Update
savitri-jandu-2026-02-24-16-21-34

Photograph: (Savitri Jandu)

भारत के हरियाणा राज्य की सावित्री जांडू ने अपनी मेहनत, साहस और दूरदर्शिता से न सिर्फ अपनी ज़िंदगी बदल दी है, बल्कि ग्रामीण कृषि एवं सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी एक मिसाल कायम की है। SheThePeople के साथ अपने Interview में उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने परंपरागत खेती के तरीकों से आगे बढ़कर अपने खेत को सौर ऊर्जा के मॉडल में बदल दिया और इसे एक व्यवसाय, रोजगार, और महिलाओं के सशक्तिकरण का जरिया बनाया।

Advertisment

सौर ऊर्जा से खेती में क्रांति ला रहीं हरियाणा की Savitri Jandu

सौर ऊर्जा से कृषि की नई राह

सावित्री बताती हैं कि उनका खेत सिर्फ फसल उगाने का स्थान नहीं रहा, बल्कि अब वह ऊर्जा उत्पादन का स्रोत भी बन गया है। उन्होंने कृषि की चुनौतियों — जैसे गिरती आय, बढ़ती लागत और मौसम पर निर्भरता — को देखा और सोचा कि कुछ अलग किया जाए। तभी उन्होंने सोलर पैनलों के माध्यम से ऊर्जा उत्पादन को अपनाया। यह बदलाव सिर्फ बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे उनकी आय स्थिर हुई और खेती अधिक टिकाऊ बनी।

उन्होंने बताया कि PM-KUSUM योजना ने उन्हें यह समझने में मदद की कि कृषि भूमि पर सोलर पैनल लगाकर न सिर्फ ऊर्जा बनाई जा सकती है, बल्कि किसान आत्मनिर्भर भी बन सकते हैं।

पुरुष-प्रधान तकनीकी क्षेत्र में कदम

सोलर पावर एक तकनीकी और पुरुष-प्रधान क्षेत्र माना जाता है, लेकिन सावित्री ने इस धारणा को चुनौती दी। उनका मानना है कि सीखने, नेतृत्व और नवाचार के लिए किसी भी लिंग की सीमा नहीं होती। खेती में सीखे गए अनुभव — जैसे संसाधनों का प्रबंधन, मुश्किल परिस्थितियों से निपटना और समाधान ढूँढना — उन्होंने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में लागू किए।

Advertisment

सावित्री ने कहा:

“अगर पुरुष यह कर सकते हैं, तो महिलाएं भी कर सकती हैं — बस आत्मविश्वास और सीखने की इच्छा होनी चाहिए।”

अपने गाँव के लिए एक मिसाल

हरियाणा के मोडखेड़ा गाँव में उनका PM-KUSUM आधारित सोलर प्रोजेक्ट सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह गाँव के लिए उम्मीद की एक मिसाल बन गया है। इसने दिखाया कि छोटे किसान भी साफ ऊर्जा देने वाली परियोजनाओं को सफलतापूर्वक लागू कर सकते हैं।

खास तौर पर महिलाओं के लिए इसका मतलब यह है कि वे अब सिर्फ कृषि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि तकनीक, प्रबंधन और बड़े प्रोजेक्ट्स में भी भाग ले सकती हैं। सावित्री के अनुसार यह पहल ग्रामीण महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

Advertisment

राष्ट्रपति भवन की अनमोल खुशी

सावित्री के लिए एक सबसे खास पल तब आया जब उन्हें राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया। यह न केवल व्यक्तिगत सफलता थी, बल्कि यह ग्रामीण समुदायों और महिलाओं के सशक्तिकरण को राष्ट्रीय मंच पर पहचान मिलने जैसा था। उन्होंने बताया कि यह सम्मान उन्हें और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

कृषि भूमि का नया मायना

सावित्री का मानना है कि अब कृषि भूमि सिर्फ फसल उगाने का स्थान नहीं, बल्कि एक बहुआयामी संपत्ति है — जो ऊर्जा, आय और विकास दोनों प्रदान कर सकती है। इससे उनके खेत की आय स्थिर, अनुमानित और पर्यावरण के प्रति अधिक संवेदनशील बनी है।

ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए अवसर

सोलर प्रोजेक्ट ने गाँव में रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। स्थानीय युवा अब सोलर पैनल की स्थापना, रख-रखाव और संचालन जैसे कार्यों में लगे हैं। इससे गाँव में रोज़गार बढ़ा है, और कई युवा शहरों की ओर जाने की बजाय अपने गाँव में ही काम कर रहे हैं।

Advertisment

सावित्री महिलाओं से कहती हैं कि तकनीकी बदलाव से डरने की बजाय सीखने का प्रयास करें, सवाल पूछें और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएं।

भविष्य की दृष्टि

आगे बढ़ते हुए सावित्री जांडू envision करती हैं कि एक दिन भारत का हर गाँव महिलाओं द्वारा संचालित, ऊर्जा-आत्मनिर्भर गाँव बन जाएगा। उनका मानना है कि सौर ऊर्जा केवल बिजली देने वाला स्रोत नहीं है — यह सामाजिक परिवर्तन और समृद्धि का मार्ग भी है।

Shethepeople Interview