COVID-19 मेडिकल ऑक्सीजन : कोरोना वायरस के मामलों में अभूतपूर्व वृद्धि के साथ, मेडिकल ऑक्सीजन की मांग भी भारत में बढ़ती ही जा रही है।
परंतु मेडिकल ऑक्सीजन वाकई में है क्या?

जो हवा हम सांस में लेते हैं, वह कई गैसों का मिश्रण होती है। इसका मतलब है कि वायु कई गैसों के मेल से बनती है जैसे ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड और हाइड्रोजन। ‘मेडिकल ऑक्सीजन’ शब्द का अर्थ है हाई-प्योरिटी ऑक्सीजन, जो मेडिकल ट्रीटमेंट में प्रयोग में लिया जाता है और मानव शरीर में उपयोग के लिए बनाया गया है।

मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर के अंदर बहुत ज्यादा शुद्ध ऑक्सीजन गैस भरी होती है। मेडिकल ऑक्सीजन प्राप्त करने के लिए, एक व्यक्ति के पास पर्चा (प्रिस्क्रिप्शन) होना चाहिए। किसी भी प्रकार के प्रदूषण से बचाव के लिए सिलेंडर के अंदर कोई भी अन्य प्रकार की गैस नहीं भरी जाती।

यह औद्योगिक (इंडस्ट्रियल) ऑक्सीजन से कैसे अलग है?

• एक इंडस्ट्री में ऑक्सीजन कंबस्शन, ऑक्सीडेशन, कटिंग और केमिकल रिएक्शन आदि के लिए भी प्रयोग में लिया जाता है।

• मेडिकल ऑक्सीजन और औद्योगिक ऑक्सीजन में केवल एक ही फर्क है – शुद्धता का स्तर। औद्योगिक ऑक्सीजन का शुद्धता स्तर मानव प्रयोग के लिए सही नहीं है। उसमें कई प्रकार की गंदगी होती है, जिससे लोग बीमार पड़ सकते हैं।

• एक मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर किसी भी प्रकार के प्रदूषण से मुक्त होना चाहिए।

• सिलेंडर को प्रयोग में लेने से पहले उसे अच्छी तरह से साफ करना चाहिए।

इसका उपयोग

• मेडिकल ऑक्सीजन का ज्यादातर प्रयोग मेडिकल सेवाएं जैसे अस्पतालों और क्लिनिक में किया जाता है।

• इसे इमरजेंसी के दौरान प्राथमिक चिकित्सा पुनर्जीवन (First-aid resuscitation), एनेस्थीसिया देते वक्त, उन मरीजों के लिए लाइफ सपोर्ट में, जो खुद से सांस नहीं ले सकते और ऑक्सीजन थेरेपी आदि के लिए उपयोग में लिया जाता है।

• एथलीट्स भी मेडिकल ऑक्सीजन का प्रयोग ट्रेनिंग में या फिर हाई एल्टीट्यूड में करते हैं।

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