आपने लड़को को अक्सर घमंड से यह कहते हुए सुना होगा कि उन्होंने कितनी लड़कियों की सील तोड़ी है। ‘सील तोड़ना’ एक प्रकार की व्यंजना है लड़की की वर्जिनिटी ब्रेक करने की। उन्हें लगता है कि ऐसा करके उन्होंने कोई महान काम किया है।

लोगों को आज भी औरतों की वर्जिनिटी से इतना ऑब्सेशन क्यों है? वर्जिनिटी की धारणा बनी-बनाई है। औरतों में जन्म से ऐसी कोई सील नहीं होती है। आइये जानें डॉ तनया और डॉ रिद्धिमा शेट्टी से इन मिथ्स के बारे में

हाइमन क्या होता है? उसके टूटने का क्या अर्थ है? क्या हर लड़की में बचपन से हाइमन होता है?

हाइमन एक तरह का टिश्यू होता है, जो बहुत पतला और नाज़ुक होता है। यह आपके वजाइनल एंट्रेंस पर होता है। ये हर लड़की के अंदर हो, ज़रूरी नहीं है। बहुत सारी लड़कियों में यह बचपन से ही नहीं होता है। कई बार लड़कियों में स्पोर्ट्स या जिमनास्टिक या फिर घुड़सवारी या बाइक राइडिंग के कारण भी हाइमन टूट जाता है। लेकिन इसके टूटने का यह मतलब नहीं है कि वह लड़की वर्जिन नहीं है।

क्या हाइमन में पहले से छेद होते हैं? हाइमन से जुड़े मिथ्स

हां, हाइमन के अंदर पहले से ही बहुत छोटे-छोटे छेद होते हैं, जिसमें से आपका पीरियड ब्लड बाहर आता है। हाइमन एक पूरी कंप्लीट शील्ड की तरह नहीं होता है। लेकिन कई बार कुछ औरतों में वजाइनल एंट्रेंस पर ये सील्ड होता है, जिसकी वजह से पीरियड ब्लड बाहर नहीं आ पता। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में इंपरफोरेट हाइमन कहते हैं। ऐसा हाइमन जिसमें छेद हो ही ना। ऐसी स्थिति में सर्जरी के द्वारा डॉक्टर हाइमन में छेद करते हैं, ताकि पीरियड ब्लड बाहर आ सके और उनको भी नॉर्मल पीरियड्स हो।

क्या सेक्स करने के बाद भी हाइमन बरकरार रहता है?

एक पब्लिश्ड मेडिकल जर्नल के अनुसार, एक सेक्स वर्कर की हाइमन पहले की तरह बरकरार थी। आपका हाइमन इस चीज का संकेत नहीं देता कि आपने सेक्स किया है या नहीं।

क्या पहली बार सेक्स करने पर ब्लीडिंग होना जरूरी है? हाइमन से जुड़े मिथ्स

कई लोगों का मानना है कि पहली बार सेक्स करने पर ब्लीडिंग होने ही चाहिए। इसके लिए मार्केट में कई तरह की फेक ब्लड कैप्सूल्स आदि प्रोडक्ट भी आते हैं। लेकिन यदि हम आंकड़ों की मानें, तो 50 से 60% महिलाएं पहली बार सेक्स के बाद ब्लीड नहीं करती हैं।

क्यों पुरुष इस ‘सील तोड़ने’ में इतना गर्व महसूस करते हैं?

यह उनके लिए अपने दोस्तों के सामने शो-ऑफ करने का एक तरीका है। उन्हें ये समझना होगा कि ये कोई उपलब्धि नहीं है। इस तरह वे औरतों का सम्मान नहीं करते। यह बताता है कि उन्हें औरतों की कोई परवाह नहीं है और सिर्फ सेक्स से मतलब है। इस सोच को अब बदलने की सख्त जरूरत है।

** डॉ तनया और डॉ रिद्धिमा शेट्टी दोनों ही गुनाइकोलॉजिस्ट्स हैं।

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