हमें बचपन से ही यह सिखाया जाता है कि हमें बड़े होकर एक दिन एक अच्छे घर में शादी करनी है। कोई भी लड़की ढूंढता है, तो वह बस यही चाहता है कि लड़की फैमिली संभालने वाली होनी चाहिए, जो कोई अपने करियर पर इतना ध्यान नहीं दे रही हो या फिर अगर कोई जॉब कर भी रही है तो बाद में छोड़नी पड़े तो वह छोड़ दे।

सिंगल रहना हमारी पर्सनल चॉइस है महिलाओं के लिए नार्मल

सिंगल रहना या शादी करना या किसी को डेट करना, ये आपकी खुद की चॉइस होनी चाहिए। आपकी फैमिली या किसी और को ये डिसाइड करने का अधिकार नहीं है। यह एक लाइफ लॉन्ग कमिटमेंट है। इसलिए शादी तभी करनी चाहिए जब आप उसके लिए पूरी तरह से रेडी हों।

शादी हमारी लाइफ का एक बहुत ही इंपोर्टेंट डिसीजन होता है। इसलिए यह ज़रूरी है कि हम एक सही माइंडसेट के साथ शादी करें। हम तभी शादी करें जब हम अपनी लाइफ किसी और के साथ बिताने के लिए पूरी तरीके से तैयार हों, प्रिपेयर्ड हों। अगर ऐसा नहीं हो तो इसका भुगतान दोनों पार्टनर्स के साथ-साथ उनके परिवारों को भी करना पड़ता है।

माँ बनने की चॉइस में लड़की की राय जरूरी

माँ बनने या न बनने में लड़की का सबसे ज्यादा आवश्यक है। यह उसके और उसके पति की आपसी मंजूरी से होना चाहिए। माता-पिता या इनलॉज के प्रेशर में आकर किसी भी लड़की को इस मानसिक और शारीरिक तनाव से नहीं गुज़रना चाहिए। लड़कियों का अपने करियर को प्रायोरिटी देना, अपने ड्रीम को फॉलो करना, आदि गलत नहीं है। मदरहुड को डिले करना, बच्चे को अडॉप्ट करना या बच्चा नहीं करना सब अपने-आप में सही है।

लड़की का स्वच्छंद होना गलत नहीं महिलाओं के लिए नार्मल

किसी भी विषय पर अपनी राय रखना या गलत के खिलाफ आवाज उठाने से डरना नहीं चाहिए। आप कुछ भी करिए परंतु ये समाज आप से सवाल तो करेगा ही। कभी ये कहेगा कि तुम कैसी औरत हो अगर तुमको परिवार या बच्चे नहीं चाहिए? सोसाइटी आपकी मॉरेलिटी पर सवाल करती है और आपसे कहती है कि तुम शादी से पहले सेक्शुअली एक्टिव कैसे हो? तुम्हारा तो चरित्र ही सही नहीं है।

अगर कुछ अच्छा करो, तो उसे दिखावा कह देगी, कुछ ना बोलो तो शर्मीली और डरपोक कह देगी और यदि कुछ कड़वा सच कह दो, तो यह सोसाइटी आपको मुंहफट, बद्तमीज़ और गलत ठहरा देगी। बेहतर होगा कि ‘लोग क्या कहेंगे’ इसकी फिक्र छोड़ कर, हम वो करें जो हमारा दिल चाहता है।

अपने पति को आर्थिक रूप से सपोर्ट करें

हमसे अक्सर कहा जाता है कि तुम और पढ़ाई क्यों करना चाहती हो? तुम शादी कर लो तुम्हारा हस्बैंड है, वह तुम्हारे लिए भी कमाएगा। सोसाइटी का ये कहना है कि आपका पति आपसे उम्र में बड़ा होना चाहिए और ज्यादा पढ़ा लिखा होना चाहिए। वह तुम्हारा ध्यान रखेगा, तुम्हें कमाने की ज़रूरत नहीं है। औरतों का भी फाइनेंशली स्वतंत्र होना आवश्यक है। एक औरत का अपने पति से ज्यादा कमाने में कोई गलत बात नहीं है।

अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का हक

तुम कहां गई थी? किससे मिलने गई थी? इतनी देर से क्यों घर लौट रही हो? तुम यह क्या कपड़े पहनती हो? अक्सर औरतों की जिंदगी में उनके आसपास के लोग उन पर कड़ी निगरानी रखते हैं और अगर उनके तय किए हुए पैमाने पर वें खरी नहीं उतरी तो फिर उनके कैरेक्टर पर सवाल उठाए जाते है।

अपनी लाइफ अपनी शर्तों पर जिए। औरतों को अपनी शारीरिक, मानसिक और आर्थिक जरूरतों को अपनी मर्ज़ी से पूरा करने का अधिकार है। वें कहां जाती है? किस से मिलती है? क्या करती हैं? क्या कपड़े पहनती हैं? वापस घर लौट कर कब आती है? इन चीजों पर टिप्पणी करने या नजर रखने का किसी को भी हक नहीं है।

एंबिशियस होना अच्छी बात है

एक औरत की जिंदगी मां, बेटी, बहन इन सबसे बढ़कर भी कुछ होती है। उसके सपनों को, उसके एंबीशंस को समझे, उसके साथ खड़े रहे और उसको उन सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करें।

औरतों की उपलब्धियों पर उन्हें एप्रिशिएट करें, उन्हें इनकरेज करें। अगर एक औरत अपने हस्बैंड से ज्यादा कमा रही है तो इसमें कुछ गलत नहीं है। इस बात से डील करने की कोशिश करें।

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