न्यूज़

अपने माता – पिता की चिता को अग्नि देना एक बेटी का भी हक़ है

Published by
Ayushi Jain

पुराने समय में ये कहा जाता था की मृत्यु के बाद उस मनुष्य की आत्मा को तब तक शांति नहीं मिलेगी जब तक उसके परिवार का कोई पुरुष सदस्य उसकी चिता को मुखाग्नि नहीं देगा। पर महिलाओं के साथ यह नाइंसाफी क्यों न ही उन्हें शमशान घाट पर जाने की इजाज़त होती है और न ही उन्हें अपने माता पिता की चिता को अग्नि देने की इजाज़त होती है। उसके पीछे हर किसी की अपनी अलग विचार धारणा है की ऐसा क्यों होता है ?

महिलाओं को शमशान घाट पर जाने की इजाज़त क्यों नहीं है ?

पुराने समय से यही मान्यता रही है की एक मनुष्य की चिता को अग्नि देने का हक़ हमेशा एक बेटे का होता है और अगर किसी का बेटा न हो तो भी यह हक़ किसी रिश्तेदार के बेटे को दे दिया जाता है पर कभी भी बेटी को यह हक़ नहीं दिया जाता  तो  आइये जानते है इसके पीछे की अलग -अलग धारणाएं:

  1. यह कहा जाता है कि एक बार पुरुष जब चिता को श्मशान घाट छोड़ने के लिए जाते है तो घर को साफ करना होगा। तकनीकी रूप से, महिलाओं को ऐसा करना चाहिए। यही कारण है कि महिलाओं को घर पर रहने के लिए कहा जाता है, लेकिन यह कोई जायज़ कारण नहीं है।
  2. यह भी कहा जाता है की महिलाएं एक नरम दिल की होती है इसलिए कुछ लोग कहते हैं कि शरीर को जलता देख महिलाएं घबरा सकती हैं, इसलिए उन्हें दूर रखा जाता है।

हालांकि पंडित एक लड़की को उसके माता-पिता का अंतिम संस्कार नहीं करने के लिए हजार अन्य कारण देंगे, अगर हम उन्हें बारीकी से समझे , तो उनमें से कोई भी वास्तव में कोई लॉजिक नहीं देता है और ये सब काल्पनिक हैं। यह एक और कारण है कि आज महिलाएं इन रूढ़ीवादी मान्यताओं पर सवाल उठाना और उन्हें खत्म कर देना सही समझती हैं। हम शिक्षित हैं और सभी के पास  तर्क करने की शक्ति है।

आइये अब जानते है उन महिलाओं को जिन्होंने आगे बढ़कर इस प्रथा को तोडा:

नमिता कौल

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की गोद ली हुई बेटी , नमिता कौल, ने अगस्त 2018 में उनका अंतिम संस्कार किया था। उनके इस काम  ने लैंगिक पक्षपाती समाज को एक मजबूत संदेश दिया और हेडलाइनो में भी जगह बनाई, क्योंकि यह हिंदू धर्म के खिलाफ था। इससे ठीक पहले, राष्ट्र सेविका समिति की बौद्धिक प्रकोष्ठ की संयोजक प्रीति मल्होत्रा ​​ने कहा, “अगर एक महिला अपने परिवार के सदस्यों की चिता को रोशन करती है तो क्या होगा? वह लड़की भी एक सांस लेने वाला शरीर है जो भावनाओं के भवंडर में खड़ी है। ”

पंकजा मुंडे

महाराष्ट्र विधान सभा की सदस्य पंकजा मुंडे ने जून 2014 में अपने पिता गोपीनाथ मुंडे का अंतिम संस्कार किया। अपने कार्य के माध्यम से, उन्होंने जानबूझकर या अनजाने में देश में प्रचलित लिंग असमानता पर पुनर्विचार पर एक बहस शुरू की। वह निश्चित रूप से ऐसा करने वाली पहली महिला नहीं थीं, लेकिन राजनीतिक क्षेत्र का हिस्सा होने के नाते, उन्होंने वास्तव में अपने कार्य के माध्यम से एक संदेश फैलाया।

ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां आम महिलाओं ने भी अपने माता-पिता की चिता को आग दी। ऐसी रिपोर्टें आई हैं, जिनमें से एक भोपाल की है और शहर की पहली मानी जाती है। जब चार बेटियों ने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया, तो लोगों की आँखें नम हो गईं। अहमदाबाद में एक और घटना सामने आई, जहां रिश्तेदारों ने नाराजगी व्यक्त की, लेकिन बेटियां अपने फैसले में अडिग थीं।

 

Recent Posts

पॉर्न मामले में शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया

बॉलीवुड अदाकारा शिल्पा शेट्टी के पति राज कुंद्रा को अश्लील फिल्मों के निर्माण और वितरण…

2 hours ago

एक्ट्रेस कृति सेनन के बारे में 10 बातें जो आपने शायद न सुनी हों

कृति के पिता एक चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और मम्मी दिल्ली की यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं।…

2 hours ago

मिमी: सरोगेसी पर कृति सनोन-पंकज त्रिपाठी की फिल्म पर ट्विटर ने दिया रिएक्शन

सोमवार को जैसे ही फिल्म रिलीज हुई, नेटिज़न्स ने बेहतरीन परफॉरमेंस देने के लिए सेनन…

2 hours ago

एक्ट्रेस कृति सैनन ने अपना बर्थडे मैडॉक फिल्म्स के खार ऑफिस में मीडिया के साथ बनाया

एक्ट्रेस कृति सैनन आज के दिन 27 जुलाई को अपना बर्थडे बनाती हैं और इस…

3 hours ago

हैरी पॉटर की एक्ट्रेस अफशां आजाद बनी मां, किया फोटो शेयर

अफशां आजाद जो हैरी पॉटर में जुड़वा बहन के किरदार के लिए जानी जाती है।…

3 hours ago

ट्विटर पर मीराबाई चानू की नकल करती हुई बच्ची का वीडियो हुआ वायरल

वेटलिफ्टर सतीश शिवलिंगम ने सोमवार को ट्विटर पर एक छोटी लड़की की वेटलिफ्टिंग का वीडियो…

3 hours ago

This website uses cookies.