राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रविवार को राजभवन में आयोजित एक कार्यक्रम में टीबी रोग से पीड़ित एक बच्ची मोहसिना को गोद लिया । उनके  इस कदम के साथ ही टीबी रोग से पीड़ित 21 अन्य बच्चों को राजभवन के सभी अधिकारियों ने सहयोग की दृष्टि से गोद लिया।

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गोद लेने वाले अधिकारियों का यह फ़र्ज़ होगा कि वे बच्चों को सरकारी दवा सुचारू रूप से उपलब्ध करवा सके और बच्चे नियमित रूप से दवा का प्रयोग करें और पौष्टिक आहार ग्रहण करे।

राज्यपाल ने यह भी सलाह दी कि बच्चों की शिक्षा में कोई रुकावट हो तो उसका भी समाधान किया जाये। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे को गोद लेना कोई उपकार नहीं है। आजकल के जागृत समाज का फर्ज है कि समाज स्वस्थ हो।

राजभवन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा: “राज्यपाल ने सुझाव दिया था कि राजभवन के पास के क्षेत्र से एक शुरुआत की जाए और बाद में इस नेक काम को आगे बढ़ाया जाए।”

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था और इसी को ध्यान में रखते हुए राजभवन ने मोर्चा संभाला और टीबी से पीड़ित बच्चों को गोद लेने का फैसला किया।

“एक बच्चे को गोद लेना एक दायित्व नहीं है। यह समाज की मदद करने के लिए एक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। जो लोग अमीर हैं उन्हें इन लोगों के लिए कुछ पैसे दान करने चाहिए जिन्हें मदद की ज़रूरत है। ये छोटे कदम हैं लेकिन एक बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद कर सकते हैं।” गवर्नर ने कहा

उन्होंने कहा कि सरकार राज्य के हर नुक्कड़ पर नहीं पहुंच सकती है और गरीबों की मदद करना भी आम आदमी की जिम्मेदारी है।

पटेल ने कहा कि समाज के वंचित वर्ग के लोग सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा सकते क्योंकि उन्हें उनके बारे में जानकारी नहीं थी। “यह सुनिश्चित करने के लिए हमारी ज़िम्मेदारी है कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें उनकी सबसे अधिक ज़रूरत है,” उन्होंने कहा।

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