ऊर्वज़ी ईरानी पारसियों पर अपनी फिल्म के बारे में

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एक महिला का केंद्रीय पात्र और एक सशक्त पटकथा है इस फिल्म की विशेषता: ऊर्वज़ी ईरानी पारसियों पर अपनी फिल्म के बारे में.  

फिल्मकार ऊर्वज़ी ईरानी, अपनी आने वाली फिल्म, पाथ ऑफ़ ज़रथुष्ट्र, के बारे में बताती हैं कि यह फिल्म आज के समय में, जब पारसी लोगों की संख्या तेज़ी से घटती जा रही है, उनकी पहचान ढूँढने की कोशिश करती है. आज जब दुनिया में सिर्फ १,५०,००० पारसी लोग मौजूद हैं (इनमें से ६०,००० से अधिक तो भारत में ही हैं), फिल्म की नायिका (स्वयं ऊर्वज़ी ने ही यह किरदार निभाया है), अपने पूर्वजों द्वारा पालन की जाने वाली व्यवस्था की खोज में निकल पड़ती है, जो इस्लाम और ईसाई धर्म से भी पहले विद्यमान थी और शायद जिसने इन पर प्रभाव भी डाला.

निर्देशिका, जो स्वयं पारसी हैं, कहती हैं “हमारा समुदाय छोटा है पर एक मायने में यह फिल्म दर्शाती है कि जिन समस्याओं का सामना हम कर रहे हैं वे सब पर लागू हैं. जैसे बिना अपनी परम्पराओं को त्यागे विकसित देशों में निर्वाह करना, वहीँ अब बहुत से पारसी अपने समुदाय के बाहर शादी कर रहे हैं, और एक समूह ऐसा भी है जो धर्म के पालन को लेकर कड़े विचार रखता है.”

ऊर्वज़ी के अनुसार, “यह फिल्म पारसी किरदारों के बारे में नहीं वरन ज़रथुष्ट्री धर्म के विषय में है, जिससे उनकी उत्पत्ति हुई है. ऊर्वज़ी ने इस बात को लेकर निराशा व्यक्ति की कि मुंबई देश के अनेक पारसियों का घर होने के बावजूद, फिल्म उद्योग में आम तौर पर उनका उचित चित्रण नहीं किया जाता. इससे भी बुरी बात कि पारसी किरदार कम ही फिल्मों का हिस्सा होते हैं.”

“मैं समझती हूँ कि फिल्म एक सृजनात्मक माध्यम है, पर जिन्होंने इसमें निवेश किया है, उनके लिए व्यवसाय का ज़रिया भी. माना जाता है कि यदि किसी ऐसे विषय पर फिल्म बनाई जाए है जिसके बारे में लोगों को कम ही जानकारी हो, तो वो ज़्यादा सफल नहीं होगी. पर मेरा यह विश्वास है कि कोई भी फिल्म जिसकी पटकथा अच्छी हो और जो अपने किरदारों की उत्पत्ति के बारे में प्रामाणिक तरीके से बताती है, अवश्य सफल होगी.”

ऊर्वज़ी, जो अभिनय का प्रशिक्षण देती हैं, साथ ही एक उद्यमी भी हैं, ने केंद्रीय पात्र निभाने का भी निर्णय लिया. एक ऐसी फिल्म जिससे वे गहराई से जुड़ी हुई हैं, साथ ही प्रोड्यूस भी कर रही हैं, उसे एक कलाकार के रूप में जीवंत करने का भी बीड़ा भी ऊर्वज़ी ने उठाया.

ऊर्वज़ी ने कहा, “केंद्रीय पात्र महिला होने के कारण, मैं एक तेज़ घटनाक्रम वाली पटकथा (वरिष्ठ लेखक फारुख धोंडी द्वारा लिखित) को एक विशिष्ट तरह की सौम्यता प्रदान कर पाई. इसमें एक नारीवादी तत्त्व भी है. एक अंतरराष्ट्रीय समीक्षक जिन्होंने यह फिल्म देखी, उन्होंने कहा कि फिल्म में एक महिला का केंद्रीय पात्र होना इसकी विशिष्टता है. इस फिल्म पर काम करते समय, यह भावना लोगों तक पहुँचाना मेरे मुख्य उद्देश्यों में से एक था. आज महिलाएँ, हर बात में पुरुषों के बराबर हैं, फिल्म के मुख्य पात्र को निभाने में भी वो पहली पसंद हो सकती है.”

पाथ ऑफ़ ज़रथुष्ट्र, जो ज़रथुष्ट्री धर्म के मानवीय पहलू की पड़ताल करती है, अपने दर्शकों तक यह संदेश पहुँचाना चाहती है कि अपने भीतर की लौ को प्रज्ज्वलित रखें. ऊर्वज़ी भी अपने कार्यों द्वारा इसी संदेश को चरितार्थ कर रही है, और एक ऐसे भविष्य की ओर कदम बढ़ा रही हैं जहाँ उनकी सृजनात्मकता को नए आयाम मिल सकें, जिसमें शामिल हैं पढ़ाना, अभिनय करना और ऐसी कई और फिल्में निर्देशित करना जो दर्शकों से एक गहरे और आध्यात्मिक स्तर पर संबंध स्थापित कर सकें.

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