कामकाजी माताओं को सदा दुःख और दोषिता की भावनाओं से गुज़ारना पढ़ता है : मंदिरा सेन

Published by
admin

हमारे जैसे देश में एक कामकाजी महिला होना एक उपलब्धि है और यदि आप एक माँ हैं और साथ साथ काम भी करती हैं तो वह एक दोगुनी उपलब्धि है.

एक नारीवादी प्रकाशन कंपनी की फाउंडर मंदिरा सेन ने कामकाजी महिलाएं और मातृत्व के विषय में कहा,”अगर एक महिला मध्यम वर्ग से जुड़ी है, तो उसे शायद थोड़ा अधिक विकल्प और समर्थन मिले, लेकिन साधारण कार्यकर्ता महिला ने हमेशा काम ही किया है। ”

उन्होंने कहा, “वह काम करती थी क्योंकि उन्हें करना पड़ता था, और जब उसे करना पड़ता था, तब वह किसी और के साथ बच्चे को छोड़ देती है. तो बहुत दुख महसूस होता है महिलाओं को जो मज़दूर वर्ग की होती हैं। और ये ऐसी महिलाएं हैं जो समाज से कोई समर्थन नहीं प्राप्त करती हैं, जिसमें उनके परिवार भी शामिल हैं। ”

पढ़िए :जानिए किस प्रकार अपने भोजन के जूनून को इंदरप्रीत नागपाल ने अपने अचार के व्यवसाय में बदला

समर्थन प्रणाली की कमी एक मुख्य कारण यह है जिसके कारण आज की महिलाएं घर से काम करना पसंद करती हैं.

लेखिका किरण मंराल के साथ हमारे पहले इंटरव्यू में कहा, “काम कर रही माँ के लिए भारत में चाइल्डकैयर एक बहुत बड़ी मुश्किल है. छोटे बच्चों के लिए पर्याप्त संगठित और विश्वसनीय डेकेयर नहीं हैं, कार्यस्थल और घर के बीच अक्सर बहुत दूरी होती हैं. जब तक बच्चे के लिए घर में कोई परिवार का सदस्य (एक सास या मां), यह एक छोटे बच्चे और काम के साथ संतुलन बनाना एक बहुत बड़ी चुनौती हैं.

लेकिन महिलाओं के आंदोलन और नारीवाद के प्रचार के कारण अब इस विषय में खुले में बात होने लगी हैं.

पढ़िए :जानिए चेतना करनानी किस प्रकार तीन व्यवसाय संभालती हैं

मंदिरा, जो भटकल और सेन की फाउंडर हैं और अब एक दशक से अधिक समय से महिलाओं के लेखों के काम प्रकाशित कर रही हैं का तर्क है कि यदि नारीवाद सफल हुआ है और समाज में बदलाव लाया है, यह केवल मध्यवर्ग की महिलाओं के लाभ के लिए हुआ है ।

अब हमारे पास एक सांस्कृतिक कॉर्पोरेट परिवर्तन तो है, लेकिन जब तक सामाजिक परिवर्तन नहीं आता है, तब तक माताओं को दोषिता की भावना का सामना करना पड़ेगा, भले ही वे हर दिन काम पर जाये.

पढ़िए :जानिए बीना राव हजारों बच्चों की जिंदगी कैसे बदल रहे हैं

Recent Posts

कमलप्रीत कौर कौन हैं? टोक्यो ओलंपिक के फाइनल में पहुंची ये भारतीय डिस्कस थ्रोअर

वह युनाइटेड स्टेट्स वेलेरिया ऑलमैन के एथलीट के साथ फाइनल में प्रवेश पाने वाली दो…

1 hour ago

टोक्यो ओलंपिक 2020: भारतीय डिस्कस थ्रोअर कमलप्रीत कौर फ़ाइनल में पहुंची

भारत टोक्यो ओलंपिक में डिस्कस थ्रोअर कमलप्रीत कौर की बदौलत आज फाइनल में पहुचा है।…

2 hours ago

क्यों ज़रूरी होते हैं ज़िंदगी में फ्रेंड्स? जानिए ये 5 एहम कारण

ज़िंदगी में फ्रेंड्स आपके लाइफ को कई तरह से समृद्ध बना सकते हैं। ज़िन्दगी में…

13 hours ago

वर्कप्लेस में सेक्सुअल हैरासमेंट: जानिए क्या है इसको लेकर आपके अधिकार

किसी भी तरह का अनवांटेड और सेक्सुअली डेटर्मिन्ड फिजिकल, वर्बल या नॉन-वर्बल कंडक्ट सेक्सुअल हैरासमेंट…

14 hours ago

क्या है सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज? जानिए इनके बारे में सारी बातें

सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज किसी को भी हो सकता है और अगर सही वक़्त पर इलाज…

14 hours ago

This website uses cookies.