केरल की पहली महिला शिकारी थ्रेस्या थॉमस, जिन्हें शिकारी कुट्टीम्मा भी कहा जाता है, का सोमवार,19 अगस्त को बढ़ती उम्र से संबंधित बीमारी के कारण उनका  निधन हो गया। वह 87  वर्ष की थीं।

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अंतिम संस्कार मंगलवार को दोपहर 3 बजे कोट्टायम के सेंट एंटनी चर्च कब्रिस्तान में होगा। राज्य में वन अधिनियम लागू होने से पहले उन्होंने केरल के इडुक्की जिले में अंचुनद वन पर अपनी बंदूक से बहुत जानवरो का शिकार किया।

कुटियम्मा कर्नाटक में एक कान्वेंट में एक नन बनने के लिए शामिल हुई थीं, लेकिन उस समय केरल में एक जानवर ने उनके भाई पर हमला किया। वह गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

यह खबर सुनकर कुट्टीम्मा अपने भाई से मिलने अस्पताल पहुंची। उनका परिवार आर्थिक रूप से स्थिर नहीं था, वे अस्पताल में बिलों का भुगतान करने में असफल रहे। हालांकि, अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि पैसे के बजाय, जंगली जानवरों का मांस बिल के रूप में पर्याप्त काफी होगा।

यह सुनकर, कुट्टीम्मा ने जंगल में जाकर एक बाइसन को गोली मार दी, जिसका वजन 800 किलोग्राम था। बाद में उसने बाइसन को टुकड़ों में काट लिया और उन्हें अस्पताल के अधिकारियों को दे दिया। तभी से कुट्टीम्मा की शिकारी की नौकरी शुरू हुई। उसके बाद उनकी शादी थॉमस से हुई, जो श्रीलंका के हैं। तब से, यह कपल एक साथ शिकार यात्रा पर जाते थे।

जल्द ही, जंगली जानवरों का शिकार सरकार के ध्यान में आया, और उन्होंने कुट्टीम्मा को शिकार करने से मना करने का निर्णय लिया। उस समय, उनके पास 17 एकड़ जमीन थी। तत्कालीन सरकार ने 1993 में उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया और उसे मुआवजा देने का वादा किया।

2005 में, उन्होंने केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसमें कहा गया था कि उन्हें कोई मुआवजा नहीं दिया गया था। बाद में 2006 में, अदालत ने उन्हें ब्याज सहित 45 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। खबरों के मुताबिक, उन्हें केवल 29 लाख रुपये मिले। 2013 में, उन्होंने फिर से अदालत का रुख किया, और उन्हें पूरी राशि मिली।

इसके बाद, कुटियाम्मा कोट्टिराप्पल्ली, कोट्टायम में अनक्कालु में चले गए। वह पिछले कुछ वर्षों से याददाश्त भूलने जैसी बीमारी से पीड़ित थी। उनके परिवार में बेटे वीटी थॉमस और बहू शर्लिन जोसेफ हैं।

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