भारत का चंद्र मिशन चंद्रयान 2, 22 जुलाई को आज लांच हुआ.  इस मिशन से न केवल अंतरिक्ष मिशनों में भारत की सफलता के लिए नए दरवाज़े खोले है, बल्कि इसका लक्ष्य चंद्रमा के साउथ पोल तक पहुंचना है, जहां आज तक कोई भी देश नहीं पहुँच पाया है। । मिशन की शुरूआत में इसमें इसरो के कई वैज्ञानिक शामिल हुए थे। उनमें से एक है इसरो में इंस्ट्रूमेंट ऑपरेशंस साइंटिस्ट डॉ. श्यामा नरेंद्रनाथ।

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डॉ. श्यामा द्वारा अपने साथियों के साथ किए गए एक्सपेरिमेंट ने लूनर सरफेस केमिस्ट्री के बारे में नई संभावनाओं को पेश किया है

चंद्रयान 2  एक्सपेरिमेंट

चंद्रयान 2 से पहले, डॉ श्यामा ने चंद्रयान 1 मिशन में भी योगदान दिया था। मिशन महत्वपूर्ण है क्योंकि चन्द्रमा के साउथ पोल का काफी हिस्सा छिपा हुआ है, और इसलिए यह संभव है कि हमे वहां पानी भी मिल सकता है। डॉ श्यामा ने चंद्रयान 2 के निर्माण में शामिल कई डोमेन में योगदान दिया है: उनमें से कुछ हैं:

  1. चंद्रयान 2 पर चंद्र एक्स-रे स्पेक्ट्रोस्कोपी के लिए नई पीढ़ी के स्वेप चार्ज डिवाइस का प्रदर्शन,
  2. चन्द्रयान -2 लार्ज एरिया सॉफ्ट एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (क्लास )
  3. चंद्रयान 1 एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (सी 1 अक्सएस) द्वारा लूनर एक्स-रे : एक लूनर हाइलैंड रीजन से

सोशल सर्विस

डॉ. श्यामा न केवल अंतरिक्ष और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में ही कुशल नहीं हैं बल्कि वे एक पहिलांथ्रोपिस्ट भी हैं। “मैं सिर्फ वही करती हूं जो मुझे लगता है कि स्थिति के ठीक होने के साथ ही सही है,” वह कहती हैं। उन्होंने एक आंगनबाड़ी में दाखिला लेने में एक कंस्ट्रक्शन वर्कर की बेटी, मोनेशा जो की चार साल की है उसकी मदद की। मोनिशा की माँ ने डॉ. श्यामा से कहा कि वह मोनिशा को घर पर नहीं छोड़ सकती क्योंकि वह छोटी थी और इसलिए उसे कंस्ट्रक्शन साइट पर ले जाना पड़ता था। मोनिशा की माँ, हालांकि, अपनी बेटी को स्कूल भेजने के लिए सहमत हो गई है लेकिन कुछ समय बाद ।

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