“मैं बचपन से कपड़े डिज़ाइन करने का सपना देख रही थी। जब छोटी थी, तो गुड़ियाँ के कपडे देख – देख कर अत्यधिक आकर्षित हुआ करती थी। मेरे पिता की अचानक मृत्यु के बाद, मैंने अपने परिवार के वित्तीय संकट से जूझने के लिए कपड़े डिज़ाइन करने के इस जुनून का उपयोग करना शुरू कर दिया,” जयपुर से 27 वर्षीय कीर्ति सिंह शेयर करती हैं, जो डिजाइनर साड़ियों का कारोबार कर के अपने परिवार को गौरव का पात्र बना रही हैं।

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2010 में, कीर्ति ने अपना व्यवसाय घर से शुरू किया। वह मानती हैं कि टेक्नोलॉजी ने उनके व्यवसाय को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।” मेरे फेसबुक पेज ने मुझे दृश्यता हासिल करने में मदद की। मैं सभी नए डिज़ाइनों को अपने ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए व्हॉट्सएप्प का अधिक से अधिक उपयोग करती हूँ।”

“मुझे लगता है कि साड़ियों का आकर्षण स्थिर है। मेरे पास अमेरिका से भी ग्राहक हैं। वे भारतीय संस्कृति की प्रशंसा करते हैं और विभिन्न अवसरों पर पारंपरिक साड़ियाँ पहनना पसंद करते हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से महसूस करता हूँ कि एक साड़ी पहनी हुई महिला बेहद शानदार और सुंदर लगती है।”

हालांकि अधिक से अधिक महिलाएँ आजकल पश्चिमी वस्त्र पहनना पसंद करती हैं। कीर्ति, जिनके उत्पाद ‘डिज़ाइनर साड़ी’ लेबल के तहत बिकते हैं, को इस बात पर विश्वास है कि सांस्कृतिक बदलाव उनकी बिक्री को प्रभावित नहीं करेगा। “मुझे लगता है कि साड़ियों का आकर्षण स्थिर है। मेरे पास अमेरिका से भी ग्राहक हैं। वे भारतीय संस्कृति की प्रशंसा करते हैं और विभिन्न अवसरों पर पारंपरिक साड़ियाँ पहनना पसंद करते हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से महसूस करता हूँ कि एक साड़ी पहनी हुई महिला बेहद शानदार और सुंदर लगती है।”

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कीर्ति सिंह की वर्कशॉप

अपने भविष्य की योजनाओं के बारे में बताते हुए किर्ति ने कहा कि उनका परिवार मॉल में एक दुकान खोलकर उनका व्यवसाय बढ़ाने की सोच रहा है। वह 10 कारिगारों की एक टीम के साथ काम करती हैं।

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अपनी उद्यमी यात्रा में बाधाओं के बारे में बताते हुए वे कहती  हैं कि, “यह यात्रा मुश्किल रही है मगर मैं हार मानने में विश्वास नहीं करती। मेरी बहन और मैंने इसके लिए दिन-रात भाग-दौड़ की है। हम शिफ्ट्स में काम करते हैं। हममें से कोई एक हमेशा घर पर घरेलू कामकाज और हमारी माँ की देखभाल के लिए मौजूद रहता है। ”

कीर्ति महिला सशक्तिकरण में विश्वास रखती हैं। उनके अनुसार, यदि महिलाओं को अपने परिवार के सदस्यों से भावनात्मक समर्थन और साथ मिलता रहेगा, तो वे दुर्गम से दुर्गम परिस्थिति को भी जीत सकती हैं।

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