आज जब दोनों माता-पिता काम कर रहे हैं, अपने बच्चों के साथ समय बिताना माँ बाप के लिए कठिन है. और हम जानते हैं कि एक बच्चे की ध्यान देने की अवधि कितनी छोटी है. वे कुछ पल किसी चीज़ को पसंद कर सकते हैं और इसके अगले पल में वही चीज़ उन्हें बोरिंग लग सकती है. माँ – बाप के अपने बच्चों के साथ संबंधों को और मज़बूत बनाने के लिए दिल्ली में सोनम उपाध्याय ने मोजार्ट्सी शुरू किया.

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एक ढ़ाई वर्ष की बेटी की माँ, सोनम को ज्ञात हुआ कि उनका बच्चा संगीत वाद्ययंत्रों के आसपास खुशहाल रहती थी। यह समझने के बाद सोनम ने संगीत के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करने के इस विचार की अवधारणा को समझना शुरू किया.

“मैं वास्तव में संगीत वाद्ययंत्रों में उनकी रुचि के साथ आश्चर्यचकित थी. ऐसा तब हुआ जब मैंने अन्य बच्चों को भी इस अद्भुत उपहार का आनंद उठाने के बारे में सोचा। बहुत शोध के बाद, मैंने दिल्ली के बच्चों के लिए एक गर्मियों की वर्कशॉप तैयार की। पहले कुछ वर्कशॉप्स के बाद उन्हें काफी प्रशंसा मिलने लगी और उन्हें इस बात का पता चला कि इस प्रकार की शिक्षा की बढ़ती जरूरत है.

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मोज़रत्सी को पांच साल हो चुके है और दिल्ली एनसीआर में यह बहुत प्रमुख धारणा है. मोजरतिसी एक मजेदार तरीके से माता-पिता और बच्चों के सम्बन्ध को मज़बूत बनाता है. उन्हें इस बात का भी ज्ञात हुआ कि बच्चें सबसे ज़्यादा तब सीखते हैं जब उनके माता-पिता भी इसमें भाग ले.

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“संगीत हमारे तर्क और रचनात्मकता को संतुलित करने में मदद करता है और इस तरह बच्चे को किसी भी अन्य ज्ञान को बेहतर ढंग से अवशोषित करने की अनुमति मिलती है”.

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सोनम के लिए, संगीत अब उनका जीवन बन गया है. “यह मेरे फोकस को तेज करता है और मुझे ऊपर उठाने देता है. यह मेरी रचनात्मक शक्तियों को मेरे कार्यशालाओं को समृद्ध करने के लिए नए और अनोखे विचारों को आने के लिए ईंधन का काम करता है.

उनसे पूछे कि यह किस प्रकार एक बच्चे के सीखने में मदद करता है और सोनम का जवाब है, “संगीत हमारी तर्क और रचनात्मकता को संतुलित करने में मदद करता है और इस तरह बच्चे को किसी अन्य ज्ञान को बेहतर ढंग से अवशोषित करने की अनुमति मिलती है। रिसर्च ने साबित किया है कि संगीत, शब्दावली, समझ, सुनना, अभिव्यक्ति, साथ ही साथ सामाजिक और भावनात्मक विकास और योजना की क्षमता के रूप में भाषा और साक्षरता कौशल सहित बच्चों के सीखने पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.

सोनम ने अपने कार्यक्रम को इस तरह से डिज़ाइन किया है कि “एक बच्चा कभी ध्यान नहीं खोता. हम बच्चों के साथ प्रश्नों, रंगमंच, खेल, नृत्य के माध्यम से जुड़ते हैं “, उन्होंने कहा.

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