चाहे जमीन के विवादों को निपटाने की बात हो या हंगामा खड़ा करने वाले शराबी को ठीक करने  की , उत्तर प्रदेश स्थित अंगूरी देहरिया द्वारा स्थापित ग्रीन गैंग सब कुछ डील करती है। हरे रंग की साड़ियों में लिपटी हजारों महिलाओं के इस ग्रुप से सब डरते हैं।

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यह महिलाएं अन्याय, असमानता और भेदभाव से निपटने के लिए एक मिशन पर निकली है। भूमि विवाद के कारण अंगूरी के साथ हुए अन्याय से तंग आकर उन्होंने 2010 में यह संगठन शुरू किया।

ये सब कैसे शुरू हुआ

शीदपीपल. टीवी के साथ एक बातचीत में, अंगूरी ने बताया कि 2000 के दशक के मध्य में जब उनके तीनों बच्चे छोटे थे तब उनका परिवार लगभग बिखर-सा गया था और उनके पति बुरी तरह बीमार हो गए थे और बिस्तर पर पड़े हुए थे। यह वह समय था जब उन्हें बिना किसी स्थायी आय के अपना घर चलाना था ।

“मैं जूते, मिठाई, साड़ी आदि के लिए कार्डबोर्ड बॉक्स बनाती थी और उन लोगों को बेच देती थी जो जीवन यापन करने के लिए कमाते हैं। जब मुझे कुछ पैसे मिले, तो मैंने उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के तिर्वा के पास 22 फीट का एक छोटा सा प्लॉट 35,000 रुपये में खरीदा, लेकिन मैंने कभी कोई रजिस्ट्री नहीं करवाई, न ही विक्रेता ने कभी इसका उल्लेख किया। चूँकि वह क्षेत्र गाँव से बहुत दूर था और मेरे परिवार की स्थिति को समझते हुए, उस व्यक्ति ने मुझे दो साल की अवधि में छोटी किस्तों में पैसे के बदले वह प्लाट दे दिया।

“दो साल बाद, मैंने उस ज़मीन पर एक छोटा कमरा बनाने का फैसला किया क्योंकि पहले हम वहाँ एक कच्छ के घर में रह रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे उस क्षेत्र का विकास होने लगा था, बहुत सारे लोग, जिन्हे मेरा वहाँ रहना पसंद नहीं था , वहाँ आने लगे, जो अक्सर शराब पीते थे । आसपास सभी के साथ लड़ाई -झगड़ा करते थे और गैरकानूनी काम करते थे। उन्होंने उस व्यक्ति को भी उकसाया जिसने मुझे उस स्थान से बाहर निकालने के लिए ज़मीन बेची थी और उसे धमकी दी की वे उसे मार देंगे। इसलिए, उसने हमें ज़मीन को छोड़कर जाने की धमकी दी क्योंकि मैं अकेली और गरीब थी, मैं इसके बारे में कुछ भी नहीं कर सकती थी ।

और चूंकि, मेरे पास यह साबित करने के लिए कोई कागजात नहीं था कि मैं उस ज़मीन की मालिक थी, उसका भाई, जो एक वकील हैं, उन्होंने साबित किया कि मैं अवैध रूप से वहां रह रही थी। उस दिन मैंने वह सब कुछ खो दिया, जो मैंने अपने द्वारा किए गए औसत दर्जे की कमाई से थोड़ा-थोड़ा करके तैयार किया था, ”अंगूरी ने अपने संघर्ष के बारे में बताया और अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी। इस कठिन दौर ने उन्हें ग्रीन गैंग शुरू करने के लिए प्रेरित किया। वह जानती थी की सिर्फ उन्होंने अकेले ही इस तरह के अन्याय का सामना नहीं किया होगा ।

ग्रीन गैंग कैसे काम करता है

आइये अब जानते है ग्रीन गैंग कैसे काम करता है, इस बारे में बात करते हुए, अंगूरी बताती है कि जब भी उन्हें कहीं से मदद के लिए फोन आता है, तो वह हर तरह की जानकारी प्राप्त करती है और उन्हें बताती है कि वह अपनी टीम को एक क्षेत्र की देखरेख करने के लिए भेज देगी लेकिन वह लोगो को यह नहीं बताती की टीम कब आएगी। इस तरह, वह कहती है की वह किसी भी केस की असलियत को जानने में सक्षम रहती है।

एक बार जब उनके ग्रीन गैंग की महिलाएँ गाँव के चक्कर लगाती हैं, और अगर उन्हें इसमें कोई सच्चाई मिलती है, तो टीम उन्हें  बताती हैं और फिर वो अपने गैंग को एक्टिव कर देती है।

वह अपनी शिकायत को औपचारिक रूप देकर मामले का समर्थन करती है या कभी-कभी स्थिति को खुद पर ले लेती है। महिलाओं की संख्या जो वह अपने साथ ले जाती है, किसी भी केस की गंभीरता पर निर्भर करती है। वह कहती हैं कि उन्हें कई मामलों में ताकत दिखाने के लिए कुछ सौ से अधिक महिलाओं का साथ मिला हैं।

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