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महिलाओं को पहले स्वयं के विचार में स्वतंत्र होना चाहिए: रूपा बसु

Published by
Aastha Sethi

कला लोगों से सबसे अधिक अपील करती है जब वह मानवीय भावनाओं को दर्शाती है. रूपा सुखेंदु बसु अपने काम के जरिए हर दिन इस सोच को जीवित रखती हैं. बसु मानती हैं कि एक चित्रकार जादूगर होता है. बसु खुद जीवंत रंग, अब्स्त्रक्त और आकारों में खो जाती है.

रूपा बसु उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद की रहने वाली है. वर्तमान में अपने परिवार के साथ मुंबई में रहती है. SheThePeople.TV ने रूपा सुखेंदु बसु के साथ बात की, उन्हें क्या प्रेरित करता है और मातृत्व कैसे उनको स्वतंत्र बनाता है.

आपको कैनवस ने कैसे आकर्षित किया? आपने कला और शिल्प के क्षेत्र में रुचि कैसे विकसित की? अपनी रोमांचिक कहानी साझा करिए.

मैं कलाकारों के परिवार से हूँ, इसलिए, हमेशा से कला के लिए भावुक थी. हालाँकि मैंने कॉर्पोरेट करियर का चयन किया था, मुझे जल्द ही एहसास हुआ कि कोई भी लंबे समय तक अपने जुनून से दूर नहीं रह सकता है. कुछ वर्षोंके बाद, पति के प्रोत्साहन के साथ, मैंने नौकरी छोड़ दी. और पूरी तरह से पेंटिंग को समय दिया. अपनी नौकरी में मैंने ये देखा कि कैसे मानवीय भावनाओं और व्यवहारों को कला से जोड़ा जा सकता है. मैंने उन्हें कैनवास पर लाने का फैसला किया. फिर मैंने भावनाओं का बारीकी से अध्ययन और चित्रण शुरू कर दिया.

कोई भी अपने जुनून से बहुत लंबे समय तक दूर नहीं रह सकता है.

मेरे शो ‘अमूर्त’ में सभी प्रकार की भावनाओं को दर्शाया गया है – दिल से युवा होना, करुणा, बचपन, एक कैंसर सर्वाइवर की ज़िंदगी, बॉन्डिंग, ब्रेकअप, आदि.

मानवीय भावनाओं और व्यवहारों को कला से जोड़ा जा सकता है, और मैंने उन्हें कैनवास पर लाने का फैसला किया.

आखिर क्या कारक है कॉरपोरेट जगत में, जिन्होंने जीवन और परिवेश के प्रति आपका दृष्टिकोण बदल दिया?

कॉरपोरेट में नौकरी से कलाकार तक का सफर एक बड़ी चुनौती थी. एच.आर. के रूप में, मैं टेबल के दूसरी तरफ थी – शिकायत सुनना, संचार, परामर्श, आदि, – जिनमें से सभी ने मुझे एक बेहतर व्यक्ति बनाया. मुझे एक इंसान के रूप में अधिक चौकस रहने में मदद की, और इसलिए मेरे लिए भावनाओं और व्यवहारों को समझना और उन कलाकृतियों में शामिल करना आसान हो गया.

सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया ने कैसे आपके जीवन में एक भूमिका निभाई है?

डिजिटल दुनिया ने मुझे काफी मदद की. सोशल मीडिया ने काम में वृद्धि के साथ एक नई जगह बनाने में बहुत मदद की. अब अधिक कनेक्ट हैं. मुझे भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में कला प्रेमियों और क्यूरेटरों के बीच मान्यता मिली, डिजिटल दुनिया के कारण.

आपका काम बनावट और आंदोलनों के बारे में बोलता है, प्रेरणा कहां से मिली?

मैं बहुत सारे माध्यमों से अपने काम को व्यक्त करने में विश्वास करती हूं. अपने आस-पास की प्रकृति से अपनी प्रेरणा आकर्षित करती हूं. मैं उस संदेश को व्यक्त करने के लिए पेंट करती हूं जिसे हम मानव सुंदरता, और यहां तक ​​कि विनाश के साथ सीख सकते हैं. मुझे विचारों से खेलना पसंद है. उदाहरण के लिए, नदी एक इंसान के रूप में क्या सोचेगी. जैसा नदी कभी तक कर रूकती नहीं, हम मनुष्यों को भी बाधाओं और असफलता के बावजूद जीवन में आगे बढ़ते रहना चाहिए.


आप अपनी रचनात्मक दिनचर्या पर कैसे काम करते हैं?

मैं एक रात की उल्लू हूं. मुझे संगीत के साथ देर रात तक काम करना पसंद है. मैं पहले कविता के रूप में अभिव्यक्ति लिखने के लिए कलम और कागज का उपयोग करता हूं और फिर उस कविता को अभिव्यक्ति देने के लिए कैनवास पर उतारती हूं.

महिलाओं के स्वतंत्रता का विचार आपको कब आया? कौन सी महिलाओं ने आपको प्रेरित किया?

महिलाओं को सबसे पहले अपनी सोच से स्वतंत्र होना चाहिए. स्वतंत्रता का मतलब है कि वह अपने लिए खड़ी हो सकती हैं और अधिक से अधिक ऊंचाइयों को छू सकती हैं. एक महिला परिवार का दिल होती है और उसे इस बात को समझना चाहिए.

प्रेरणा के लिए, सूची बहुत बड़ी है. मैंने मदर टेरेसा के बारे में कहानियां पढ़ी और सुनी हैं, और सीखा कि आपको एक बच्चे की देखभाल करने के लिए माँ बनने की ज़रूरत नहीं है. मातृत्व एक ऐसा उपहार है जो महिलाओं को खास बनाता है. और नेतृत्व कौशल के लिए मैं इंदिरा गांधी की प्रशंसक रही हूँ. और सुधा मूर्ति, वह वास्तव में एक प्रेरणा है. उनकी उदारता, शांत स्वभाव और निस्वार्थता मुझे सशक्त बनाती है.

काम और घर में संतुलन और बात करें, तो आपको क्या लगता है कि समाज अभी भी महिलाओं को असक्षम समझता है?

घर और काम को संतुलित करना आसान नहीं है. अगर ताकत और समर्थन हो तो ऐसा कुछ भी नहीं है जो महिलाएं हासिल नहीं कर सकती हैं. समर्थन जरूरी नहीं कि एक आदमी का ही हो, यह कोई भी ताकत हो सकती है जो हमें आगे बढ़ने के लिए सशक्त बनाती है. मेरे लिए, मेरे पति ने मुझे प्रोत्साहित किया. उनका यह कदम मेरे बच्चों के लिए एक बहुत बड़ा उदाहरण है कि कैसे एक आदमी को समानता के विचार को प्रोत्साहित और समर्थन करना चाहिए.

मेरी सास और नंदों ने मेरी बहुत मदद की. जब महिलाएं ही महिलाओं का समर्थन करती है तो परिणाम कुछ महान ही होता है.

समाज को यह समझने की जरूरत है कि पुरुषों और महिलाओं दोनों को एक साथ काम  सकते है और ये ही आदर्श जीवन है. मैं, वास्तव में, लिंग की परवाह किए बिना, सबकी प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना चाहती हूं.

(यह आर्टिकल भावना बिश्ट ने अंग्रेजी में लिखा है )

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