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“सच कहूं तो मैं बचपन से ही आकाश को देखकर उसको छूना चाहती थी और बादलों में उड़ना चाहती थी। मगर जबसे मेरी माँ ने मुझसे कहा, तबसे मैं पायलट बनने का सपना देखने लगी थी,” ऐनी शीदपीपल.टीवी से कहती हैं ।

दिव्या के पिता ने रिटायरमेंट लेने से पहले सेना में 19 साल एक सैनिक के रूप में सेवा की है। फिर वे विजयवाड़ा आ गए। स्कूल की पढ़ाई ख़त्म होते ही दिव्या को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उरण अकादमी में दाख़िला मिल गया। यह रायबरेली, उत्तर प्रदेश में एक सरकारी पायलट ट्रेनिंग अकादमी है। दिव्या केवल 17 वर्ष की थी जब उन्होंने इस शानदार उपलब्धि को हासिल किया।

“मैंने विमानों को शायद ही कभी देखा था लेकिन पहली बार मैंने विमानों को पास से देखा था जब मैंने उन्हें उड़ाना सीखा था। यह मेरा बचपन का सपना सच हो रहा था इसलिए मैं बहुत खुश थी. मैंने पहली बार खुद से विमान को उड़ाया था जब मैं २००४ में अकादमी में शामिल हुई।” दिव्या ने कहा।

आत्म-संदेह के पलों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “हाँ, मेरी भी कई महत्वाकांक्षाएँ थीं, लेकिन एक पायलट बनना हमेशा से ही सबसे ऊपर रहा है। मेरे धैर्य और दृढ़ संकल्प ने मुझे ध्यान केंद्रित करने में मदद की है।”

कठिनाईयां

उनके परिवार ने हमेशा उनकी इस यात्रा में उनका साथ दिया, वह कहती हैं। मगर उनके रिश्तेदार थे जिन्होंने सदा उनके सपनो की उड़ान को तोड़ने की कोशिश की. वह याद करती है कि बचपन में भी जिन बच्चों के साथ वो खेलती थी, वो बच्चे भी उनका मज़ाक उड़ाते थे। बचपन से ही एक रूढ़िवादी माहौल में बड़े होने के बारे में उन्होंने कहा, “न केवल मेरे रिश्तेदारों से, बल्कि आसपास के लोगों से भी मुझ पर रोक लगाने वाली मानसिकता की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन यह समय के साथ बदल गया है। मैं आने वाले समय में और अधिक बदलाव देखना चाहती हूँ जिससे बाकी लड़कियों को भी इस तरह की मदद मिले।”

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“मैंने विमानों को शायद ही कभी देखा था लेकिन पहली बार मैंने विमानों को पास से देखा था जब मैंने उन्हें उड़ाना सीखा था। यह मेरा बचपन का सपना सच हो रहा था, इसलिए मैं बहुत खुश थी. मैंने पहली बार खुद से विमान को उड़ाया था जब मैं २००४ में अकादमी में शामिल हुई।” दिव्या ने कहा।

१९ वर्ष की आयु में उनकी ट्रेनिंग ख़तम हुई और तभी उन्हें एयर इंडिया से ऑफर लेटर भी प्राप्त हो गया। यही नहीं, उन्हें आगे की ट्रेनिंग के लिए स्पेन जाने का मौका भी मिला। और वहीँ उन्हें बोइंग ७३७ उड़ाने का मौका भी मिला, जो की एक शार्ट- टू-मीडियम रेंज वाला जुड़वाँ जेट नैरो-बॉडी एयरलाइनर है।

21 साल की उम्र में, दिव्या आगे की ट्रेनिंग के लिए लंदन गई। वहां पर उन्होंने पहली बार बोइंग 777 को उड़ाया।

“मैं बोइंग 777 से सबसे ज़्यादा प्यार करती हूँ, यह बहुत बड़ा है।”

बोइंग 777 के फीचर्स

उन्होंने बोइंग 777 के फीचर्स का वर्णन किया, “बोइंग 777 दुनिया का सबसे बड़ा जुड़वां जेट विमान है कॉन्फ़िगरेशन के आधार पर इसमें 350 से 396 लोगों के बैठने की जगह है। बिना रोके यह इंडिया और यू.एस.ऐ के बीच उड़ सकता है। इस विमान के विशेष फीचर्स में से एक है इसका सबसे लम्बा डीएमटीर वाला टर्बोफैन इंजन, जिसमे प्रत्येक मुख्य लैंडिंग गियर पर छह पहिये शामिल हैं। वायर एयरलाइनर द्वारा बोइंग की पहली उड़ान के रूप में, इसमें कंप्यूटर- एडिड डिज़ाइन है। यह कम्प्यूटर सहायता प्राप्त डिज़ाइन होने वाला पहला कमर्शियल विमान था।”

अन्य विमान

इसके अलावा, उन्होंने कुछ ऐसे विमान भी उड़ाए हैं जैसे 20 सिंगल इंजन 4 सीटर, किंग एयर सी -90 ड्यूल इंजन जो कि लगभग 12 सीटर है, बी 737 में करीब १८० पर हैड की क्षमता है। बी-७७७ में करीब ३५० से ३९६ लोगों की क्षमता है जो की कॉन्फ़िगरेशन पर निर्भर करती है। “ब्७७७ मुझे सबसे ज्यादा पसंद है, यह बहुत बड़ा है।”

युवा लड़कियों के लिए सुझाव

युवा लड़कियाँ जो आगे चलकर पायलट बनना चाहती है, उनसे मैं ये कहना चाहती हूँ, “इस क्षेत्र के लिए जुनून और धैर्य रखना बहुत महत्वपूर्ण है जो उन्हें सफल बनाने में मदद करेंगे। और ध्यान केंद्रित करना एक बहुत अच्छा प्रोफेशनल होने में मदद करेगा।”

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