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जब निर्मला सीतारमण मई 2019 में देश की वित्त मंत्री बनीं, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि वे लगातार नौ बजट पेश करके इतिहास रचेंगी। 1 फरवरी 2026 को जब वे अपना नौवां बजट पेश करेंगी, तो यह सिर्फ एक महिला की उपलब्धि नहीं होगी - बल्कि यह दिखाएगा कि जब महिलाएं फैसले लेती हैं, तो महिलाओं की भलाई कैसे केंद्र में आती है!
2019 से 2026: निर्मला सीतारमण के बजटों में महिला कल्याण का विकास
शुरुआत: जब दिशा बदली
2019 में अपना पहला बजट पेश करते हुए सीतारमण ने एक बात कही जो बहुत महत्वपूर्ण थी। उन्होंने कहा कि अब सरकार सिर्फ महिलाओं के लिए योजनाएं नहीं बनाएगी, बल्कि महिलाओं के नेतृत्व में योजनाएं बनेंगी। मतलब साफ था - महिलाएं अब केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली होंगी।
उस पहले बजट में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को पांच हजार रुपये तक के ओवरड्राफ्ट की सुविधा दी गई। साथ ही मुद्रा योजना के तहत एक लाख रुपये तक का कर्ज भी उपलब्ध कराया गया। छोटी शुरुआत थी, लेकिन दिशा सही थी।
Finance Minister Nirmala Sitharaman is India's first full-time woman FM. As she prepares to present her ninth consecutive budget for 2026-27, we witness a significant moment in India’s fiscal history.
— The Matrix (@indian_matrix) January 28, 2026
No other Finance Minister has delivered so many successive full budgets. This… pic.twitter.com/AfqHgklp6m
कोविड के दौर में संबल
2020 आया तो साथ में कोरोना महामारी भी आई। जब पूरा देश घरों में बंद था, तब भी सरकार ने महिलाओं की चिंता की। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किया गया, गर्भवती महिलाओं के लिए योजनाओं का विस्तार किया गया। महिलाओं की सुरक्षा के लिए निर्भया फंड में और पैसे डाले गए। मुश्किल वक्त में यह साबित हुआ कि महिलाओं की भलाई सरकार की प्राथमिकता है।
मिशन शक्ति: एक नया दौर
2021 में एक बड़ा फैसला हुआ - मिशन शक्ति की शुरुआत। इसने सभी महिला कल्याण योजनाओं को एक छतरी के नीचे ला दिया। अब महिलाओं को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ते थे। सुरक्षा हो, स्वास्थ्य हो या रोजगार - सब कुछ एक ही जगह मिलने लगा।
2022 में डिजिटल क्रांति पर जोर दिया गया। महिलाओं को मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट से जोड़ा गया। आज की महिला सिर्फ घर नहीं संभालती, बल्कि अपना खुद का बैंक अकाउंट भी संभालती है।
लखपति दीदी से सेफ सिटी तक
2023 का बजट कुछ और ही था। सरकार ने ऐलान किया कि तीन करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाया जाएगा। सोचिए, तीन करोड़ महिलाएं जिनकी सालाना आय दस लाख रुपये से ज्यादा होगी! यह सिर्फ योजना नहीं, बल्कि समाज को बदलने की सोच थी।
साथ ही शहरों में महिलाओं की सुरक्षा के लिए Safe City Project पर खर्च आठ गुना बढ़ा दिया गया। पहले जहां 165 करोड़ रुपये थे, वहां अब 1,300 करोड़ रुपये हो गए। इसका मतलब था - सड़कों पर रोशनी, CCTV कैमरे, और महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल।
2024-25: रफ्तार और तेज हुई
इस साल महिलाओं के कल्याण के लिए साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट रखा गया। कुल बजट का लगभग सात फीसदी। लेकिन असली चमत्कार अगले साल हुआ।
2025-26: रिकॉर्ड तोड़ बजट
1 फरवरी 2025 को जब बजट आया, तो सबको विश्वास नहीं हुआ। महिला कल्याण के लिए साढ़े चार लाख करोड़ रुपये! यह पिछले साल से 37 फीसदी ज्यादा था। कुल बजट का करीब नौ फीसदी सिर्फ महिलाओं के लिए।
इतना ही नहीं, पहली बार 49 मंत्रालय और विभाग इस काम में शामिल हुए। मतलब अब सिर्फ महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ही नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग - सभी जगह महिलाओं की भलाई सोची जा रही है।
The Economic Survey 2025-26 was tabled in the Parliament today, giving an economic overview of the past year and ideas for the road ahead. In a world defined by geopolitical fragmentation and economic turbulence, India stands as a global bright spot - resilient, stable, and…
— Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) January 29, 2026
उद्यमिता को मिले नए पंख
सबसे रोमांचक घोषणा थी - अगले पांच सालों में पांच लाख महिला उद्यमियों को दो-दो करोड़ रुपये तक का कर्ज दिया जाएगा। सोचिए, एक महिला जो छोटी सी दुकान से शुरुआत करना चाहती है, उसे दो करोड़ रुपये मिल सकते हैं अपना सपना पूरा करने के लिए। यह सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि विश्वास है महिलाओं की काबिलियत पर।
जमीन से आसमान तक का सफर
अगर 2014-15 से लेकर अब तक देखें, तो महिला कल्याण के बजट में 218 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यानी तीन गुना से भी ज्यादा! 98 हजार करोड़ रुपये से शुरुआत हुई थी, आज साढ़े चार लाख करोड़ पर पहुंच गई है।
नौवां बजट: नया इतिहास
1 फरवरी 2026 को निर्मला सीतारमण अपना नौवां बजट पेश करेंगी। यह मोरारजी देसाई के छह लगातार बजटों का रिकॉर्ड तोड़ देगा। लेकिन असली बात यह नहीं है। असली बात यह है कि इन सात सालों में महिलाओं की जिंदगी में क्या बदलाव आया है।
आज गांव की महिला भी बैंक में अपना खाता खोल सकती है। शहर की लड़की रात को सुरक्षित घर लौट सकती है। एक मां अपनी बेटी को उद्यमी बनते देख सकती है। यही तो असली विकास है।
#BudgetSession2026
— SansadTV (@sansad_tv) January 29, 2026
Union Finance Minister @nsitharaman tables the Economic Survey 2025-26 along with Statistical Appendix in #RajyaSabha@FinMinIndia@nsitharaman@nsitharamanoffc@VPIndia@CPR_VPpic.twitter.com/GLAdskOpOz
चुनौतियां अभी भी हैं
हां, बजट बढ़ाना काफी नहीं है। पैसा जमीन पर पहुंचना चाहिए। योजनाओं का फायदा असली जरूरतमंद महिलाओं को मिलना चाहिए। यह चुनौती है जिस पर काम करना होगा।
लेकिन जब एक महिला वित्त मंत्री के रूप में नौ बजट पेश करती है, तो यह संदेश जाता है - महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकती हैं। और जब वह महिलाओं के लिए बजट बढ़ाती है, तो यह दिखाता है कि महिला सशक्तिकरण सिर्फ नारा नहीं, हकीकत बन रहा है।
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