लोग कोरोनावायरस के चलते परेशान हैं, और ऐसे में कई लोग हैं जो आशा की किरण बनकर इस वायरस से लड़ने के लिए अपनी तरफ से हर पॉसिबल कोशिश करना चाहते हैं।

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ऐसी ही एक महिला हैं मिजोरम की रहने वाली पी नघकिलनि। 95 साल की उम्र में  भी,अपनी एक महीने की पेंशन राज्य के चीफ मिनिस्टर रिलीफ फण्ड में दान करने के साथ-साथ हर रोज़ अपने आसपास रहने वाले डॉक्टरों व नर्सेज के लिए 10-20 वॉशेबल मास्क्स भी बनाती हैं।

भारत में कोरोनावायरस के केसेस 7,500 के पार अहुँछ चुके हैं, और 200 से ज़्यादा लोग इस वायरस के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं।

पी नघकिलनि 95 साल की उम्र में  भी,अपनी एक महीने की पेंशन राज्य के चीफ मिनिस्टर रिलीफ फण्ड में दान करने के साथ-साथ हर रोज़ अपने आसपास रहने वाले डॉक्टरों व नर्सेज के लिए 10-20 वॉशेबल मास्क्स भी बनाती हैं।

पी नघकिलनि मिजोरम के एक लॉमेकर लॉरिनलियना की पत्नी हैं। 1972 में, जब मिजोरम एक यूनियन टेरिटरी हुआ करता था, तब उनके पति स्टेट असेंबली के लिए चुने गए थे। 1978 में उनकी मृत्यु हो गई। अब नघकिलनि अपने सबसे छोटे बेटे के साथ आइज़वाल दवरपुई वेंग में रहती हैं। उनके 7 बच्चे हैं और 20 ग्रैंडचिल्ड्रेन हैं।

उनकी बहु, जोतंगसंगी संगपुई ने बताया कि उनकी सास उन लोगों के लिए कुछ करना जो कोरोनावायरस से लड़ाई में शामिल हैं। “वह कहती हैं उन्होंने दूसरा विश्व युद्ध देखा है और उस वक़्त, 1966 में  मिजोरम के काफी लोगों को असम के हॉफलोंग की ओर भागना पड़ा और दो साल वहीं रहना पड़ा।  कि उन्होंने ऐसी स्थिति कभी नहीं देखी थी, जैसी कोविड-19 महामारी से पैदा हो गई है।”

“इसलिए, उन्होंने तय किया और अपने स्वर्गवासी पति की 14,500 रुपए की पेंशन राज्य के चीफ़ मिनिस्टर रिलीफ फण्ड में दान की,” कहतीं हैं जोतंगसंगी। उन्होंने पहले भी बाइबिल सोसाइटी व और धार्मिक जगहों पर दान दिया है। वह मानतीं हैं की ऐसे समय पर कोई पॉलिटिकल बॉउंडरीस नहीं होनी चाहिए।

“मिजोरम में मास्क की कमी है। जो मास्क पहले 10 रुपए के मिलते थे, अब 100-200 के मिलने लगे हैं। तो उन्होंने सोचा कि उसके लिए डोनेट करना अच्छा होगा। यह एक काफी छोटा सा जेस्चर है,” कहना है संगपुई का। इतनी उम्र होने के बावजूद, उनमें काफी स्टैमिना है और उनकी आँखें बिलकुल ठीक हैं।

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