Viral Video: इन्फ्लुएंसर के वीडियो ने महिलाओं के कपड़ों पर बहस को फिर से जिंदा किया

बेंगलुरू में एक इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर के वीडियो ने बुजुर्ग महिला द्वारा शॉर्ट्स पहनने पर सार्वजनिक शर्मिंदगी के चलते महिलाओं के कपड़ों पर नई बहस को जन्म दिया। जानिए इस विवाद के प्रमुख बिंदु और सोशल मीडिया पर मिली प्रतिक्रियाएं।

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Vaishali Garg
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Bengaluru Controversy Influencer Shorts Spark Debate

हाल ही में एक इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुआ है, जिसमें एक बुजुर्ग महिला उसे बेंगलुरू में शॉर्ट्स पहनने के लिए सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा कर रही है। इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर एक गर्मागर्म बहस को जन्म दिया है।

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बेंगलुरू: इन्फ्लुएंसर के वीडियो ने महिलाओं के कपड़ों पर बहस को फिर से जिंदा किया

वीडियो में क्या दिखाया गया है?

वीडियो में दिखाया गया है कि बुजुर्ग महिला अपनी स्थानीय भाषा में चिल्ला रही है। वीडियो की कैप्शन में लिखा गया है, "महिला के खिलाफ महिला।" और यह सवाल उठाया गया है कि "क्या बेंगलुरू में शॉर्ट्स की अनुमति नहीं है?" समाज के इस रवैये की खुली आलोचना की गई है।

बहस का मुद्दा क्या है?

वीडियो में योग प्रशिक्षक तन्नी भट्टाचार्य, जिनके इंस्टाग्राम पर 1.2 लाख फॉलोअर्स हैं, ने अपनी प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया है: "आपको क्या लगता है कि समस्या क्या है? मुझे नहीं पता क्या हो रहा है।" इस फुटेज ने विभाजित राय को जन्म दिया है, कुछ लोग बुजुर्ग महिला के व्यवहार की निंदा कर रहे हैं जबकि अन्य उसकी स्थिति का समर्थन कर रहे हैं।

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सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं

इंस्टाग्राम पर कमेंट्स इस विभाजन को स्पष्ट करते हैं। एक यूजर ने कहा, "शॉर्ट्स का समाज से कोई लेना-देना नहीं है। यह आपकी मानसिकता है।" वहीं, कुछ ने बेंगलुरू की प्रगति पर सवाल उठाते हुए कहा कि "बेंगलुरू पीछे की ओर जा रहा है।"

भट्टाचार्य की प्रतिक्रिया

भट्टाचार्य ने कहा कि उन्होंने स्थिति को नजरअंदाज करने की कोशिश की, लेकिन बुजुर्ग महिला ने उनका पीछा करना जारी रखा और अन्य वाहनों को रोककर उनके शॉर्ट्स को सार्वजनिक रूप से दिखाने की कोशिश की। भट्टाचार्य ने कहा, "मैं वहां कोई सामग्री नहीं बना रही थी। मैं कार की ओर जा रही थी, और उसने बस इसलिए ऐसा किया क्योंकि मैंने शॉर्ट्स पहने थे?"

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समाज और संस्कृति पर प्रभाव

यह वायरल वीडियो हमारे देश की मौजूदा स्थिति को दर्शाता है, जहां ड्रेस कोड और व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं के बीच तनाव बना हुआ है। यह पारंपरिक और आधुनिक मूल्यों के बीच का संघर्ष और युवा पीढ़ी की निरंतर कोशिशों को उजागर करता है।