आपने आदमियों को बस चलाते हुए बहुत बार देखा होगा लेकिन क्या कभी किसी महिला को बस चलाते हुए देखा है? चलिए मान लिया अपने महिला को भी बस चलाते हुए देखा है, लेकिन क्या कभी किसी आईएएस ऑफिसर को बस चलाते हुए देखा है? शायद आपका जवाब ना होगा। लेकिन कुछ दिनों पहले बेंगलोर की एक आईएएस ऑफिसर शिखा ने बस चला कर हमारी इस मेल डोमिनेटेड सोसायटी में हलचल पैदा कर दी है।

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अरे वह वक्त गया जनाब जब महिलाएं भारी वाहन नहीं चलाया करती थीं। अब महिलाएं आर्मी की राइफल से लेकर बस जैसे भारी वाहनों तक कुछ भी चला सकती हैं। आपको बता दें कि आईएएस ऑफिसर शिखा ने यह वोल्वो बस होसकोटे इलाके में चलाई थी और यह उनका बस की टेस्ट ड्राइव लेने का तरीका था। वह बस को चेक कर रही थीं और इसलिए उन्होंने बस की टेस्ट ड्राइव लेने का फैसला किया।

लोग न सिर्फ आईएएस शिखा के उस वोल्वो बस को चलाकर चेक करने के तरीके से प्रभावित हुए हैं, बल्कि उन्हें अपनी ड्राइविंग के लिए भी तारीफें मिल रहीं हैं। यह देखकर खुशी होती है कि यह वही भारत है जहाँ कभी लोग महिलाओं को कार चलाने के लिए मना करते थे, या जो महिलाएं कार चलातीं थीं उन पर ताना कसा जाता था कि महिला होकर गाड़ी चला रही है, इसको गाड़ी चलाना नहीं आता, और पता नहीं क्या-क्या। ऐसे लोग समाज में खत्म तो नहीं हुए हैं लेकिन शिखा और उनके जैसी महिलाएं धीरे-धीरे हमारी समाज की सोच को जरूर बदल देंगी।

जहां काम करने वाले ज्यादातर सारे ही पुरुष हैं, वह बेंगलुरु में उस वोल्वो बस की अकेली महिला ड्राइवर प्रेमा रम्मपा दाद पत्ती के चेहरे पर शिखा को बस चलाते हुए देखकर मुस्कुराहट आ गई।

किस तरह शिखा आत्मविश्वास के साथ बिना डरे, बिना घबराए बैंगलोर के होसकोटे में बस की टेस्ट ड्राइव ले रही हैं इसकी एक वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो रही है। आईएस शिखा और वह वीडियो महिला सशक्तिकरण का काफी अच्छा उदाहरण देती हैं।

शिखा बैच 2004 की आईएएस हैं। उनके इस कार्य ने भारत व भारत के लाखों लोगों को प्रेरणा दी है। हमें शिखा जैसी और निडर महिलाओं की जरूरत है।

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