दुनिया भर की कंपनियां लोगों को घर से काम करने के लिए कह रही हैं। भारत भी उन्ही में आता है। ट्विटर, एडोब, फेसबुक, डेल, फ्लिपकार्ट, पुणे में एसएपी और कई सारी कंपनियां चाहती हैं की उनके वर्कर्स काम तो करते रहे, लेकिन घर से, क्यूंकि COVID 19 का डर सबको है । लेकिन सवाल ये आता है की क्या लोगों को घर से काम करने की आदत हैं ? या फिर कंपनियों को ऐसे काम करवाने की इसकी आदत है ? द कन्वर्सेशन के अनुसार, अमेरिका भर की नासा की साइटें घर से काम करने की कपाबिलिटी को टेस्ट कर रही है। भारत में, ज्यादातर कंपनियों ने कम इम्पोर्टेन्ट ट्रैवेलिंग पर रोक लगा दिया है।

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यह कैसे काम करता है?

भारत में ज्यादातर केसेस में वर्कर्स को घर से काम करने का एक “ऑप्शन” दिया जा रहा है, जबकि साइट सर्विसेज और बिज़नेस सेम ही रहेगा। कोरोनोवायरस के बढ़ते मामलों के साथ, क्लाउड सर्विसेज फर्म, जोहो कॉर्प ने अपने वर्कर्स को प्रिकॉशन के तौर पर घर से काम करने के लिए कहा है, एक टॉप अफसर ने इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार कहा ।

उन्होंने अपने फाउंडर-सीईओ श्रीधर वेम्बु को कोट करते हुए कहा, “हमने दुनिया भर में अपने सभी ऑफिसेस के लिए घर से काम करना एक डिफ़ॉल्ट बनादिया है , हालांकि हमारे पास कोई इसके केसेस नहीं है ,”

प्रोडक्टिविटी कैसे चेंज होती है?

द कन्वर्सेशन ने बताया है की एक रिसर्च है जो ये सजेस्ट करती है कि वर्क फ्रॉम होम से वर्कर और सुपरवाइजर दोनों की प्रोडक्टिविटी बढ़ती है । एक स्टडी में घर से काम करने वाले वर्कर्स की परफॉरमेंस में 13% की प्रोडक्टिविटी देखी गई।

घर से काम करने के फायदे?

जैसा कि हम जानते हैं कि सिर्फ ज़्यादा से ज़्यादा प्रीकॉशंस ही हमें वायरस से बचा सकते है, और इसके लिए लोगों को घर से काम करने का ऑप्शन देना उन्हें ज़्यादा पब्लिक प्लेसेस में जाने से रोक सकता है।

आइये वर्क फ्रॉम होम करने के मेजर अडवांटागेस पे एक नज़र डालें :

1 . फ्लेक्सिबल टाइमिंग 

फ्लेक्सिबल हॉर्स, ब्रेक लेने के ऑप्शंस और ऑफिस पहुंचने के लिए कोई रश नहीं ।

2 . क्लीनलीनेस 

आपको उतनी ही साफ़ सफाई मिलेगी जितना आप चाहते हैं ।

3 . फैलने वाली बीमारियों के समय भीड़ में मिलने से बचें।

4 . इजी कपड़े। आप पजामा भी पेहेन सकते हैं ।

5 . आप कभी भी ब्रेक्स ले सकते हैं ।

6 . कोई ऑफिस डिस्ट्रैक्शन नहीं।

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