कोरोनावायरस के इस मुश्किल समय में जहाँ आज सभी लोग संघर्ष कर रहे हैं वहां कुछ ऐसे लोग भी हैं जो मानवता की एक अनोखी मिसाल कायम कर रहे हैं। भारत में इस मुश्किल समय में बहुत से कोरोनावारियर्स सामने आये हैं और सभी ने देश को बचाने के लिए अपना पूरा योगदान दिया है। कोरोनावायरस के समय जहाँ सभी लोग बहुत परेशान हैं वही स्ट्रे डॉग्स भी अपने रोज़मर्रा के खाने के लिए इधर- उधर भटकते रहते हैं। मैसूर की 27 वर्षीय निवेदिता हरिणी अप्रैल के दूसरे हफ्ते से स्ट्रे डॉग्स को रोज़ाना फीड कर रही हैं. वो अब तक लगभग 4498 स्ट्रे डॉग्स को फीड कर चुकी हैं। वो उन्हें दूध में चावल मिक्स करके और पेडिग्री भी देती हैं। वो रोज़ाना कम से कम 100 से 150 डॉग्स को खाना खिलाती हैं ।

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इनिशिएटिव के पीछे की वजह

यह सब Covid – 19 महामारी और उसके बाद के लॉकडाउन के बाद शुरू हुआ। इस महामारी के दौरान निवेदिता ने कई लोगों को मुश्किलों से गुज़रते हुए देखा, खासतौर से डेली वेज वर्कर्स को, जो एक समय का खाना खाने के लिए भी संघर्ष कर रहे थे। उस समय उन्हें एहसास हुआ कि कैसे स्ट्रे डॉग्स भी अपने खाने के लिए कितना संघर्ष कर रहे थे। इसके अलावा, सोशल मीडिया पर उन्होंने पढ़ा कि कई पालतू जानवरों के मालिकों ने अपने पालतू जानवरों को घर से निकाल दिया ह। जानवरों  के खिलाफ क्राइम की भी रिपोर्ट्स भी उन्होंने पढ़ी।

एक एनिमल लवर और एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते निवेदिता ने सोचा कि यह सही समय है कुछ करने का और तभी उन्होंने स्त्री डॉग्स को फीड करने के बारे में सोचा क्योंकि ज्यादातर लोगों ने Covid-19 के डर से उन्हें खाना खिलाना बंद कर दिया था।

“वे अपने प्यार को दिखाने के लिए मुझ पर कूदते थे और अपनी पूंछ हिलाते हुए दिखते थे। मुझे सबसे ज़्यादा अच्छा लगा जब वे मेरे परिवार का हिस्सा बन गए और मुझे उनके साथ मदर्स डे (Mothers’ Day) मनाने की खुशी मिली।“ – निवेदिता

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अब तक बहुत से कुत्तों को कर चुकी हैं फीड

पिछले 52 दिनों में, निवेदिता ने मैसूर, कर्नाटक में और आसपास के 4498 कुत्तों को खाना खिलाया है। निवेदिता ने हमें बताया कि शुरू में स्ट्रे डॉग्स का भरोसा हासिल करना मुश्किल था क्योंकि उन्हें भी इंसानों के साथ घुलने-मिलने में बहुत डर लगता था। लेकिन दो-तीन दिनों के बाद वह उनका भरोसा हासिल करने में सफल रही. वे हर सुबह निवेदिता का इंतजार करते थे।

निवेदिता कहती हैं “वे अपने प्यार को दिखाने के लिए मुझ पर कूदते थे और अपनी पूंछ हिलाते हुए दिखते थे। मुझे सबसे ज़्यादा अच्छा लगा जब वे मेरे परिवार का हिस्सा बन गए और मुझे उनके साथ मदर्स डे (Mothers’ Day) मनाने की खुशी मिली।“

इस पहल की शुरुआत से ही निवेदिता को लोगों का बहुत अच्छा रिस्पांस मिला. उनके कई दोस्तों, सहकर्मियों ने स्ट्रे डॉग्स को खिलाने के लिए चावल, दूध डोनेट करके अपना साथ दिया।

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