Permission To Abort Denied: दिल्ली न्यायालय ने अबॉर्शन अनुमति नहीं दी

Permission To Abort Denied: दिल्ली न्यायालय ने अबॉर्शन अनुमति नहीं दी Permission To Abort Denied: दिल्ली न्यायालय ने अबॉर्शन अनुमति नहीं दी

Monika Pundir

16 Jul 2022

यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका में अबॉर्शन के कानून में बदलाव के बाद अबॉर्शन एक हॉट टॉपिक रहा है। अब भारत में भी एक ऐसा न्यूज़ सामने आया है जिसमें महिला को अदालत ने अबॉर्शन की अनुमति नहीं दी। पूरी कहानी जानने के लिए आगे पढ़ें।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि वह 25 वर्षीय अविवाहित महिला को 23 सप्ताह के बाद अबॉर्शन(गर्भपात) करने की "अनुमति नहीं" देगा। अदालत ने कहा कि 23 सप्ताह में गर्भावस्था को समाप्त करना "लगभग फीटस की हत्या(मर्डर) करने के बराबर है"।

अदालत ने सुझाव दिया कि अविवाहित महिला गर्भावस्था से गुजरे और अबॉर्शन करने के बजाय बच्चे को गोद लेने के लिए छोड़ देती है। प्रधान जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली बेंच महिला की उस पेटिशन पर सुनवाही कर रही थी, जिसमें महिला ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेग्नेंसी (अबॉर्शन) कराने की पेटिशन फ़ैल की।

अदालत ने कहा कि वह याचिकाकर्ता को बच्चे को पालने के लिए मजबूर नहीं किया जा रहा था और सुझाव दिया कि महिला बच्चे को गोद लेने के लिए छोड़ दे। मुख्य न्यायाधीश शर्मा ने कहा कि भारत सरकार, दिल्ली सरकार या कोई अस्पताल याचिकाकर्ता की देखभाल करेगा, और यदि नहीं, तो वे खुद खर्च के लिए भुगतान करने को भी तैयार होंगे।

बेंच ने कहा, 'हम आपको उस बच्चे को मारने की इजाजत नहीं देंगे... गोद लेने के लिए बच्चे को किसी को दे दें। तुम बच्चे को क्यों मार रहे हो?"

महिला ने 23 सप्ताह में गर्भावस्था की समाप्ति की मांग की 

याचिकाकर्ता को उसके पार्टनर ने "आखिरी समय पर" छोड़ दिया। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि बच्चे को जबरदस्ती फुल टर्म प्रेगनेंसी रखने के लिए मजबूर किया जाना "उसके मानसिक स्वास्थ्य को बहुत नुकसान पहुंचाएगा और उसके रिप्रोडक्टिव अधिकारों का उल्लंघन होगा"।

याचिकाकर्ता के वकील ने गोद लेने के अदालत के सुझाव को ठुकरा दिया और कहा कि महिला बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि कानून ने अविवाहित महिलाओं को मेडिकल अबॉर्शन से गुजरने का समय दिया और विधायिका ने उन मामलों से "उद्देश्यपूर्ण रूप से सहमति से संबंध को बाहर रखा" जहां 20 सप्ताह के बाद और 24 सप्ताह तक अबॉर्शन की अनुमति है।

महिला मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी रूल्स, 2003 में एक नियम को चुनौती दे रही थी। नियम ने केवल कुछ श्रेणियों की महिलाओं को 20 से 24 सप्ताह के बीच गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति दी थी। अनुमत महिलाओं की सूची में अविवाहित महिलाओं को शामिल नहीं किया गया था।

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) अमेंडमेंट एक्ट 2021 के तहत दो डॉक्टरों की राय लेने के बाद 20 से 24 सप्ताह के बीच गर्भावस्था को समाप्त किया जा सकता है। यह महिला 23 सप्ताह से गर्भवती है।

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