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Photograph: (X / @DelhiPolice)
दिल्ली में लापता लोगों के मामलों को लेकर इस हफ्ते सोशल मीडिया पर अचानक चिंता की लहर दौड़ गई। कई पोस्ट्स में दावा किया गया कि राजधानी में लापता लोगों की संख्या में “अन्यूश़ूअल बढ़ोतरी” हो रही है। इन पोस्ट्स को बड़े स्केल पर शेयर किया गया, जिससे लोगों में डर और कन्फूशन बढ़ा। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इन क्लेम को डिस्मिस्सड करते हुए साफ कहा है कि डाटा किसी भी तरह की अन्यूश़ूअल बढ़ोतरी की ओर इशारा नहीं करते।
बच्चों की गुमशुदगी की वायरल कहानी ‘पेड प्रमोशन’ का हिस्सा? दिल्ली पुलिस ने बताया सच
पुलिस के अनुसार, 1 से 15 जनवरी 2026 के बीच दिल्ली में 807 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की गई—यानी एवरेज 54 केसेस पर डे। देखा जाए तो ये संख्या बड़ी लग सकती है, लेकिन ऑफिशल्स का कहना है कि ये नंबर्स पिछले ईयर के ट्रेंड के सिमिलर है।
जनवरी का फिगर भी यही तस्वीर दिखाते हैं। जनवरी 2024 में 1,684 लोग के लापता होने की कंप्लेंट दर्ज हुए थे, 2025 में यह नंबर्स 1,786 रही, जबकि 2026 में अब तक 1,777 मामले सामने आए हैं। इन तीनों ईयर के नंबर्स में कोई अन्यूश़ूअल स्पाइक नहीं दिखता।
बच्चों के मामलों में क्या स्थिति है?
इस साल जनवरी में 430 बच्चों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई, जो पिछले साल के 436 मामलों से थोड़ा कम है। इनमें से मेजोरिटी केसेस 12 से 18 ईयर के टीनएजर से जुड़े हैं। 2026 में इस ऐज ग्रुप के 383 बच्चे लापता हुए, जबकि 2024 में ये नंबर्स लगभग 386 और 2025 में 392 थी।
हम यह स्पष्ट करना चाहते है कि गुमशुदगी, विशेषकर बच्चों के लापता होनें को लेकर फैलायी जा रही अफवाहों से घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है।
— Delhi Police (@DelhiPolice) February 5, 2026
विगत वर्षों की तुलना में गुमशुदगी के मामलों में वृद्धि नहीं हुई है।
दिल्ली पुलिस त्वरित जांच व कार्रवाई के साथ नागरिकों की सुरक्षा के लिए… pic.twitter.com/WjV1MCoTEM
पुलिस ऑफिशल्स के अनुसार, इन केसेस में बड़ी संख्या टीनएज की होती है। अक्सर ये मामले घर से भागकर शादी करने, रिलेशनशिप में रहने या मोबाइल फोन और पर्सनल इशू पर परिवार से डिस्प्यूट के बाद घर छोड़ने से जुड़े होते हैं।
हर माइनर के मिसिंग होने के केस को लीगल किडनैपिंग माना जाता है, चाहे सिचुएशन सहमति से जुड़ी क्यों न हों। इसी वजह से इन्वेस्टीगेशन प्रोसेस फॉर्मल और टाइम कन्सुमिंग हो सकती है। जॉइंट पुलिस कमिश्नर (सेंट्रल रेंज) मधुर वर्मा के मुताबिक, 0-8 ईयर के बच्चों के केसेस को सबसे हाईएस्ट प्रायोरिटी दी जाती है क्योंकि इस आगे ग्रुप में ट्रैफिकिंग या इल्लीगल एडॉप्शन का रिस्क ज्यादा होता है।
‘पेड प्रमोशन’ से फैलाया गया डर?
दिल्ली पुलिस का क्लेम है कि रीसेंट पैनिक के पीछे कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स का “पेड प्रमोशन” जिम्मेदार हो सकता है। ऑफिशल्स ने कहा कि उन्होंने कई ऐसे पोस्ट ट्रेस किए हैं, जिनमें खासकर लड़कियों के लापता होने के केसेस को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और उन्हें पैसे देकर प्रमोट किया गया।
After following a few leads, we discovered that the hype around the surge in missing girls in Delhi is being pushed through paid promotion. Creating panic for monetary gains won't be tolerated, and we'll take strict action against such individuals.
— Delhi Police (@DelhiPolice) February 6, 2026
X (पूर्व में ट्विटर) पर जारी बयान में पुलिस ने कहा, “पैसों के बेनिफिट के लिए पैनिक पैदा करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया
पुलिस का कहना है कि हर लापता की कंप्लेंट तुरंत दर्ज की जाती है। लोग नियरेस्ट पुलिस स्टेशन, ऑनलाइन पोर्टल या 112 हेल्पलाइन के जरिए रिपोर्ट कर सकते हैं। हर डिस्ट्रिक्ट में डेडिकेटेड मिसिंग पर्सन टीम काम करती है, जिसे क्राइम ब्रांच की एंटी-ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट का सपोर्ट मिलता है।
2022 में शुरू किया गया ‘ऑपरेशन तलाश’ विशेष रूप से लापता लोगों की सर्च और सेफ वापसी पर केंद्रित है। स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस (Special Commissioner of Police) (Crime) देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने क्लियर किया कि अब तक बच्चों के मिसिंग केसेस में किसी ओर्गनइजेड गैंग (organized gang) या क्रिमिनल नेटवर्क (criminal network) का इन्वॉल्वमेंट सामने नहीं आया है। पुलिस का कहना है कि सभी केसेस में स्टैंडर्ड प्रोसीजर फॉलो किया जाता है और बच्चों के केसेस को टॉप प्रायोरिटी दी जाती है।
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