दीया मिर्ज़ा को Uttarakhand Glacier Burst पर विचार व्यक्त करने के लिए ट्रोल किया गया

Published by
Ayushi Jain

“हिमालय में बहुत सारे डैम्स बनाने के कारण उत्तराखंड को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। चमोली के लोगों के लिए प्रार्थना, ”भारत के उत्तराखंड के एक हिस्से में ग्लेशियर फटने की घटना के बाद दीया मिर्ज़ा ने यह कहा। तबाही, जैसा कि वीडियो में देखा जाता है, खतरनाक है और एवलांच ने लोगों, बिजलीघरों को बर्बाद कर दिया और धौली गंगा नदी में वाटर लेवल बढ़ने का कारण बना।

उत्तराखंड में चमोली जिले के रेनी गांव में एक ग्लेशियर के बर्स्ट होने से जोशीमठ क्षेत्र में भारी बाढ़ आ गई। लगभग 100-150 लोगों के फ्लैश फ्लड के कारण मृत होने की आशंका है।

दीया मिर्जा, एक एक्टर-एक्टिविस्ट हैं जो पर्यावरण के मुद्दों पर नियमित रूप से बोलती हैं।  उन्हें उत्तराखंड में ग्लेशियर बर्स्ट पर उनके विचारों के लिए ट्रोल किया गया था और ‘आर्म चेयर एक्टिविस्ट’ होने के लिए उनकी आलोचना की गई थी। कुछ लोगों ने यह भी कहा, ‘दीया मिर्जा एक पर्यावरणविदहैं,ठीक उसी तरह जैसे खलीफा एक किसान हैं।

दीया मिर्जा को बोलने का पूरा अधिकार है

दीया मिर्जा को एक नागरिक और एक एनवायरनमेंट एक्टिविस्ट के रूप में उन्हें बोलने का पूरा अधिकार है। एक होने के लिए, हम सबको यह समझना होगा की हमें अपनी एनवायरनमेंट का ख्याल रखना होगा, इस बात को भी समझना होगा कि डेवलपमेंट हमारे नेचर को कैसे खतरे में डाल रहा है।

मिर्जा संयोग से यूनाइटेड नेशंस  द्वारा एक ऑफिसियल सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स एडवोकेट के रूप में भी नियुक्त हैं। वह लगभग एक दशक तक इको- वारियर रही हैं और बाघों से लेकर बांधों तक के मुद्दों पर बात करती हैं, बहुत नियमित रूप से।

“मैं लगभग एक साल से ज़्यादा यूनाइटेड नेशंस की एनवायरनमेंट गुडविल अम्बेसडर और SDG एडवोकेट हूँ  और हर दिन यूनाइटेड नेशंस  द्वारा किए जाने वाले कार्य पर अधिक गर्व नहीं किया जा सकता है। स्टेबिलिटी और शांति मेरे लिए पर्सनल गोल्स हैं और मैं उनके मिशन और विजन में यूनाइटेड नेशंस के साथ एकजुटता के साथ खड़ी हूं, ” उन्होंने यूनाइटेड नेशंस डे पर अपने सोशल मीडिया पर लिखा।

महिलाओं को ट्रोल करना

महिलाओं का ट्रोल करना कोई नयी बात नहीं है। ट्विटर एक टॉक्सिक प्लेस बन गया है जहाँ महिलाओं को बोलने के लिए, किसी भी इंटेलीजेंट कमेंटरी को फॉलो और शेयर करने के लिए धमकी दी जाती है। सिर्फ इसलिए कि किसी का व्यू किसी और ट्विटेराती से सहमत नहीं है, ट्रोल्स उसी के ऊपर सवाल उठाते हैं। मिसबेहवींग और ट्रोलिंग का गहरा संबंध है, क्योंकि जब महिलाएं बोलती हैं, तो वे जो कह रहे हैं उसके लिए उनका मजाक नहीं उड़ाया जाता है। ट्रोल उनकी “इंटेलिजेंस ” ’पर सवाल उठाते हैं और गुमनाम धमकियाँ देते हैं।

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