भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड, हैदराबाद के कोरोनावायरस वैक्सीन को अब इमरजेंसी सिचुएशन में रिस्ट्रिक्टेड इस्तेमाल के लिए अप्प्रूव किया गया है। यह नावेल कोरोनवायरस के खिलाफ भारत का स्वदेशी टीका है। किसी भी इनोवेशन के लिए उठाए गए कदम में यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है, यह पहली बार है कि एक भारतीय कंपनी ने किसी पश्चिमी फार्मा दिग्गजों के बराबर काम किया है। शॉर्ट प्रेस ब्रीफिंग में, डीसीजीआई ने कहा कि भारत में फेज 3 ट्रायल के डेटा ने भारत बायोटेक के कोवैक्सीन को “सुरक्षित” दिखाया था ।

कोवैक्सीन के पीछे की टीम ने इस वैक्सीन को सही समय पर लोगों तक पहुँचाने के लिए बहुत मेहनत की है। कोवैक्सीन डेवेलप करने वाले वैज्ञानिकों की कोर टीम में एक महिला वैज्ञानिक भी हैं, डॉ सुमथी के, जो आर्गेनाइजेशन में रिसर्च और डेवलपमेंट विंग की हेड हैं। भारत बायोटेक की टीम को हेड फाउंडर डॉ। कृष्णा एला द्वारा किया जाता है।

यहाँ कुछ बातें आपको डॉ सुमथी के के बारे में जाननी चाहिए

डॉ सुमथी के JNU से लाइफ साइंसेज में पीएचडी हैं और भारत बायोटेक (बीबीआईएल) की रिसर्च एंड डेवलपमेंट टीम की हेड हैं। एक अनुभवी वैज्ञानिक के रूप में, वह टीम में डीप इंडस्ट्री एक्सपरटाइज लेकर आयी। उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज, लंदन में कॉमनवेल्थ फेलोशिप जीती।

कैसी है भारत बायोटेक की कोवैक्सीन ?

भारत सरकार ने सीरम इंस्टीट्यूट के कोविशिल्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की अनुमति दी है। इसका मतलब है कि हेल्थकेयर वर्कर्स और बुज़ुर्ग लोग अगले कुछ दिनों में अपनी वैक्सीन प्राप्त कर सकेंगे। देश के बाकी लोगों को भी उम्मीद है कि वैक्सीन रोल आउट जल्द से जल्द हो जाएगा।

कोवैक्सीन को भारत बायोटेक द्वारा इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के साथ पार्टनरशिप में डेवेलोप किया गया था। यह एक मेड-इन-इंडिया वैक्सीन है। कोवैक्सीन को अब ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से फॉर्मल ऑथोरेटिज़ेशन मिल गया है, जो एक एक्सपर्ट पैनल की रिकमेन्डेशन का पालन करता है।

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