हरभजन कौर, 94, ने अपना एंटरप्रेन्योर बनने का सफर 90 की उम्र से शुरू किया। उनकी 3 बेटियां है। उन्हीने अपने ब्रांड का नाम ‘हरभजन’स बचपन याद आजाये’ रखा । इसमें वह घर से बनी हुई बेसन की बर्फी बनाती हैं और उनकी बेटी उसे आर्गेनिक मंडी में बेचती हैं । “मेरी पहचान मेरी बेसन की बर्फी से है। जीवन में हमें इवॉल्व होते रहना चाहिए. जब आप नई चीजें सीखते हैं, तो आप नई चीजें ही करेंगे।” वह मुस्कुराते हुए कहती है. हरभजन कौर ने यह रेसिपी अपने पापा से सीखी । वह अपने बिज़नस को बढ़ाने के लिए और फ़ूड आइटम्स बनाने का सोच रही हैं। अब कौर घर पे आर्डर लेती हैं और आचार, चटनी, मुरब्बा व मिठाइयां बनाती है।

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आनंद मंहिन्दरा (चेयरमैन, द मंहिन्दरा ग्रुप ) ने ट्विटर पे इनकी स्टोरी शेयर करते हुए इन्हें ‘ इंटरप्रेन्योर ऑफ़ द ईयर’ कहा था। इसके ज़रिये इन्ही कहानी लाखों लोगों तक पहुँच गई।

उनके इस ट्विटर पोस्ट की आम लोगों ने बहुत सरहाना की। ” जुनून और दृढ़ संकल्प और जीवन में कुछ करने की इच्छा की कोई उम्र सीमाएं नहीं हैं ” एक ट्विटर यूजर न कहा ।

हरभजन कौर की बेटी

इनकी बेटी, रवीना सूरी, जिन्होंने कौर को उनके जूनून को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया , ने ‘ टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ को बताया कि “उन्होंने एक दिन व्यक्त किया कि उन्होंने खुद से एक पैसा नहीं कमाया है और उनके शब्द मेरे दिल पर अटक गए थे । वह बहुत प्रतिभाशाली है और हम कभी भी बाहर खाने नहीं गए, चॉकलेट की एक पट्टी भी नहीं क्योंकि वह वास्तव में बहुत अच्छा खाना बनाती है। हमारी बचपन की यादें बेसन की बर्फी से संबंधित हैं और यही कारण है कि मैंने उन्हें बनाने और उन्हें बेचने के लिए प्रोत्साहित किया। ”

“मेरी पहचान मेरी बेसन की बर्फी से है। जीवन में हमें इवॉल्व होते रहना चाहिए. जब आप नई चीजें सीखते हैं, तो आप नई चीजें ही करेंगे।” – हरभजन कौर

यह कहानी सुनने की बाद आज ये तो पता चल ही गया की सपने देखने की कोई उम्र नहीं होती।

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