Father Hits His 3-years-old : बेटियों के साथ घरेलू हिंसा क्यों?

Father Hits His 3-years-old : बेटियों के साथ घरेलू हिंसा क्यों? Father Hits His 3-years-old : बेटियों के साथ घरेलू हिंसा क्यों?

Sanjana

08 Aug 2022

हाल ही में एक ऐसा चौका देने वाला केस सामने आया है जिसमें एक पिता ने अपनी 3 साल की मासूम बच्ची को बेरहमी से पीटा। बच्ची की हालत बहुत नाजुक है और वह अस्पताल में भर्ती है। मा ने बच्ची के पिता के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और उसके लिए सख्त से सख्त सजा की मांग भी की है।

बाथरूम मे खेल रही थी बच्ची तो पिता को गुस्सा आया

रविवार के दिन पुलिस में पूरे मामले की पुष्टि की और बताया कि बच्चे की मां के अनुसार शनिवार की रात बच्ची बाथरूम में खेल रही थी। अचानक से अपराधी बच्ची को बाथरूम से बाहर ना आने के कारण डंडे से पीटने लगा। जब उन्होंने अपनी बच्ची को बचाने के लिए बीच में हस्तक्षेप किया तो अपराधी ने उन्हें धोखा दे दिया और बच्ची को उठाने के लिए आगे बढ़ा।

उसने बच्ची को उठाया और जमीन पर उसका सर दे मारा। बच्ची को बहुत ज्यादा चोट आई है और उसकी हालत बहुत नाजुक भी है। वह अभी अस्पताल में भर्ती है।

मां ने दर्ज कराई शिकायत

बच्ची की मां ने बच्ची के पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस से उसे सख्त से सख्त सजा देने की मांग की है। महिला के अनुसार चार बेटियां हैं। वह अभी 8 महीने की प्रेगनेंट भी हैं। उनका कहना है कि अपराधी उनकी दूसरी बेटियों को भी इसी तरह बेरहमी से पीटता था।

लड़कियों पर अत्याचार क्यों? 

अधिकतर मामलो नहीं लड़कियां ही विक्टिम बनती हैं। कोई उन्हें उनके लिंग के कारण मार देता है तो कोई उन्हें केवल एक वस्तु समझता है जिसे वे इस्तेमाल करके फेंक सकते हैं। लडकियां भी मनुष्य हैं और उनके पास भी स्वतंत्रता और सुरक्षा के मौलिक अधिकार है।

लड़कियों के साथ सामाजिक भेदभाव तो शुरू से होता आया है। यह सामाजिक भेदभाव अधिकतर उनके लिंग के आधार पर होता है जो कभी कभी तो उनकी जान तक आ जाता है। लोग लड़कियों को कोख में ही मार देते हैं। वह नहीं चाहते कि लड़कियां पैदा हो। लेकिन जन्म देने वाले भी तो एक लड़की ही होती है।

लड़कियों को कोख में मार देना एक कानूनन अपराध है जिसके लिए कड़ी से कड़ी सजा मिलती है। हमे शुक्रगुजार होना चाहिए कि हमारा कानून लड़कियों की सुरक्षा को तवज्जो दे रहा है और उनकी हिफाजत के लिए नए कानून बना रहा है। लेकिन क्या इतना काफी है? क्या केवल कानून बन जाने से लड़कियों पर हो रहा यह अत्याचार कम हो जाएगा?

नहीं, इसके लिए कानून से ज्यादा लोगों की सोच को बदलने की जरूरत है। 4 बच्चे होने के बाद भी प्रेग्नेंट होने का क्या कारण है? क्या केवल इसलिए कि चारों बच्चे लड़कियां है और उन्हे एक लडका चाहिए? यह बिल्कुल भी ठीक नहीं है। क्यों एक बेटी और बेटे में भेदभाव किया जाता है। ऐसा कोई काम नही है जो लडकी नही कर सकती। लडकियां कमजोर नहीं है और उन्हे अत्याचार नहीं सहना चाहिए।

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