भारत में छात्र विरोध का इतिहास हमे अंग्रेज़ो से स्वतंत्रता मिलने से पहले से चला आ रहा है। पार्टीशन से पहले भारत में पहला छात्र विरोध 1920 में किंग एडवर्ड मेडिकल कॉलेज, लाहौर में भारतीय और अंग्रेजी विद्यार्थियों के बीच शिक्षा को लेकर हो रहे भेदभाव के खिलाफ हुआ। स्वतंत्रता के बाद से, हर राजनीतिक दल के पास एक स्टूडेंट विंग भी है। हालांकि, यह स्वतंत्र छात्र विरोध है जो देश की लोकतांत्रिक भावना को दर्शाता है। आइये आज जानते है भारत के पांच सबसे बड़े छात्र विरोध प्रदर्शन के बारे में जिन्होंने राष्ट्र को हिला कर रख दिया।

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2016 जेएनयू छात्र विरोध प्रदर्शन

2016 का छात्र जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन 2013 के संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी देने के खिलाफ शुरू हुआ। हालाँकि, विरोध ने जल्द ही भाषण की स्वतंत्रता और सरकार की आलोचना की स्वतंत्रता को खतरे में देखा। इस धमकी के विरोध में, पूरे देश के यूनिवर्सिटी के छात्रों ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रों का साथ दिया । उन्होंने छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार, साथ ही छात्र नेता उमर खालिद की गिरफ्तारी का विरोध किया।

2016 का छात्र जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन 2013 के संसद हमले के दोषी अफजल गुरु को फांसी देने के खिलाफ शुरू हुआ।

#हुक्कोलोरोब

जादवपुर विश्वविद्यालय ने वर्ष 2014 में देश के सबसे बड़े छात्र विरोध प्रदर्शनों में से एक को देखा। विरोध प्रदर्शन एक छेड़छाड़ के मामले की अनदेखी से उभरा। छात्र भूख हड़ताल पर भी चले गए। कोलकाता में दो रैलियों में 5000 और 10000 छात्रों के समर्थन के कारण मतदान हुआ। कनवोकेशन सेरेमनी के दौरान अपनी डिग्री लेने से इनकार करने वाले लगभग 100 छात्रों के द्वारा इसे खत्म किया गया। छात्रों ने वीसी का पुतला भी जलाया। अंतत: वीसी अभिजीत चक्रवर्ती ने इस्तीफा दे दिया।

पिंजरा तोड़

2015 में, जामिया मिलिया इस्लामिया ने एक नोटिस जारी किया, जिसमे हॉस्टल की लड़कियों के लेट नाईट वापस आने पर एंट्री  बंद कर दी गई थी । दो छात्रों, देवांगना कलिता और शांभवी विक्रम सिंह ने #पिंजरातोड़ नाम का एक दिल्ली-आधारित अभियान शुरू किया. हॉस्टल के ताले तोड़ दिए। आंदोलन बढ़ता गया। पूरे शहर की महिला छात्रों ने भेदभावपूर्ण हॉस्टल नियमों का विरोध करना शुरू कर दिया। पटियाला से हैदराबाद तक, महिला छात्रों ने यूनिवर्सिटी में सेक्सिस्ट नियमों का पालन करने से इनकार कर दिया। पिंजरा तोड़ आंदोलन मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी हैदराबाद के साथ-साथ राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी लखनऊ जैसी यूनिवर्सिटीज़ में भी पहुँचा।

दो छात्रों, देवांगना कालिता और शांभवी विक्रम सिंह ने दिल्ली में #पिंजरातोड़ नाम का एक अभियान शुरू किया: 2015 में हॉस्टल के ताले तोड़ दिए।

रोहित वेमुला की मृत्यु पर छात्र विरोध

2016 में दलित पीएचडी स्कॉलर रोहित वेमुला की आत्महत्या से देशभर में आक्रोश फैल गया। वह हैदराबाद युनिवेर्सिटी का छात्र था। आत्महत्या तब हुई जब युनिवेर्सिटी की कार्यकारी परिषद ने वेमुला सहित पांच दलित छात्रों को रेस्टीकेट कर दिया। उनकी आत्महत्या को रोकने में कथित विफलता को लेकर पूरे देश में छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। भारत भर की कई यूनिवर्सिटीज के सैकड़ों छात्रों ने भी विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया।

जेएनयू फीस में बढ़ोतरी का विरोध

फीस में बढ़ोतरी के विरोध में पिछले महीने जेएनयू के सैकड़ों छात्रों ने सड़कों पर मार्च किया था। छात्रों ने कहा कि उनकी फीस में किसी भी तरह की बढ़ोतरी का मतलब होगा कि गरीब बैकग्राउंड से आने वाले लोगों पर सीधा प्रहार करना । उन्होंने फैसले का विरोध किया, उस फैसले को हटाने की मांग की। विरोध प्रदर्शन आईआईटी मुंबई के साथ-साथ कोलकाता के जादवपुर युनिवेर्सिटी जैसे अन्य संस्थानों में फैल गया। सभी छात्रों ने शिक्षा शुल्क में अनावश्यक बढ़ोतरी के खिलाफ सड़कों पर मार्च करने के लिए हाथ मिलाया, जो आखिरकार हर किसी को उस शिक्षा की तलाश करने की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाते हैं जिसके वे हकदार हैं।

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