इंटरनेशनल वीमेन मीडिया फाउंडेशन (IWMF) ने गुरुवार को घोषणा की कि श्रीनगर शहर की एक फ्रीलान्स फोटो जर्नलिस्ट मसरत ज़हरा को इस साल के फोटोजर्नलिज़्म अवार्ड में Anja Niedringhaus Courage का विजेता चुना गया है। एक मुस्लिम परिवार में जन्मी ज़हरा कश्मीर कम्युनिटी के अंदर 4 साल से काम कर रही हैं, कश्मीर मॉनिटर ने बताया। उनका काम ज्यादातर लोकल कम्युनिटी और महिलाओं के बारे में बताता है।

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ज़हरा पुरस्कार लेते हुए कहती हैं ” ये दिखता है की मेरे जैसे छोटे जगह पे काम करने वाले पत्रकारों का भी काम एकनॉलेज किया जाता है।”

“मुझे उम्मीद है कि यह सम्मान मुझे अपने स्किल्स को परफेक्ट करने और मेरे काम को और ज़्यादा कॉन्फिडेंस के साथ करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। मुझे यह भी उम्मीद है कि ये सम्मान उन महिला फ़ोटोग्राफ़रों को भी प्रेरित करेगा जो डिफिकल्ट एनवायरनमेंट में भी काम कर रही। ”उन्होंने कहा। “यह उन सभी महिलाओं के लिए एक सम्मान है जो कनफ्लिक्ट ज़ोन्स में भी काम करना चुनती हैं।”

मैं एक पत्रकार हूं, सोशल एक्टिविस्ट नहीं। – मसर्रत ज़हरा

आईडब्ल्यूएमएफ की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एलिसा लीस मुनोज़ ने कहा कि दुनिया भर के अनगिनत कम्युनिटीज को गवर्नमेंट थ्रेट्स और ख़तम होते प्रेस फ्रीडम की वजह से खतरे, नुक्सान और सेंसरशिप का सामना करना पड़ रहा है।

इस साल की शुरुआत में, ज़हरा को सोशल मीडिया पर “एंटी – नेशनल एक्टिविटीज” को बढ़ावा देने वाले पोस्ट डालने की वजह से अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (यूएपीए) के तहत बुक किया गया था, कश्मीर मॉनिटर की रिपोर्ट ने बताया।

अपने ऑथेंटिक काम के बारे में बात करते हुए, ज़हरा ने पहले शीदपीपल को बताया, “मैं एक पत्रकार हूं, सोशल एक्टिविस्ट नहीं। मेरा कोई पोलिटिकल एजेंडा नहीं है और एक पत्रकार के रूप में, हमारा काम बिना किसी पक्षपात के ऑथेंटिक और वेरिफाइड कहानियों को सामने लाना है। हमारी आइडियोलॉजी हमारे काम के बीच में नहीं आती है। मैं केवल उस काम को शेयर करती हूं जो मैं पिछले कुछ वर्षों से कश्मीर में कर रहा हूं। अगर मेरे सामने एक सीआरपीएफ जवान मारा जाता है, तो मैं जाउंगी और तस्वीरें लुंगी और उन्हें भी उसी तरह अपलोड करूंगी जैसे मैंने पहले किया है।”

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