लॉकडाउन सुनते ही कुछ की धक धक बढ़ जाती है और कुछ निश्चिन्त होकर फिर से सो जाते हैं। और मैं दूसरी कैटेगोरी में आती हूँ। अब मुझसे पूछा जाए कि मैंने क्या नया सीखा तो मैं तो ब्लेंक हो जाती हूँ क्योंकि मैंने तो कुछ सीखा ही नहीं। तो आप प्रोडक्टिव चीज़े सोच रहे हैं तो पहले बता दूँ कि मैंने कुछ नया क्रिएटिव खाना बनाना या कोई ब्लॉग नही लिखे ना मैंने एक्सरसाइज करी। तो मैं 5 चीज़े जो मैंने सीखी वो आपको बता देती हूं

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सोना भी एक कला है

बिना नींद के आप जीवित ही नही रह सकते मतलब अगर नींद नहीं तो चैन नहीं सुकून नहीं और मैं यहां प्यार के सिम्पटम्स की बात नही कर रही एक्स्ट्रा काम के बारे में बात कर रही हूं। काम करना होगा बहुत बड़ा काम पर टाइम पर नींद आना भी एक बहुत बड़ी अचीवमेंट है। प्रॉपर खाना और नींद बहुत ज़रूरी है इस टेंशन भरे समय को काटने के लिए।

कुछ प्रोडक्टिव ना करना भी ओ.के है

सोशल मीडिया पर आपने कई वीडियोस देखे होंगे घरेलू काम के, एक्सरसाइज के और कुछ पेंटिंग्स बनाते हुए, कुछ वीडिओज़ बनाते हुए, कुछ रीडिंग करते हुए और आपको भी लगा होगा कि कुछ करना चाहिये पर अगर आप कुछ नही भी कर रहे तो भी आप उतने ही सही हैं जितना वो करने वाले सही हैं। आप उनसे कहीं भी कमतर नहीं है। आपको और मुझको भी एक बिजी लाइफस्टाइल से ब्रेक लेना है और अगर आप उसमे भी दूसरो को देख के स्ट्रेस लेंगे तो वो पर्पस ही खत्म होजायेगा। ब्रेक लेने के लिए आप एक जगह बैठ के सो भी सकते हैं या पेंटिंग भी कर सकते हैं। ये पूरी तरह से आपका फैसला है। इसलिए आप जो भी हैं या जो भी कर रहे हैं सही है।

हम साथ साथ हैं

फैमिली हर एक प्रॉब्लम का सॉल्यूशन है। उनके साथ बैठ के अपना मन हल्का करना हो या हंसी मजाक कर के दिल बहलाना। साथ बैठकर मूवी देखना या बोर्ड गेम्स खेलना या सिर्फ साथ बैठकर खाना खाना ही हमारे लिए एक स्ट्रेस बस्टर का काम करता है।

रोज़ तैयार होकर बैठने से अच्छी वाइब्स आती हैं(और पिक्चर्स भी)

आजतक कभी भी मैंने अलग से तैयार होकर फ़ोटो नही खिंचाई पर लॉकडाउन ने ये भी कर दिखाया। मुझ जैसी आलसी ने भी खुद को तैयार किया और सुबह सुबह तैयार होकर बैठ गयी। सही में वो फीलिंग ही अलग थी और मैं काफ़ी खुश थी उस दिन। पॉजिटिविटी अंदर से फील हो रही थी। उस दिन हम सब ने फोटोस भी बहुत खिंचाई। भले ही हमने वो पोस्ट नहीं की पर यादों के तौर पर वो हमेशा हमारे पास रहेंगी।

हंसते हंसते कट जाए लॉक डाउन

हंसना सेहत के लिए हमेशा अच्छा माना गया है और ये बात सबको पता है। हम अगर फैमिली के साथ हैं तो हंसी कभी शक्ल से जाती ही नही है। और तब तो और जब हम अपने कजिंस के साथ रहते हों। चाहे डांट भी पड़ी हो हम तब भी हंसते हंसते अपने बेड से गिर पड़ते हैं और ये छोटी छोटी खुशियां ही हमारी ज़िंदगी को और खुशनुमा बना जाती है। इस घड़ी में पाजिटिविटी की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है तो इसलिए स्ट्रेस ना लेके और प्यार से रहके हम सब इस लॉकडाउन को जी सकते हैं और एक सुनहरी याद बना सकते हैं।

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