वायरोलॉजिस्ट मीनल दखावे भोसले ने भारत को एक कोरोनोवायरस टेस्ट किट बनाई है जो केवल ढाई घंटे में रिजल्ट बताती है। उन्होंने यह किट अपनी प्रेगनेंसी के लास्ट स्टेज में इंवेंट की। यह उनकी और उनकी टीम के प्रयासों के कारण है, कि पुणे की मायलाब डिस्कवरी पहली भारतीय फर्म बन गई, जिसे टेस्ट किट बनाने और बेचने का अप्रूवल मिला। गुरुवार को, भारत में बनी यह टेस्ट किट बाजार में पहुंची।

image

इन किटों में भोसले, जो की माईलैब के रिसर्च और डेवलपमेंट की हेड के अनुसार, यह टेस्टिंग किट कोरोनवायरस के टेस्ट के समय को छह से सात घंटे तक कम किया जाएगा। बीबीसी की एक रिपोर्ट ने भोसले की सफलता के  लिए उन्हें बधाई दी और ध्यान दिया कि यह वही है जो भारत में कोरोनोवायरस के स्लो टेस्ट को बदलने में मदद कर सकता है। क्या यह भारत में तेजी से पहचान और COVID-19 के प्रकोप को रोकने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो पायेगा ?

यह एक इमरजेंसी थी, इसलिए मैंने इसे एक चुनौती के रूप में लिया। मुझे अपने देश की सेवा करनी थी। – मीनल दक्ष भोसले

रिपोर्ट के अनुसार, भोसले ने उस टीम का नेतृत्व किया, जिसे पथो डिटेक्ट- कोरोनावायरस टेस्ट किट को डिजाइन करने का काम सौंपा गया था। इसके अलावा, भोसले और उनकी टीम ने अनुमानित तीन से चार महीनों से पहले छह सप्ताह में किट बाँटी थी । भोसले ने कहा, “यदि आप एक ही नमूने पर 10 परीक्षण करते हैं, तो सभी 10 परिणाम एक जैसे होने चाहिए।” हमारी किट एकदम सही थी। ” इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आई सी एम आर ) के अनुसार मायलैब एकमात्र भारतीय कंपनी है जिसने 100 प्रतिशत परिणाम हासिल किए हैं।

हर मायलैब किट की कीमत 1200 रुपये है और यह 100 सैंपल का टेस्ट कर सकती है। भारत द्वारा बेचे जाने वाली किट की कीमत लगभग 4,500 रुपये है।

किट को 18 मार्च को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) द्वारा मूल्यांकन के लिए प्रस्तुत किया गया था। शाम को, उसने भारतीय एफडीए और ड्रग्स कंट्रोल अथॉरिटी सीडीएससीओ को कमर्शियल अप्रूवल के लिए प्रपोजल प्रस्तुत किया। एफडीए की मंजूरी के प्रस्ताव को प्रस्तुत करने के एक घंटे के भीतर, वह सी-सेक्शन के लिए एक अस्पताल में भर्ती हो गई और अगले ही दिन मीनल ने अपनी बेटी को जन्म दिया।

“यह एक इमरजेंसी सिचुएशन थी, इसलिए मैंने इसे एक चुनौती के रूप में लिया। मुझे अपने देश की सेवा करनी है, ”भोसले ने कहा।

Email us at connect@shethepeople.tv