मेघना खन्ना बेंगलुरु के बीचो – बीच बोहो स्टाइल ज्वेलरी और एक्सेसरीज स्टोर की फाउंडर और ओनर हैं.  उनका स्टोर लेविटेट इंडियन फैशन और क्राफ्ट्स को प्रिज़र्व रखता है। इतना ही नहीं, मेघना एक शौकीन मोटरसाइकलिस्ट भी है, जो रॉयल एनफील्ड बुलेट की सवारी करना पसंद करती है। उनका नाम, रेम्का (रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल कंपनी) द्वारा खारदुंग-ला जो दुनिया में सबसे हाईएस्ट मोटरेबल पास है तक पहली बार हिमालयन ओडिसी का हिस्सा बनने के लिए, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड (Limca book Of records)  में दर्ज किया गया है।

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इस स्ट्रांग और प्रेरणादारक महिला के साथ, SheThePeople.TV ने उनकी लाइफ जर्नी और इससे उन्होंने जो कुछ भी सीखा, उसके बारे में बातचीत की। तो जानते है इनके बारे में कुछ बातें:

बिना किसी पक्के प्लान के छोड़ दी:

उन्हें मुंबई में एक क्वालिटेटिव रिसर्च एनालिस्ट की अच्छी-खासी नौकरी मिली। उनके जीवन का सबसे कठिन निर्णय था बिना किसी प्लानिंग के नौकरी छोड़ना, जबकि वह सिर्फ 23 साल की थी। हालांकि नौकरी दिलचस्प थी, लेकिन मेघना 9 से 5 कॉर्पोरेट जीवन नहीं जीना चाहती थी। और आखिरकार, ज्वाइन करने के एक साल के अंदर, उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अपने बिज़नेस आईडिया को शेप देने के लिए बेंगलुरु चली गई।

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लेविटेट के पीछे की प्रेरणा:

मेघना को बेंगलुरु में अपने दोस्त के रेस्तरां के बैक स्टोरेज रूम में पहली बार सेट-अप करे हुए 18 साल हो गए हैं। आज, यह बेंगलुरु के पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए ज्वेल्लेरी और कपड़ों के साथ अलग अलग मटेरियल के लिए सबसे अच्छा सीक्रेट शॉपिंग स्पॉट के रूप में बहुत फेमस हो चुका है।

मेघना 9 से 5 कॉर्पोरेट जीवन नहीं जीना चाहती थी। और आखिरकार, ज्वाइन करने के एक साल के अंदर, उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अपने बिज़नेस आईडिया को शेप देने के लिए बेंगलुरु चली गई।

इस स्टार्ट-अप के पीछे क्या प्रेरणा थी? “जब मैंने शुरुआत की थी, तो इंडियन क्राफ्ट्स, जो हाई एन्ड डिजाइनर और महंगे क्राफ्ट्स थे, और चाइनीस क्राफ्ट्स के बीच बहुत गैप था, जो सड़क की दुकानों में मिलते थे। कोई भी भारतीय क्राफ्ट ऐसा नहीं था जो मजेदार और सस्ता हो। सभी बेस्ट एम्ब्रायडरी, और बेस्ट क्राफ्ट को में भेज दिया जाता था। कोई भारतीय उन्हें नहीं खरीद रहा था। तो इसी वजह से मैंने लेविटेट खोला। लेविटेट के ज़रिये, मैं भारतीयों के लिए उस तरह के क्राफ्ट खरीदना चाहती थी। ”

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हालाँकि, मेघना, जो अभी 40 साल की है और दो बच्चों की माँ है, का मानना ​​है कि सबसे बड़ी चुनौती तब आती है जब आपके ऊपर बच्चे की रिस्पांसिबिलिटी आ जाती है।

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