देश की महिलाओं के लिए एक ख़ुशी का मौका! सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में केंद्र सरकार को यह आर्डर दिया है की आर्मी की हर ब्रांच में महिलाओं को परमानेंट कमीशन (पीसी) मिलेगी। यही नहीं, महिलाएं अब कमांड पोस्टिंग भी कर सकेंगी। 

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केंद्र सर्कार का कहना था कि महिलाओं को परमानेंट कमिशन नहीं मिलनी चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि पुरुष व महिलाओं के बीच काफी अंतर है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि ऐसी सोच जेंडर स्टीरियोटाइप को बढ़ावा देती है। 

आइये जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या कहा:

  1. परमानेंट कमीशन आर्मी में काम कर रहीं सभी महिलाओं के लिए होगा। 
  2. इससे उन्होंने कितने साल काम किया, इसका कुछ लेना-देना नहीं होगा।
  3. कोर्ट का कहना है कि यह काम तीन महीने के अंदर-अंदर हो जाना चाहिए। 
  4. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि जिस तरह से पुरुष कैंडिडेट्स को चुना जाता है, उसी तरह से महिला कैंडिडेट्स को भी चुना जाएगा। 

ओप्पोसिशन के यह कारण थे:

उनका कहना है की सेना अभी कमांड में महिला ऑफिसरों के लिए मेंटली तैयार नहीं है। यह हमारे समाज की वजह से भी है। उनका मानना है की ध्यान रखना व बच्चों का ख्याल रखना मानों एक चैलेंज है। 

केंद्र सर्कार का कहना था कि महिलाओं को परमानेंट कमिशन नहीं मिलनी चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि पुरुष व महिलाओं के बीच काफी अंतर है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि ऐसी सोच जेंडर स्टीरियोटाइप को बढ़ावा देती है। 

सुप्रीम कोर्ट का कहना है:

जब महिलाओं पर, उनकी एबिलिटी व उनके अचीवमेंट्स पर कलंक लगते हैं तो यह महिलाओं पर व आर्मी, दोनों के लिए ही शर्मिंदगी की बात है।”

आप जानकार हैरान रह जाएंगे कि 2019 के मुताबिक, आर्मी  में सिर्फ 3.8%  महिलाएं हैं, वहीं भारतीय वायु सेना में 13% और भारतीय नौ सेना में कुल 6% महिलाऐं थीं। आर्मी में करीब 40,000 पुरुषों के साथ केवल 15,000 महिलाएं दे रहीं थीं।

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