तरन गुजराल

पंजाबी राइटर तरन गुजराल का बुधवार सुबह उनके चंडीगढ़ निवास में निधन हो गया। वह 90 वर्ष की थीं और उम्र से संबंधी बीमारियों से पीड़ित थीं। तरण गुजराल शॉट स्टोरीज लिखने, बच्चों के साहित्य में योगदान देने और कविता लिखने के लिए भी प्रसिद्ध थी। उन्होंने नौ कहानियों के कलेक्शन, कविताओं की एक किताब और बच्चों के लिए किताबें पब्लिश की थीं।

तरन गुजराल की दिलचस्पी पंजाबी फोक म्यूजिक में थी :

लिखने के अलावा, तरन गुजराल की संगीत में भी रुचि थी और उन्होंने चंडीगढ़, पंचकुला और मोहाली में संगीत समारोहों में पंजाबी फोक म्यूजिक के साथ दर्शकों का मनोरंजन किया था।

उन्होंने अपनी ज़िन्दगी में दो बड़ी घटनाओं को देखा था। वह जब छोटी थी तब उन्होंने 1947 में भारत का विभाजन देखा था। वह तब अपने परिवार के साथ उत्तर प्रदेश के कानपुर में बस गई थी। तरन की शादी कानपुर में हुई। बाद में, 1984 के सिख विरोधी दंगों के बाद उसे अपने परिवार के साथ कानपुर से मोहाली, पंजाब चले जाना पड़ा।

तरन गुजराल पिछले पंद्रह सालों से चंडीगढ़ में अपने पति की मौत के बाद से रह रही हैं। वह अब अपने दो बेटों और अपने परिवार के साथ रहती थी।

अभिनेत्री आयशा धरकर के पिता अनिल धारकर का निधन :

इस सप्ताह की शुरुआत में, अनुभवी पत्रकार और लेखक अनिल धरकर का भी निधन हुआ है। उन्होंने द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया, द इंडिपेंडेंट और मिड-डे जैसे मीडिया आउटलेट्स के लिए एडिटर के रूप में काम किया था। वह मुंबई अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव के फाउंडर और डायरेक्टर भी थे।

धरकर ब्रिटिश-भारतीय अभिनेत्री आयशा धरकर के पिता थे, जिन्होंने स्टार वार्स एपिसोड II: अटैक ऑफ द क्लोन और 2005 की फिल्म द मिस्ट्रेस ऑफ स्पाइसेस जैसी फिल्मों में अभिनय किया है। उनकी मां इम्तियाज धरकर एक बेहतरीन कवि और कलाकार हैं , जिन्होंने 2014 में कविता के लिए Queen’s Gold Medal प्राप्त किया था।

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