तेलंगाना की रहने वाली 48 साल की रजिया ने आंध्र प्रदेश में फंसे अपने बेटे को वापस लाने के लिए तीन दिनों तक स्कूटी चलाई। उन्होंने बोधा टाउन, निज़ामाबाद, तेलंगाना में रहमताबाद, नेल्लोर, आंध्र प्रदेश तक कम से कम 1400 kms. तक स्कूटी चलाई । लॉकडाउन के बीच इस जर्नी को शुरू करने से पहले बेगम ने लोकल पुलिस से परमीशन ली थी।

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रजिया एक गवर्नमेंट टीचर हैं। उन्होंने मंडे को जर्नी शुरू की थी और वेडनेसडे शाम अपने 17 साल के बेटे के साथ वापस आ गई। “एक टू – व्हीलर पे यह जर्नी एक महिला के लिए काफी कठिन थी । लेकिन मेरे बेटे को वापस लाने के कॉन्फिडेंस ने मेरे सारे डर को खत्म कर दिया। मैंने रोटियां पैक कीं और उनकी वजह से मैं चलती रही। रातों में बिना किसी इंसान और ट्रैफिक मूवमेंट के साथ चलना काफी डरावना था , ”बहादुर मां ने थर्सडे को पीटीआई को बताया।

इम्पोर्टेन्ट बातें :

  • तेलंगाना की एक 48 वर्षीय महिला ने अपने बेटे,जो आंध्र प्रदेश में फंसे हुए थे, को घर वापस लाने के लिए तीन दिन तक टू – व्हीलर पर जर्नी की ।
  • रजिया बेगम ने सोमवार सुबह लोकल पुलिस की परमीशन लेके ये जर्नी शुरू की थी।
  • वह बुधवार शाम तक वापस आ गए, तीन दिनों में उन्होंने कुल 1,400 किमी की दूरी तय की।

खबरों के मुताबिक, रजिया के पति की मौत 15 साल पहले हो गयी थी और अब वो सिंगल मदर हैं। 23 मार्च को नेशनल लॉकडाउन की घोषणा होने पर उनके बेटे मोहम्मद निजामुद्दीन नेल्लोर में अपने दोस्त के घर पर फंस गए।

राज़्ज़िए के 2 बेटे और 1 बेटी है जिनका ध्यान वो अकेले ही रखती हैं । उनके पति के निधन के बाद, उन्होंने सभी जिम्मेदारियों को संभाला। उनके छोटे बेटे निजामुद्दीन, हैदराबाद में नारायण इंस्टिट्यूट से मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम देने की तैयारी कर रहे हैं।

“मैंने सुनसान सड़कों और धूल भरे गाँवों के बीच से लगातार यात्रा की। मैं बिल्कुल भी नहीं डरी, ” उन्होंने ये भी कहा कि पुलिस ने उसे कई चेक पॉइंट्स पर रोका लेकिन वो सब कोर्पोरेटिव थे। “अन्तर – स्टेट बॉर्डर्स पर भी, मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई क्योंकि पुलिस मेरे साथ थी । उन्होंने मुझे जर्नी के हर 2 घंटे बाद ब्रेक लेने की एडवाइस दी ताकि मैं थक न जाऊं ।, ”

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