तापसी पन्नू की मूवी थप्पड़ का ट्रेलर रिलीज़ हुए काफी समय हो चूका है और इस ट्रेलर ने सोशल मीडिया पर बहुत ज़्यादा तहलका मचा रखा है। तापसी पन्नू की फिल्म थप्पड़ 28 फरवरी,2020 को रिलीज़ हो रही है । ऑडियंस को इस फिल्म की रिलीज़ का बहुत बेसब्री से इंतज़ार है । यह फिल्म महिलाओं के साथ समझौतों के नाम पर हो रही घरेलु हिंसा के खिलाफ आवाज़ उठाती है । जैसा की फिल्म के नाम से ही पता चलता है थप्पड़, क्या किसी महिला को भरी सभा में थप्पड़ मार देना सही है? उस थप्पड़ को भुलाकर अपने आत्म-सम्मान के साथ समझौता करने के लिए दुनिया का कहना क्या सही है ?

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समझौता करना पत्नी के लिए ही ज़रूरी नहीं

क्यों लड़कियों को हमेशा से यह सिखाया जाता है की एक रिश्ते को बनाये रखने की ज़िम्मेदारी सिर्फ उनकी है ? क्यों कहा जाता है मार -पीट भी प्यार की ही एक निशानी है ? क्यों समझौते की उम्मीद हमेशा लड़कियों से ही की जाती है ? शादी जैसे पवित्र बंधन को निभाने की ज़िम्मेदारी दोनों ही पति -पत्नी की होती है फिर समझौते की उम्मीद सिर्फ पत्नी से क्यों की जाती है ?

शी दपीपल टी वी एक ऐसा प्लेटफार्म है जो महिलाओं की आवाज़ दुनिया तक पहुंचाने के लिए जाना जाता है पर आज पहली बार थप्पड़ मूवी के ऊपर हम हमारे देश के कुछ लड़कों की राये हम जानेंगे शीद पीपल  पर ।

आजकल के लड़कों की राये

अनुराग गुप्ता जो इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से फाइनल ईयर लॉ के स्टूडेंट है उनका कहना की वो सहमत हैं इस मूवी से की थप्पड़ भी वायलेंस का ही एक हिस्सा है और खासतौर पर महिलाओं के साथ डोमेस्टिक वायलेंस को बढ़ावा देता है पर इस मुद्दे पर मूवी बनाना उनके अनुसार इस मुद्दे के लिए जागरूकता फैलाने से ज़्यादा इसे उन महिलाओं के लिए फायदेमंद बनाएगा जो विक्टिम नहीं है और फेक केसेस को बढ़ावा देती हैं । विक्टिम कोई भी हो सकता है मेल भी और फीमेल भी ।

एम ऐ इंग्लिश के स्टूडेंट अम्बर पाठक का कहना है की थप्पड़ मारना बहुत गलत है, किसी भी रिश्ते की नीव उस रिश्ते के प्यार पर डिपेंड करती है और रेस्पेक्ट और डिगनिटी प्यार के दो ज़रूरी पेह्लूं है इसलिए फिल्म में उठाया गया यह मुद्दा उनके अनुसार बिलकुल सही है ।

अमृतसर के खालसा सोल्लगे से लॉ के छात्र प्रभजोत का कहना है की औरत चुप चाप एक नए घर में जाकर आसानी से सब हालातों से समझौता कर लेती है पर एक आदमी सिर्फ अपने वर्क प्रेशर में आकर अपनी पत्नी पर हाथ उठा देता है जो की बिलकुल गलत है । पर यही सिचुएशन अगर लड़की के पक्ष में होती यानी अगर पत्नी ने अपने पति पर हाथ उठाया होता तो समाज का क्या नजरिया होता ?

और आखिर में एक कंटेंट राइटर मनीष पांडेय कहते हैं की चाहे थप्पड़ हो या किसी भी तरह की हिंसा । किसी भी तरह की हिंसा गलत है । उनके अनुसार महिला किरदार ने बिलकुल सही किया जिसके बाद उसके सामने उसके पति का असली चेहरा सामने आया ।

आजकल के इस मॉडर्न समय में सिर्फ बोलने के लिए समानता नहीं होनी चाहिए। समानता असलियत में भी होनी चाहिए । हर रिश्ते की गरिमा को बनाये रखना दोनों पति -पत्नी के हाथों में होना चाहिए और दोनों एक रिश्ते की सफलता के लिए ज़िम्मेदार होने चाहिए न की सिर्फ महिलाओं से ही हर बार समझौतों और झुकने की उम्मीद की जानी चाहिए ।

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