27 वर्षीय उरोज हुसैन बिहार के एक ट्रांसवुमन हैं जिन्होंने उत्तर प्रदेश के नोएडा में सेक्टर 119 में अपना खुद का कैफे खोला है। वर्कप्लेस पर उत्पीड़न का सामना करने के कारण, उरोज हुसैन ने एंटरप्रेन्योर बनकर समाज को यह जवाब दिया है कि ट्रांसजेंडर लोगों के खिलाफ भेदभाव गलत है। कैफे का नाम ‘स्ट्रीट टेम्पटेशन’ है और हुसैन को इसके जरिए फिनांशियली इंडिपेंडेंट होना चाहती हैं।

क्यों खोला उन्होंने अपना कैफ़े

न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक हुसैन ने कहा, “मुझे अपने वर्कप्लेस पर उत्पीड़न का सामना करना पड़ा इसलिए मैंने अपना कैफे शुरू करने का फैसला किया। यहाँ पर मैं सभी के साथ समान व्यवहार होता है।” इसके अलावा, हुसैन ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनके इस कदम से उनके समुदाय के लोगों को प्रेरणा मिलेगी।

उनका बचपन

अपनी जर्नी के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनका जन्म एक लड़के के रूप में हुआ था पर बाद में उन्हें महसूस हुआ कि उनके पास शरीर तो पुरुष का था पर भावनाएं लड़की की थी।

हुसैन ने यह भी कहा कि रिश्तेदारों की बुलिंग को लगातार सहना मुश्किल था। “मैंने अपने शुरुआती टीनएज में अपनी पहचान पर सवाल उठाना शुरू कर दिया था। साथ ही, मेरे पिता एक स्ट्रिक्ट इंसान हैं। उन्होंने  मेरे लिए कुछ रेस्ट्रिक्शन्स बनाए, जिससे मुझे एक लड़के के रूप में सीमाओं के भीतर व्यवहार करने की उम्मीद थी। मैं इसके साथ खुश नहीं था। मैंने अपनी छोटी उम्र गुड़िया के साथ खेलकर बिताई और मैंने लड़कियों के साथ लड़कों की तुलना में अधिक बातचीत की। ”

हुसैन ने कहा कि वह 2013 में अपना घर छोड़कर दिल्ली चली गई थी, जहां उन्होंने एक ट्रांसवुमन के रूप में अपना करियर शुरू किया था।

उनकी कैफ़े खोलने की जर्नी

वर्कप्लेस पर उत्पीड़न और अपमान की भावना के अपने अनुभव को शेयर करते हुए, उरोज हुसैन ने कहा, “लोग लगातार मानते हैं कि सभी ट्रांसजेंडर सिर्फ भीख मांगते हैं, ताली बजाते हैं, और सेक्सवर्कर हैं। लेकिन यह सच्चाई से बहुत दूर है।” “जब मैं एक इंटर्न के रूप में काम कर रही थी , तो लोग मुझे चिढ़ाते थे और मुझे बहुत धमकाते थे। उन्होंने मुझे भद्दे कमेंट्स दिए, जिन्होंने मुझे अपमानित किया। उनके शब्दों ने मुझे परेशान कर दिया। मैंने अलग – अलग वर्कप्लेस पर अपमान की भावनाओं का अनुभव किया। मैंने खुद को अलग करना शुरू कर दिया, लेकिन बाद में, मैं एक ऐसे पॉइंट पर पहुंच गया, जहां मुझे लगा कि यह सब वही है। जल्द ही, मैंने खुद का रेस्टोरेंट शुरू कर दिया।

पान्डेमिक के बारे में बात करते हुए, हुसैन ने फाइनेंसियल मुश्किलों का सामना करने की बात की। “उस समय पर, मैंने अपने रेस्टोरेंट को बेचने के बारे में सोचा, लेकिन मेरे पास कुछ सेविंग्स थी जो मैंने अपनी सर्जरी के लिए डॉक्टरों को दी थी। मैंने उसे वापस लिया और रेस्टोरेंट चलाना जारी रखा, ”उन्होंने कहा।

हुसैन आनेवाली पीढ़ियों को प्रेरित करना चाहते हैं और अपने कैफे में किसी भी ट्रांसपर्सन को नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने  कहा, “कोई भी व्यक्ति यहाँ उत्पीड़न का सामना नहीं करेगा और स्वतंत्र रूप से और खुशी से काम कर सकता है।”

पढ़िए : भारत की सबसे कम उम्र की मेयर से मिलें

Email us at connect@shethepeople.tv