ट्रिनिटी साईओ, मेघालय के वेस्ट जैंतिया हिल्स डिस्ट्रिक्ट के मुलियाह गांव की निवासी है। वह एक आदिवासी किसान है, जिन्हें 71वे रिपब्लिक डे पर प्रतिष्ठित पद्मश्री से सम्मानित किए जाने तक कभी सुर्खियां नहीं मिली। उन्होंने मेघालय में महिलाओं के लीडेर्शिप वाली हल्दी की खेती को बढ़ावा दिया, जिससे महिला किसान अपनी आय को तीन गुना कर सकें । आइये जानते है इनकी जर्नी पद्मश्री तक।

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  • 6 बच्चों की माँ और एक स्कूल टीचर , साईओ को उनके प्राइसलेस योगदान के लिए ‘हल्दी ट्रिनिटी’ के रूप में जाना जाता है। उन्होंने हल्दी की लकडोंग वैराइटी के साथ काम किया और अपनी कमाई को बढ़ावा देने के लिए ऑर्गेनिक खेती के तरीके सीखने में अनपढ़ महिलाओं की मदद की
  • उन्होंने मुलिह के 25 किसानों के साथ अपनी जर्नी शुरू की और स्पाईसीस बोर्ड से समर्थन प्राप्त किया। उनके मेहनती लीडरशिप स्किल्स अन्य गाँवों की किसानों को आंदोलन का हिस्सा बनने के लिए एंकरेज करने के लिए बहुत थे।
  • 4 साल के अंदर, 800 किसानों ने एक साथ आकर हल्दी की इस फसल की खेती की। अब तक, ट्रिनिटी के 100 से ज़्यादा सेल्फ हेल्प ग्रुप अपने – अपने गांवों में काम कर रहे हैं।
  • फेडरेशन लकडोंग वैराइटी का एक्सपोर्ट नार्थ ईस्ट स्टेट्स और साउथ में केरल और कर्नाटक में करता है।

लकडोंग हल्दी क्या है ?

लकडोंग वेरियस टाइप्स की जैंतिया पहाड़ियों के लिए स्वदेशी है और लगभग 7% करक्यूमिन कंटेंट से भरपूर है। हल्दी की आम किस्मों की तुलना में, जिनमें केवल 1-3% कंपोनेंट्स होते हैं, लकडोंग कहीं अधिक बेस्ट है।

यह दावा में विशेष रूप से रूचि रखता है। साइंटिफिक रिसर्च से पता चला है कि करक्यूमिन में प्राकृतिक एंटी – इंफ्लेमेटरी और एंटी – कैंसरॉस गुण हैं। इसका यूनिक स्वाद, सुगंध और जीवित रंग के कारण इसकी काफी हाई डिमांड है।

साईओ ने इस स्पेसिफिक किस्म के मूल्य को महसूस किया और अन्य को महसूस किया और अनस्किल्ड विलेजर्स की मदद से इसका बिज़नस किया।

यह बेहद मददगार साबित हुआ क्योंकि अब वे खेती करके ही अपना गुज़ारा कर सकते हैं।

ट्रिनिटी साईओ एग्रीकल्चर इंडस्ट्री का एक नायाब हीरो है जिसने अपने जैसी कई अन्य महिलाओं को काम करने और अपने परिवारों का समर्थन करने का अवसर प्रदान किया।

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