UPSC Rank Holder Mother Story: घरेलू हिंसा की हुई थीं शिकार

UPSC Rank Holder Mother Story: घरेलू हिंसा की हुई थीं शिकार UPSC Rank Holder Mother Story: घरेलू हिंसा की हुई थीं शिकार

Sanjana

31 May 2022

शिवांगी गोयल ने यूपीएससी सिविल सर्विस 2021 परीक्षा में 177 वी रैंक हासिल की। उन्होंने ऐसा करके ना सिर्फ अपने परिवार बल्कि अपने पूरे जिले का नाम रोशन किया है। पूरे हिंदुस्तान को उन पर गर्व है। उनके जैसी मां और आकांक्षी बनने का सपना हर महीना का होगा।

कौन हैं शिवांगी गोयल?

शिवांगी गोयल पिखुवा, हापुड़ की रहने वाली है। वह 7 साल की एक छोटी सी बच्ची की मां भी है। उनके पिता एक बिजनेस मैन हैं और माता एक होम मेकर। अपने कंधों पर एक छोटी बच्ची की जिम्मेदारी के होने के बावजूद उन्होंने यूपीएससी एग्जाम पास करके अपने परिवार का नाम रोशन कर दिया। उन्होंने अपनी जिंदगी में कई मुश्किलों का सामना किया है।

साक्षी शादीशुदा हैं। जब वह अपने सास ससुर के साथ रहती थी तो वे उनके साथ घरेलू हिंसा किया करते थे। और उन्हें प्रताड़ित भी किया करते थे। उनसे परेशान होकर वह घर छोड़कर अपने माता पिता के घर चली गई। उनका अपने पति के साथ डायवोर्स का केस भी चल रहा है।

उन्होने दूसरी महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि अगर आप भी किसी तरह की घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं तो इसके खिलाफ आवाज उठाएं। आपको किसी से भी डरना नहीं चाहिए। पूरा देश आपकी मदद के लिए हाज़िर है। आपको अपने पैरों पर खड़े होकर दिखाना होगा। महिलाएं कुछ भी कर सकती हैं। अगर आप UPSC की परीक्षा के तैयारी करेंगी तो आप भी IAS बन सकती हैं। 

उन्होंने बताया कि वह शादी से पहले IAS बनना चाहती थी। लेकिन यूपीएससी की परीक्षा दो बार फेल होने के बाद उन्होंने शादी करली। अपने इन लॉस के घर में उन्हें घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा। जिसके कारण वह अपने बेटी के साथ अपने माता-पिता के घर चली गईं।

उनके पिता ने उन से कहा कि तुम्हे जो भी करना है तुम करो। साथ ही उन्होंने कहा कि तुम यूपीएससी की तैयारी क्यों नहीं करती? IAS बनना शिवांगी का बचपन का सपना था। वह इस मुकाम पर पहुंचने के लिए सालों से सपने देख रहीं थीं।

जब वह छोटी थी ओर स्कूल जाती थीं। तब उनके प्रिंसिपल ने एक बार उनसे कहा था कि तुम IAS की तैयारी करना। शिवांगी को तभी से IAS बनने का तभी से जुनून हो गया। और आज आखिर में उन्होंने जो सोचा था वही हासिल किया।

कुछ बनने का या कुछ करने का कोई वक्त नहीं होता है। जब भी मौका मिले झपट लेना चाहिए। महिलाओं की ताकत उनके सशक्तिकरण में ही है। इसलिए आगे बढ़ें।

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