तम्बाकू नहीं, ज़िंदगी चुनो: World No Tobacco Day पर जानिए इसकी लत से कैसे बचें

जानिए World No Tobacco Day क्यों मनाया जाता है, तम्बाकू के नुकसान क्या हैं, और इसे छोड़ने के लिए कौन-कौन से आसान और असरदार तरीके अपनाए जा सकते हैं।

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Vaishali Garg
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तम्बाकू अब केवल लत नहीं रहा, यह एक पूरी इंडस्ट्री है जो युवाओं के दिमाग से खेल रही है। हर साल 31 मई को मनाया जाने वाला World No Tobacco Day, इसी सच्चाई को सामने लाने का एक प्रयास है। इस साल यानी 2025 का थीम है "Unmasking the Appeal: Exposing Industry Tactics on Tobacco and Nicotine Products", यानी तम्बाकू और निकोटीन प्रोडक्ट्स को लेकर जो आकर्षण गढ़ा गया है, उसका पर्दाफाश करना।

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आधुनिक पैकेजिंग, रंग-बिरंगे फ्लेवर, सोशल मीडिया पर 'cool' दिखने वाले इन्फ्लुएंसर्स ये सब किसी अंधे कुएं की तरफ ले जाते हैं। ज़रूरत है इस नकाब को हटाने की और सच देखने की।

World No Tobacco Day 2025: तम्बाकू की चमक नहीं, इसके पीछे का ज़हर पहचानो

कंपनियों की चालें और युवाओं का शिकार

तम्बाकू इंडस्ट्री अच्छी तरह जानती है कि सीधे तौर पर कोई नशे की चीज़ नहीं बेची जा सकती, इसलिए उन्होंने इसे 'स्टाइल स्टेटमेंट' बना दिया है। स्कूल और कॉलेज जाने वाले युवाओं को टारगेट किया जाता है। फ्लेवर वाला वेप, स्लिम सिगरेट्स, डिजिटल ऐड, ये सब एक ब्रांडेड जाल हैं जिसमें धीरे-धीरे मानसिक और शारीरिक गुलामी बढ़ती जाती है।

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युवाओं को लगता है कि वेपिंग या निकोटिन पैच से कम नुकसान होगा, जबकि सच्चाई यह है कि निकोटिन किसी भी रूप में शरीर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। जो दिखता है वो अक्सर नहीं होता।

तम्बाकू का प्रभाव दिखता नहीं, लेकिन मारता ज़रूर है

तम्बाकू का असर धीरे-धीरे होता है, इसीलिए इसे नजरअंदाज करना आसान लगता है। लेकिन जब असर दिखता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। मुंह और फेफड़ों के कैंसर से लेकर दिल की बीमारियों तक, तम्बाकू हर अंग पर हमला करता है। यह शरीर के साथ-साथ आत्मविश्वास, रिश्ते और भविष्य को भी निगल जाता है।

कई बार लोग सोचते हैं कि थोड़ी मात्रा में सेवन करने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन रिसर्च बताती है कि तम्बाकू की छोटी आदतें भी बड़ी बीमारियों की शुरुआत होती हैं।

छोड़ना मुश्किल जरूर है, पर नामुमकिन नहीं

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तम्बाकू छोड़ना एक दिन का काम नहीं है, लेकिन हर दिन की एक ईमानदार कोशिश आपको इस लत से दूर ले जा सकती है। सबसे पहले खुद से सच्चा होना ज़रूरी है, यह मानना कि यह आदत नुकसानदेह है। उसके बाद अपने ट्रिगर्स को पहचानिए। किस वक्त और किन परिस्थितियों में आपको तलब लगती है उसे समझना पहला कदम है।

पारिवारिक सपोर्ट, प्रोफेशनल काउंसलिंग, निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपी जैसे विकल्प आज आसानी से उपलब्ध हैं। कुछ लोग मोबाइल ऐप्स की मदद से ट्रैकिंग और मोटिवेशन पाते हैं। और हां, यह भी समझना ज़रूरी है कि पीछे हटना कमजोरी नहीं, बल्कि दोबारा शुरू करना ताकत है।

यह सिर्फ आपकी सेहत का मामला नहीं है

तम्बाकू से केवल सेवन करने वाला ही नहीं, उसके आस-पास रहने वाले लोग भी प्रभावित होते हैं। बच्चों को पैसिव स्मोकिंग से सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए यह बेहद खतरनाक है। तम्बाकू की आदत परिवार में आर्थिक तनाव भी ला सकती है।

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इसलिए जब आप तम्बाकू छोड़ते हैं, तो आप सिर्फ अपनी नहीं, अपने परिवार और समाज की सेहत का भी ख्याल रख रहे होते हैं।

अब समय है नकाब हटाने का

World No Tobacco Day 2025 का उद्देश्य सिर्फ लोगों को तम्बाकू के नुकसान के बारे में बताना नहीं है, बल्कि यह भी समझाना है कि हम किस तरह एक सुनियोजित मार्केटिंग जाल में फंसाए जा रहे हैं।

यह दिन हमें याद दिलाता है कि आज जो "cool" या "trendy" लगता है, वही कल जीवन भर की बीमारी बन सकता है। इस दिन को केवल एक जागरूकता अभियान न समझें इसे एक नई शुरुआत का दिन मानें।

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