Stigma Of Being Single: सिंगल महिला से जुड़े 5 स्टिग्मा

Stigma Of Being Single: सिंगल महिला से जुड़े 5 स्टिग्मा Stigma Of Being Single: सिंगल महिला से जुड़े 5 स्टिग्मा

Monika Pundir

11 Jun 2022

आंकड़ों के मुताबिक भारत में सिर्फ 11% महिलाओं की कभी शादी नहीं हुई है। लगभग 21% सिंगल महिलाओं में तलाकशुदा, अविवाहित, विधवा या अलग हो चुकी महिलाएं शामिल हैं। पिछले कुछ वर्षों में संख्या में वृद्धि हुई है लेकिन भारत जैसे देश में सिंगल महिलाओं के संघर्षों को कवर नहीं किया जा सकता है।

सिंगल महिलाएं हमेशा समाज की स्क्रूटनी के दायरे में होती हैं और उन्हें केवल उनकी पसंद के आधार पर आंका जाता है। अगर वे अविवाहित हैं और अकेले रह रहे हैं तो उनके लिए स्थिति और खराब हो जाती है।

"बेटा, तुम अकेले कैसे रहोगी? हर किसी को एक साथी की जरूरत होती है, खासकर घर के आदमी की।" जिस क्षण कोई महिला कहती है कि वह अविवाहित है, उस पर इस तरह की कमेंट और सवालों की बौछार हो जाती है। सिंगल औरत होने को इतनी खराब रोशनी में देखा जाता है कि कोई उससे शादी नहीं कर रहा है, तो उसमें ही कुछ बुराई होगी।

लेकिन लोग ये क्यों भूल जाते हैं की लड़की की अपनी इच्छा हो सकती है अकेले रहना।

अकेले रहने से जुड़े स्टिग्मा जो औरतें सामना करती हैं: 

1.चरित्रहीन

सिंगल महिलाओं के आसपास सबसे आम कलंक यह है कि वे चरित्रहीन या नैतिक रूप से ढीले हैं। यह उनके सिंगल होने के पीछे के कारणों में से एक के रूप में देखा जाता है। सिंगल महिलाओं को नार्मल व्यक्तियों जैसा नहीं देखा जाता। अकेले रहने वाली सिंगल महिलाओं की प्रत्येक काम की स्क्रूटनी (जांच) की जाती है और उन्हें बुरी तरह से आंका जाता है। हमारे समाज में सिंगल होना या न होना हमारे चरित्र और इरादों को तय करता है।

2. दुखी और उदास

अकेले रहने वाली सिंगल महिलाओं के बारे में एक और स्टिग्मा यह है कि वे दुखी और उदास हैं। माना जाता है कि एक महिला एक समय में सिंगल और खुश नहीं हो सकती है। एक अकेली महिला अपने आप एक बुरा प्रभाव बन जाती है और माना जाता है कि अन्य महिलाओं को उनसे दूरी रखना चाहिए। यह मान लिया जाता है कि अगर उसने शादी नहीं करने का फैसला किया है तो उसके साथ कुछ गड़बड़ है। वह शायद अकेलेपन से उदास है।

3. आत्मकेंद्रित

माना जाता की सिंगल लोग फेल्फ़ सेंटर्ड और स्वार्थी होते है। लेकिन सुर्वे ने बिल्कुल विपरीत दिखाया है कि विवाहित लोगों की तुलना में अविवाहित लोगों को अपने दोस्तों और पड़ोसियों को प्रोत्साहित करने, मदद करने और सोशलाइस करने की अधिक संभावना है। उनके अपने भाई-बहनों और माता-पिता से मिलने, समर्थन करने, सलाह देने और संपर्क में रहने की भी अधिक संभावना है। अविवाहित महिलाओं का बिना किसी कारण उपहास किया जाता है।

4. बेचारी

भारतीय अंकल-आंटी, अन्य लोगों की बेटियों पर अपना इमोशनल बोझ और दबाव डालते हैं। सिंगल महिलाओं को बताया जाता है कि वे समाज का सामना कैसे करेंगी, जैसे कि वे समाज के प्रति जवाबदेह हों। 'बेचारी' उनके लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है जैसे कि सिंगलडम एक अभिशाप है और सबसे बुरी चीज जो उनके साथ हो सकती है। अकेले रहने वाली सिंगल महिलाओं को जीवन साथी की तलाश में जरूरतमंद और दुखी महिलाओं के रूप में माना जाता है। लेकिन ऐसा नहीं है। कई महिलाएं काम करने, यात्रा करने और अपने जीवन का आनंद ले कर अपना बेस्ट जीवन जी रही हैं।

5. अविवाहित अपनी पसंद से नहीं बल्कि असहायता के कारण

एक सिंगल महिला को सिंगल रहने और अकेले रहने के लिए उसकी 'पसंद' के लिए इतनी कठोरता से जज किया जाता है। 'शादी नहीं हो रही होगी’ पहला विचार है। अगर वह खुद शादी नहीं चाहती? क्या होगा अगर वह अकेले रहना चाहती है? सिंगल रहना और अकेले रहना वास्तव में 'पसंद' हो सकता है, यह पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है। मुख्य रूप से यह माना जाता है कि महिलाएं अपनी पसंद से अकेली नहीं रह सकतीं, लेकिन वे बेबसी के कारण अकेली हैं।

 यह एक महिला की पसंद है कि वह शादी करना चाहती है, चाहे वह अविवाहित रहना चाहती है, वह लिव-इन में रहना चाहती है या वह अकेले रहना चाहती है। यह पूरी तरह से उनकी पसंद है और सभी विकल्प सही हैं। आपको जीवित रहने के लिए एक आदमी की जरूरत नहीं है। तो, अविवाहित या विवाहित आपको बस अपनी पसंद में खुश रहने की जरूरत है।

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