जब रिश्ता दो लोगों का है, तो एडजस्ट सिर्फ महिलाओं से ही क्यों?

कई बार महिलाएं चुपचाप इसलिए एडजस्ट करती रहती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि बोलने से रिश्ता बिगड़ जाएगा। लेकिन असल में, कम्युनिकेशन ही रिश्ते को मजबूत बनाता है

author-image
Dimpy Bhatt
New Update
if a relationship is between two people why do only women adjust

Photograph: (File)

“थोड़ा एडजस्ट कर लो।” ये एक ऐसा फ्रेज है जो अक्सर शादी या रिश्ते में कदम रखते ही महिलाओं को सुनने को मिल जाता है। घर बदला, शहर बदला, करियर रोका, आदतें बदलीं—और हर बार यही उम्मीद का कोम्प्रोमाईज़ वही करेंगी। लेकिन सवाल ये है कि जब रिश्ता दो लोगों का है, तो एडजस्टमेंट की जिम्मेदारी एक तरफ ही क्यों झुकी रहती है?

Advertisment

जब रिश्ता दो लोगों का है, तो एडजस्ट सिर्फ महिलाओं से ही क्यों?

एडजस्टमेंट या सैक्रिफाइस?

कोम्प्रोमाईज़ किसी भी रिश्ते का हिस्सा होता है। दो अलग पर्सनालिटीज, दो अलग उपब्रिंगिंग और दो अलग सोच—कन्फ्लिक्ट्स होना नेचुरल है। लेकिन जब एडजस्टमेंट ओने साइडेड (one sided) हो जाए, तो वह अंडरस्टैंडिंग नहीं, इनक्वालित्य बन जाती है।

कई घरों में आज भी ये मान लिया जाता है कि शादी के बाद लड़की को ही नए माहौल में ढलना होगा। उसकी जॉब, उसके ड्रीम्स, उसकी डेली रूटीन—सब “सिचुएशन” के हिसाब से बदले जाएंगे। वहीं पुरुष से बहुत कम एक्सपेक्ट किया जाता है की वो अपनी कम्फर्ट या सोच में बदलाव लाए।

सोशल थिंकिंग की रूट्स 

बचपन से लड़कियों को सिखाया जाता है—“घर बसाना है”, “रिश्ते निभाने हैं”, “बड़ों की बात माननी है।” ये सीख बुरी नहीं, लेकिन जब यही लेसन लड़कों को नहीं दी जाती, तो बैलेंस बिगड़ जाता है। रिश्ते में इमोशनल लेबर भी अक्सर महिलाओं के हिस्से आता है—मनाना, समझाना, सबकी फीलिंग्स का ख्याल रखना। धीरे-धीरे यह जिम्मेदारी उनकी “डिफॉल्ट ड्यूटी” बन जाती है।

Advertisment

करियर और आइडेंटिटी पर असर

एडजस्टमेंट की ये इनक्वालित्य सिर्फ इमोशनल नहीं, पेशेवर भी होती है। कई महिलाएं शादी या मैटरनिटी के बाद अपने करियर में ब्रेक लेती हैं, जबकि पुरुषों से शायद ही कभी ऐसा एक्सपेक्टेशन होती है।

बराबरी का रिश्ता कैसा हो?

बराबरी का रिश्ता (relationship) वो है जहां डिसिशन मिलकर हों, और सैक्रिफाइस भी शेयर हो। अगर एक पार्टनर को नई जगह शिफ्ट होना पड़े, तो दूसरा भी अपने हिस्से की रिस्पांसिबिलिटी समझे। अगर एक का करियर इम्पोर्टेन्ट है, तो दूसरे का भी उतना ही रेस्पेक्ट हो।

बातचीत है पहली सीढ़ी

कई बार महिलाएं चुपचाप इसलिए एडजस्ट करती रहती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि बोलने से रिश्ता बिगड़ जाएगा। लेकिन असल में, कम्युनिकेशन ही रिश्ते को मजबूत बनाता है। आखिर सवाल यही है, जब रिश्ता दो लोगों का है, तो जिम्मेदारी भी दोनों की होनी चाहिए। प्यार में बराबरी होनी चाहिए, सिर्फ उम्मीदों में नहीं।

Advertisment
करियर relation