Male dominance: कब तक औरत को मर्द की ग़लतियाँ का बोझ उठाना पढ़ेगा?

Swati Bundela
03 Oct 2022
Male dominance: कब तक औरत को मर्द की ग़लतियाँ का बोझ उठाना पढ़ेगा?

हमारे समाज हर चीज़ का हल शादी है।ख़ासकर लड़कों कुछ ना कर रहे हो अपनी ज़िंदगी में तो माँ-बाप कहने लग जाते है कि इसकी शादी कर दो यह अपने आप सुधर जाएगा। यह नहीं सोचते वह अपनी ज़िंदगी तो ख़राब कर रहा है साथ में इसकी भी करेगा। बहुत सी लड़कियों को परिवार वालों ने टाक्सिक लड़के के साथ शादी करवा कर उनकी  ज़िंदगी को बर्बाद किया है।

लड़का नशा कर रहा है शादी करवा दो

भारतीय घरों में आज भी जब लड़का नशे करने लग जाए तो परिवार वाले, माँ-बाप सलाह देने लग जाते है इसकी शादी करवा दो अपने आप नशे छोड़ देगा। शादी क्या कोई दवाई है? जिसे करवा के वह नशे करना छोड़ देगा। जब शादी हो जाती है वह उस लड़की की भी ज़िंदगी ख़राब करता।कई बार तो मार-पीट करते है। लड़कियों की ज़िंदगी नरक बन जाती है।

ज़िम्मेदारी नहीं समझ रहा शादी कर देते है

अगर लड़का ज़िम्मेदारी ना समझे तब भी उसकी शादी कर देते है। माँ-बाप पहले लड़कों पर प्रेशर बनाते उन्हें प्यार से रखते है।जब लड़के बड़े हो जाते है वे अपनी ज़िम्मेदारी नही समझते तब उनकी शादी कर देते है।जिससे वह उस लड़की की भी ज़िंदगी ख़राब कर देते है।

लड़का कमा नहीं रहा शादी करवा दो 

अगर लड़का अभी कमा नहीं रहा लेकिन उसकी शादी लर देते जब परिवार की ज़िम्मेदारी पड़ेगी अपने आप कमा कर लाएगा।ऐसे में वह लड़की भी भूखी मरती है जिससे उसने शादी की है।

लड़की से क्यों यह अपेक्षा रखी जाती है कि वह लड़के की ज़िंदगी में आ कर उसको सुधारेगी। क्या वह अपने आप नहीं अपनी समस्याओं को सुलझा सकता। हर बार औरत हाई क्यों मर्द की ग़लतियों को सहन करें। अगर उसने औरत पर हाथ उठाया तब भी औरत चुप- चाप सहन कर ले उस कुछ नहीं कहे। अगर वह उसे प्यार नहीं करता तब भी वह ऐसे रिश्ते में अपना एफ़र्ट डाले।अगर वह काम नहीं कर रहा उसमें भी औरत की गलती होगी।वह ही हमेशा क्यों मर्द की ग़लतियों का भार उठाए।

औरत को अपनी ज़िंदगी जीने का मौक़ा नहीं दिया जाता 

औरत हमेशा अपनी ज़िंदगी दूसरों के लिए जीती आई है।घरवालों को पसंद नहीं है इसलिए वेस्टर्न नहीं पहन सकती है। बच्चों को पालना है इसलिए नौकरी छोड़ दी। पति लो दोस्तों के साथ घूमना नहीं पसंद तो दोस्त छोड़ दिया। सुसराल वाले चाहते घर सम्भालो नौकरी नहीं तो वह कर लिया। अपने लिए कब कुछ किया।हमेशा दूसरो के लिए जीती आईं है फिर भी कह देते है तुम करती क्या हो? सारा दिन घर पर हो होती हो।

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