Multitasking Women: सुपरवुमन का टैग, तारीफ या बेड़ी?

Multitasking Women: सुपरवुमन का टैग, तारीफ या बेड़ी? Multitasking Women: सुपरवुमन का टैग, तारीफ या बेड़ी?

Monika Pundir

20 Jun 2022

हमारे समाज में, विवाह में घरेलू कामों का समान विभाजन अभी भी एक नया विचार है। रुष अभी भी काम के बाद सोफे पर लेट सकते हैं जबकि महिला को, उनके रोजगार पर ध्यान दिए बिना, 24⤫7 घर चलाना होगा। भले ही कई घरों में महिलाओं को अब करियर बनाने की स्वतंत्रता है, फिर भी उनसे घरेलू काम का अधिक बोझ उठाने की उम्मीद की जाती है। 

पालन-पोषण के कर्तव्यों, जो घरेलू कार्यों के प्रदर्शन के साथ सहज रूप से जुड़े हुए हैं, को एक महिला के अंतिम कर्म के रूप में रोमान्टीसाईस किया जाता है। लेकिन क्यों? महिलाओं को घर के काम और बाहर के  काम दोनों का बोझ क्यों उठाना पड़ता है? महिलाएं अपने नए अवतार में भी अपनी पारंपरिक भूमिका का एक बड़ा हिस्सा लेकर क्यों घूमती हैं?

एक महिला के मूल्य को उसके घर के काम संभालने की शमता से आंकना, उन सेक्सिस्ट स्टेरिओटाइप को बढ़ावा देता है, जिनसे हम दूर होना चाहते हैं।

मल्टीटास्किंग महिलाओं का मिथक

जो महिलाएं पत्नीत्व और मातृत्व के पैट्रिआर्केल आदर्शों के साथ साथ अपने क़रीर के काम को जारी रखने को ‘मल्टी टास्कर’ या ‘सुपरवुमेन’ का टैग तारीफ के तरह युस करने से बुरा प्रभाव पड़ता है। आदमी और औरत, दोनों सोचते हैं की औरत का क्षमता से अधिक काम करना सही है। आदमी मदद नहीं करता और औरत कुछ बोलती नहीं।

एक महिला होने की पहचान

घरेलू काम एक "अच्छी" महिला होने की पूर्वापेक्षा, क्रेडेंशियल या पहचान है जबकि पुरुषों के लिए ऐसे कोई नियम नहीं हैं। एक अच्छी महिला कभी भी अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हटती है, इससे भी बेहतर यह है कि वह कभी भी दूसरों से अपने काम में मदद करने के लिए नहीं कहती है और यह सुनिश्चित करती है कि उसके प्रियजन आराम से रहें- दूसरे शब्दों में, उसे बिल्कुल भी मेहनत करने की ज़रूरत नहीं है। इससे महिलाएं अपने पति से मदद लेने में खुद को दोषी महसूस करती हैं और उन्हें घर के कुछ कामों को करने देती हैं। 

लिंग आधारित कार्य 

हमारे समाज के लिए घरेलू कार्य का कॉन्सेप्ट एक 'जीवन कौशल' है न कि 'लिंग भूमिका' अभी भी नई है। जो पुरुष घर का काम शायर करते हैं, वे "अधिक मर्दाना" काम करना पसंद करते हैं जैसे कि टपकता हुआ नल ठीक करना, हालांकि, घर में रोजाना टपकने वाले नल नहीं आते हैं। दूसरी ओर, पुरुष झाड़ू लगाना या बर्तन धोना (जो कि दैनिक आधार पर करने की आवश्यकता होती है) जैसे कामों को टालते हैं क्योंकि वे कम मर्दाना महसूस करते हैं।

हमें इस सोच पर सवाल उठाने की जरूरत है 

महिलाओं को यह पूछने की जरूरत है कि समाज को उन सभी कामों को रोमांटिसाइज करने से क्या हासिल होगा जो वे "मल्टीटास्किंग" के रूप में करती हैं? इस तरह समाज महिलाओं को घरेलू कर्तव्यों का पालन करने के लिए प्रेरित करता है और पुरुषों को उसी तरह से बचाता है जैसे हम उन्हें देखते हैं। जो पुरुष घर के कुछ काम कर दे, उसे महान मन जाता है, जबकि उसे नार्मल और काम न करने वाले को आलसी या ख़राब मनना चाहिए। घर दोनों का तो काम एक का कैसे?

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