Insecurities In Relationships: रिलेशनशिप इंसिक्योरिटी के टाइप

Insecurities In Relationships: रिलेशनशिप इंसिक्योरिटी के टाइप Insecurities In Relationships: रिलेशनशिप इंसिक्योरिटी के टाइप

Monika Pundir

16 Aug 2022

रिलेशनशिप में इनसिक्योरिटी होना बहुत ही आम बात है। हम अपने पार्टनर से प्यार और उन पर भरोसा तो करते हैं, पर कभी कभी थोड़ा शक भी करते हैं। कभी कभी हम अपने आप पर शक करते हैं की क्या हम उनके लिए सही हैं? क्या वे हमारे साथ खुश रहेंगे? इत्यादि। इस ब्लॉग में पढ़ें 5 तरह के इंसिक्योरिटी जो आपको या आपके पार्टनर को अपने रिलेशनशिप में महसूस हो सकती है।

रिलेशनशिप इंसिक्योरिटी के टाइप:

1. अटैचमेंट इंसिक्योरिटी 

अटैचमेंट इंसिक्योरिटी बचपन के समस्याओं के कारण होती है। जिस इंसान को अपने बचपन में, माता पिता और परिवार का प्यार मिलने में संघर्ष करना पड़ा या मिला ही नहीं, ऐसे लोग एडल्ट होने के बाद भी रिलेशनशिप जोड़ने में समस्या महसूस करते हैं।

इसमें किसी पार्टनर की गलती नहीं होती है, इसलिए रोमांटिक रिश्ते में जब एक पार्टनर को अटैचमेंट इनसिक्योरिटी होती है, उन्हें अपने आप पर काम करना होगा, अपने आप से प्यार करना होगा। इसके लिए वे थेरेपी का सहारा भी ले सकते हैं, जो की बहुत लाभदायक होगा।

2. इमोशनल इंसिक्योरिटी 

इमोशनल इनसिक्योरिटी को समझना बहुत ही आसान है। जब कोई व्यक्ति अपनी भावनाएं, अपने इमोशंस को बयान करने से डरता है, इसे इमोशनल इनसिक्योरिटी कहा जाता है। इमोशनल तौर पर इनसेक्योर लोगों को किसी के सामने वल्नरेबल या कमज़ोर दिखने से डर लगता है। यह पारिवारिक रूप से कम इमोशनल सपोर्ट मिलने के कारण हो सकता है।

3. फाइनैंशल इंसिक्योरिटी 

फाइनेंशियल इनसिक्योरिटी यानी वित्तीय रूप से खुद को असुरक्षित महसूस करना। हर व्यक्ति को कुछ हद तक फाइनेंशियल रूप से किसी न किसी समय इनसेक्योर पता है, मगर रिलेशनशिप में फाइनैंशल इन्सेक्योरिटी थोड़ी अलग है। अगर एक पार्टनर की कमाई और वित्तीय स्थिति दुसरे से बहुत अलग है, और ख़ास कर, कम है, उसे फाइनैंशल इंसिक्योरिटी महसूस हो सकती है। 

पार्टनर्स एक दुसरे के खर्च और बचत के शैली अलग होने पर भी इनसेक्योर हो सकते हैं। इन समस्याओं को निपटना ज़्यादा मुश्किल नहीं है। आपको बस पैसो के बारे में चर्चा को टालने से बचना चाहिए। कम्युनिकेशन बहुत ही अहम है। अगर आप अपने पार्टनर से बात नहीं करेंगे तो वे कैसे समझेंगे की आपको कोई बात पसंद नहीं आ रही है? 

लॉन्ग टर्म पार्टनर्स, लिव इन कपल्स और शादी शुदा कपल्स को अपने फाइनांस के बारे में ज़रूर बात करनी चाहिए, और रेग्युलर्ली बात करनी चाहिए। आपको अपने सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट प्लान्स के बारे में बात करनी चाहिए। 

4. फिसिकल इंसिक्योरिटी/ बॉडी इमेज इश्यूज़ 

इस युग में हम सोशल मीडिया और सिनेमा, टेलीविश्न से इतने घिरे हुए हैं की हम मीडिया पर जो देखते हैं, उसे ही सच मान लेते हैं। सोशल मीडिया पर सब परफेक्ट होता है। सब सुन्दर दीखते हैं। अधिकतर लोगों के शरीर पर एक इंच भी फैट नहीं होता। उनके त्वचा पर एक भी दाग नहीं होता। पर हमारे शरीर पर होता है। हमारे चेहरे पर पिम्पल्स आते हैं। हमारे त्वचा पर बचपन के लगे चोट के निशान होते हैं। जब हम बैठते हैं, हमारे पेट की त्वचा में रिंकल्स होते हैं। जब हम हंसते हैं, हमारे चेहरे पर लाइंस आते हैं। पर इससे हमें इनसिक्योरिटी होती है।

हम टीवी या सोशल मीडिया पर जो देखते हैं हम वैसा बनना चाहते हैं। पर 1 मिनट के रील के पीछे जो घंटे भर की मेहनत लगी है वो हम नहीं देख पाते। हम लाइटिंग और मेकअप नहीं देख पाते। उस एक मिनट के रील के लिए कैमरा को कितने बार एडजस्ट किया गया है हम नहीं जानते।

सोशल मीडिया के कारण बॉडी इमेज इश्यूज़ बहुत बढ़ गए हैं। हम अपने आप को कम सुन्दर मानते हैं और सोचते हैं की हमारा पार्टनर किसी और के लिए हमे छोड़ देगा। हमें दो बाते समझनी चाहिए- 1) रील्स में दिखाया गया कुछ भी असली नहीं है, 2) अगर हमारा पार्टनर हमे किसी और के लिए छोड़ दे, तो वे हमारे लिए कभी अच्छे थे ही नहीं।

हमे अपने आप से प्यार करने की ज़रूरत है।

5. प्रोफेशनल इंसिक्योरिटी 

प्रोफेशनल इंसिक्योरिटी का अर्थ है प्रोफेशनल लाइफ में असुरक्षित महसूस करना। आपको लग सकता है की आप अपने काम और करियर में अच्छे नहीं है, या करियर के लिए रेलशनशिप पर असर पड़ सकता है। कुछ लोगो को ऐसा भी लगता है की पर्सनल/ रोमांटिक रिलेशनशिप के कारण प्रोफेशनल लाइफ और करियर पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। इस कारण वे इनसेक्योर महसूस करते हैं।

पाया गया है की फ्रोफेशनल इंसिक्योरिटी महिलाओं में ज़्यादा होती है, क्योंकि पारम्परिक रूप से महिलाओं को घर के कामों में कुशल माना गया है। सदियों से महिलाओं को कहा गया है की अगर वे बाहर काम करने का निर्णय लेती हैं, उनके परिवार और रिश्तों पर बुरा असर पड़ेगा। इससे निपटने  लिए लोगों को सबसे ज़्यादा एटीएम विश्वास की ज़रूरत है। 

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