Child Education And Care: जानिए किन बातों से बनती है आपकी स्कूल लाइफ़ कठिन

Apurva Dubey
10 Oct 2022
Child Education And Care: जानिए किन बातों से बनती है आपकी स्कूल लाइफ़ कठिन

स्कूल लाइफ़ हमारी ज़िंदगी का सबसे अच्छा समय होता है।यहाँ पर हम अपनी लाइफ़ की शुरुआत करते है और बहुत कुछ सीखते है। इस समय पर हमारे दोस्त भी बनते है लेकिन अच्छे पल के साथ-साथ हमारे कुछ बुरे पल भी होते। पित्तरसत्ता सोच हमारे स्कूलों में भी दिखती है। हमारी टीचर्ज़ इसको बहुत बढ़ावा देते है।आज हम ऐसी चीजें आप को बताएँगे जो हमारी स्कूल लाइफ़ को कठिन बनाते है-

Child Education And Care: जानिए किन बातों से बनती है आपकी स्कूल लाइफ़ कठिन

1.लड़को से बात मत करो- 

स्कूल में हमेशा लड़कियों को बोला जाता है की लड़कों से बात मत करो।जो लड़कियाँ लड़कों से ज़्यादा बात करती है उन्हें अच्छा नहीं माना जाता है। टीचर्ज़ भी उनको अच्छा नहीं मानती है।उनका चरित्र अच्छा नहीं माना जाता है। क्यों आज भी हमारे समाज में लड़कियों को इतना रोक जाता है। स्कूल में भी उन पर इतनी रोक लगाई जाती है।

2.हर समय टीचर आप पर नज़र रखती है-

स्कूल में हर समय टीचर्ज़ आप पर नज़र रखती है।आप ने स्कर्ट की कितनी लम्बाई पहनी है। आपने बाल खुले छोड़े है या नहीं।इस तरह आपकी टीचर हर समय आप मॉरल पुलिस की तरह पीछे रहती है।ऐसी चीज़ स्कूल में पित्तरसत्ता सोच को बढ़ावा देता है।

3.बच्चे को मारना जायज़ है-

भारतीय स्कूल में आज भी बच्चे को मारना जायज़ गई क्योंकि उसने होम्वर्क नहीं किया है। यह चीज़ स्कूल की सबसे ग़लत है। बच्चे को सिर्फ़ होम्वर्क ना करने पर मारना बिल्कुल ग़लत है।इससे उसकी मानसिक हालत ख़राब होती है।उसके मन में डर बैठता है। वे सिर्फ़ पढ़ाई को डर के कारण पड़ता है।

4.लड़कों के लड़कियों के साथ बैठने नहीं देना-

आज भी स्कूलों में लड़कों को लड़कियों के साथ बैठने नहीं देना दिया जाता है।इससे उन्मे लैंगिक असमानता बढ़ती है।जब वे एक दूसरे के साथ खुलकर बात नहीं कर पाते तब वे अपने मन दूसरे जेंडर के प्रति कुछ धारणाएँ बना लेते है।

5.लड़कियों को खेलो में भागीदारी के लिए प्रोत्साहन नहीं किया जाता-

⁠⁠⁠⁠⁠⁠⁠आज भी बहुत से ऐसे स्कूल है यहाँ पर लड़कियों को खेलों में बहुत कम मौक़े दिए जाते है।उनको लड़कों के मुक़ाबले कम प्रोत्साहन किया जाता है।आज भी लड़कियाँ लड़कों से खेलों में पीछे है क्योंकि उन्हें स्कूल लेवल पर इतने मौक़े नहीं दिए जाते है।

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