एक बच्चे के सबसे पहले शिक्षा होते हैं उसके माता-पिता। माता-पिता के कर्मों का फल और सजा दोनों उनके बच्चों को ही मिलती है। माता पिता जो भी करते हैं उसका बच्चों की जिंदगी पर गहरा प्रभाव होता है। यह प्रभाव सकारात्मक होगा या नकारात्मक यह पेरेंट्स के हाथ में होता है।
अगर वे चाहें तो अपने बच्चों की जिंदगी को स्वर्ग बना सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ उनकी कुछ गलतियां बच्चों की जिंदगी तबाह कर सकती हैं। आपको यह सोचना चाहिए कि आप अपने बच्चे की जिंदगी को किस तरह बेहतर बना सकते हैं और ऐसी गलतियां करने से बचना चाहिए जो उनके लिए नुकसानदायक हैं। मगर गलतियां सुधरेंगे तो तब जब आपको उन गलतियों के बारे में पता होगा। तो आइए बताते हैं आपको वह गलतियां।
1. बच्चों की सारी जिद पूरी करना
पेरेंट्स अपना वक्त और ऊर्जा बचाने के लिए बच्चों के नखरे उठाने से बेहतर उनकी इच्छाओं को पूरा करना समझते हैं। माफ कीजिएगा इच्छाएं नहीं ज़िद। बच्चा स्मार्टफोन मांगता है या बाइक पेरेंट्स उसकी जिद को पूरा कर देते हैं क्योंकि उनके पास अपने बच्चे के नखरों से डील करने के लिए वक्त नहीं होता। देखते ही देखते यह ज़िद उनकी आदत बन जाती है। गलत रास्ते पर जाने के बाद उन्हें वहां से वापस लाना बहुत मुश्किल हो जाता है।
2. जीतना है हारना नहीं
आज के जमाने में प्रतियोगिता इतनी बढ़ चुकी है की पढ़ाई भी कोई बिना जीत के सोचे हुए नहीं कर सकता है। ऐसे में पेरेंट्स अपने बच्चों को जीतने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। लेकिन उस प्रोत्साहन के चक्कर में वह उन्हें कभी यह सिखाते ही नहीं है कि हार ना कोई गलत बात नहीं है। यह भी नॉर्मल है। जब बच्चे हार जाते हैं तो वह इससे डील नहीं कर पाते हैं और उनका इमोशनल ब्रेकडाउन हो जाता है।
3. समझाने की जगह डांटना
बच्चों का मन चंचल और कोमल होता है। उन्हें प्यार की जरूरत होती है डांट कि नहीं। जब वह कोई गलती करते हैं तो आपको उन्हें प्यार से बैठकर समझाना चाहिए ना कि उन्हें डांटना चाहिए। अधिक डांटने के कारण बच्चे या तो डरपोक बन जाते हैं या निडर। इन दोनों में से कोई भी स्थिति बच्चे की सेहत के लिए अच्छी नहीं है।
4. अपने सपनो को बच्चे पर थोपना
भारतीय घरों में एक बात आमतौर पर देखी जाती है कि जैसे ही कोई बच्चा पैदा होता है उसके मां-बाप यह तय कर लेते हैं कि बच्चे को बड़ा होकर क्या बनाना है। किसी व्यक्ति को क्या बनना है यह उसका फैसला होना चाहिए उसके मां-बाप का नहीं। मां बाप अपने फैसलों और सपनों को बच्चे पर थोप देते हैं जिसके कारण बच्चा अपनी मर्जी से अपने सपने पूरे नहीं कर पाता और जिंदगी भर उसे इस बात का पछतावा होता है।
5. बाहर खेलने के बजाय स्क्रीन के सामने बैठना
जैसे जैसे टेक्नोलॉजी का स्तर ऊंचा हो रहा है माता-पिता बच्चों को बाहर खेलने जाने के लिए उत्साहित ही नहीं करते हैं। वे उन्हें फोन और लैपटॉप लाकर दे देते हैं जिसके कारण बच्चों का बाहर खेले जाने का मन ही नहीं करता। स्क्रीन पर अत्यधिक समय बिताने के कारण बच्चों को स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का एडिक्शन हो जाता है जिसके कारण डिप्रेशन और स्ट्रेस जैसी समस्याएं हो सकती हैं।