Gendered Parenting: क्या होता है, और हमें इससे क्यों बचना चाहिए?

Gendered Parenting: क्या होता है, और हमें इससे क्यों बचना चाहिए? Gendered Parenting: क्या होता है, और हमें इससे क्यों बचना चाहिए?

Monika Pundir

11 Aug 2022

जेंडर रोल्स, यानि लिंग भूमिकाएं और पहचान सदियों से हमारे साथ रही हैं। माता-पिता अपने बच्चों को उनके लिंग के अनुसार व्यवहार करना और कार्य करना सिखाते हैं। वे उन्हें जेंडर रोल के इर्द-गिर्द सामाजिक स्टिग्मा को इंटरनलाइस करने के लिए प्रेरित करते हैं। अगर आप लड़के हैं तो आपको बाहर खेलना चाहिए न कि किचन में। अगर आप एक लड़की हैं तो आपको बाहर नहीं जाना चाहिए बल्कि किचन में अपनी मां की मदद करनी चाहिए। नियम से परे एक कदम को एक ऐसे कार्य के रूप में फटकार लगाई जाती है जो सदियों पुरानी परंपरा के लिए खतरा है। जो बच्चे ट्रडीशनली विपरीत लिंग के किसी काम या खेल को आज़माने की कोशिश करते हैं उन्हें दंडित किया जाता है और कभी-कभी उनके व्यक्तित्व में दोष के रूप में माना जाता है।

क्या पेरेंटिंग और पालन-पोषण परंपराओं पर निर्भर होना चाहिए? क्या पेरेंटिंग बच्चों को स्वीकार करने और उन्हें वह होने देने के बारे में नहीं होना चाहिए जो वे हैं? क्या माता-पिता को अपने बच्चों को सामाजिक नियमों पर निर्भर होने के बजाय स्वतंत्र होना नहीं सिखाना चाहिए? क्या उनकी पसंद को विनियमित करना बच्चों के सामने पालन-पोषण या मानवता का एक अच्छा उदाहरण होगा?

जेंडरड पेरेंटिंग: 

पेरेंटिंग में जेंडर रोल की छाया के कारण कई लड़के और लड़कियों को खुद को स्वीकार करना मुश्किल लगता है। वे अपनी पहचान में एक संघर्ष महसूस करते हैं क्योंकि उन्हें वह बनने के लिए मजबूर किया जाता है जो वे नहीं हैं। माता-पिता जो आदर्श मानते हैं, उसके लिए बच्चे अपने चॉइस को दबाने लगते हैं। कभी-कभी अलग होना किसी का चॉइस नहीं बल्कि एक स्वाभाविक गुण होता है जिसके साथ एक बच्चा पैदा होता है।

अगर उस बच्चे को लगातार कहा जाए कि उसके गुण, जो उसके साथ जन्म से है, दोषपूर्ण हैं, तो क्या वे कभी खुद से प्यार कर पाएंगे? नतीजतन, कई लोग अपनी पहचान के कुछ हिस्सों को दुनिया से छुपा कर रखते हैं। चाहे वह असाधारण प्रतिभा हो, शौक हो या सेक्सुअलिटी।

बच्चों को जेंडर रोल सीखने के परिणाम:

बच्चों को जेंडर रोल सीखने के परिणाम सामाजिक भी हैं और पर्सनल भी। 

1. इक्वालिटी के विपरीत 

जेंडर रोल का कॉन्सेप्ट इक्वालिटी या समानता के विपरीत है। हर व्यक्ति को अपनी पसंद के अनुसार खेल, करियर या रिलैक्सेशन का तरीका चुनना चाहिए, न की समाज के पसंद के अनुसार।

 साथ ही, बच्चों को जेंडर रोल्स सीखने से, वे कभी पूरी तरह इंडिपेंडेंट नहीं हो पाएंगे। एक लड़की अपने पिता, पति या भाई के बिना बल्ब चेंज नहीं कर पायेगी या गाड़ी नहीं चला पायेगी। उसको हमेशा किसी न किसी का इंतज़ार करना पड़ेगा। वैसे ही, एक लड़का अपने लिए खाना नहीं बना पायेगा। उसे किसी न किसी पर निर्भर होना पड़ेगा, चाहे माँ, बहन, पत्नी, डोमेस्टिक हेल्प या रेस्टोरेंट के शेफ का। 

2. ट्रांसजेंडर लोगों के लिए ख़राब

आपका बच्चा ट्रांसजेंडर है या नहीं, आपको तब तक नहीं पा चलेगा जब तक वे आपको न बताएं, और अगर आप उनपर जेंडर रोल फ़ोर्स करेंगे, वे आपको कभी नहीं बता पाएंगे। ऐसा भी हो सकता है की आप किसी ट्रांसजेंडर व्यक्ति के सामने अपने बच्चे को जेंडर रोल के बारे में कुछ बोले, और उन्हें यह बात चुभ जाये। 

3. मेन्टल हेल्थ के लिए हानिकारक

अगर कोई बच्चा अपनी पूरी ज़िन्दगी वो चीज़े करते रहे जो समाज चाहता है, न की जो वह खुद चाहता है, उसे कभी संतुष्टि नहीं मिलेगी। हर व्यक्ति का किसी न किसी चीज़ के लिए एक पैशन होता है। अगर उन्हें उससे दूर किया जाये, उनके मेंटल हेल्थ इ बिगड़ने की चांस बढ़ जाती है।

4. सामाजिक उन्नति के लिए हानिकारक 

अगर मिताली राज के माता-पिता ने उनसे कहा होता “तुम लड़की हो, क्रिकेट मत खेलो, खाना बनाओ”, क्या हमारी भारतीय क्रिकेट टीम वर्ल्ड कप जीत पाती? अगर संजीव कपूर या विकास खन्ना के माता पिता ने उनसे कहा होता, “तुम लड़के खाना मत किचन मेंमत रहो, बाहर खेलो”, क्या वे कभी प्रसिद्ध हो पाते?

जब हम किसी टैलेंटेड व्यक्ति को उसके टैलेंट से दूर करते हैं, सिर्फ क्योंकि वह उसके लिंग से मेल नहीं खाता, हम न सिर्फ उसे हानि पहुंचाते हैं, पूरे देश को हानि पहुंचाते हैं।

इसलिए अपने बच्चे को उसकी मर्ज़ी से खेलने दे, कपडे, करियर चुनने दें, और खुश और संतुष्ट रहने दें। वे आपको धन्यवाद देंगे।

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